चावल निर्यात में भारत शीर्ष पर

चावल निर्यात में भारत शीर्ष पर

नई दिल्ली। भारत दुनिया में चावल निर्यात के क्षेत्र थाईलैंड को पछाड़ कर न केवल पहले स्थान पर पहुंच गया है बल्कि अब पोषण सुरक्षा को ध्यान में रखकर उसमें ऐसे तत्वों का समावेश किया जा रहा है जिससे कुपोषण की समस्या का भी समाधान हो। पिछले साल के दौरान पूरी दुनिया में बासमती और गैर बासमती चावल के निर्यात में भारत का हिस्सा 28.2 प्रतिशत रहा, जबकि कभी चावल निर्यात के क्षेत्र में शीर्ष पर रहे थाईलैंड का हिस्सा घटकर 23.7 प्रतिशत हो गया है। वैश्विक निर्यात में तकनीक के क्षेत्र में अव्वल रहने वाले अमेरिका का 10.4 प्रतिशत, वियतनाम का 7.4 प्रतिशत और पाकिस्तान का 4.9 प्रतिशत हिस्सा है। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के अनुसार देश से बेहतरीन खुशबू, स्वाद और लम्बाई के लिए मशहूर बासमती और गैर बासमती दोनों चावलों का निर्यात किया जाता है। वर्ष 2016-17 के दौरान 21605 करोड़ रुपये मूल्य का 39.90 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया गया, जबकि 2015-16 में 22718 करोड़ रुपये के 40.5 लाख टन का निर्यात किया गया था। वर्ष 2014-15 के दौरान 27597 करोड़ रुपये के 37 लाख टन और 2013-14 के दौरान 37.5 लाख टन इस चावल का निर्यात किया गया था। वर्ष 2016-17 के दौरान 15146 करोड़ रुपये मूल्य का गैर बासमती चावल का निर्यात किया गया था। इसके पूर्व 2015-16 में 15129 करोड़ रुपये मूल्य का 63.66 लाख टन गैर बासमती चावल का निर्यात हुआ था। वर्ष 2014-15 में 20428 करोड़ रुपये मूल्य का 82.74 लाख टन और 2013-14 में 17749 करोड़ रुपये मूल्य का गैर बासमती चावल का निर्यात किया गया।
विश्व के कई देशों में भारत के बासमती चावल की मांग है लेकिन खाड़ी के देश इसके मुरीद हैं। सउदी अरब, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, इराक, कुवैत में इसकी सबसे ज्यादा मांग है। इंगलैंड अमेरिका, यमन, ओमान, कनाडा आदि देशों को भी इसका निर्यात किया जाता है। गैर बासमती चावल का निर्यात पड़ोसी देश नेपाल और बंगलादेश के अलावा दक्षिण अफ्रीका, सउदी अरब, सोमालिया, सेनेगल तथा कई अन्य देशों को किया जाता है। निर्यात के लिए बासमती की बासमती 386, बासमती 217, बासमती 370, पूसा बासमती 1, पूसा 1121, रणबीर बासमती, करनाल लोकल, देहरादून बासमती, पंजाब बासमती एक, और हरियाणा बासमती एक किस्में स्वीकृत है। पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में पैदा की जाने वाली बासमती को निर्यात की अनुमति है। इन राज्यों के अलावा अन्य राज्यों में भी बासमती धान की खेती की जाती है। कुपोषण की समस्या को दूर करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से सम्बद्ध कई संस्थानों और छत्तीसगढ में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने धान की कई किस्में विकसित की है जिनमें प्रोटीन, जिंक और आयरन की बहुलता है। आम तौर पर चावल में कार्बोहाईड्रेट प्रचुर मात्रा में पाया जाती है और उसमें अन्य पोषक तत्वों का अभाव होता है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने धान की एक ऐसी किस्म का विकास किया है जिसमें पोट्रीन की मात्रा 10 प्रतिशत तथा जिंक की मात्रा 30 पीपीएम है। एस एस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन ने चावल की 10 स्थानीय किस्मों की पहचान की है जिनमें भरपूर मात्रा में आयरन है। आयरन रक्त की कमी की समस्या को दूर करता है। अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ के अध्यक्ष विजय सेतिया का कहना है कि सरकार को चावल का निर्यात और बढ़ाने के लिए किसानों और आढ़तियों को धान की वैज्ञानिक खेती को लेकर प्रशिक्षित किया जाना चाहिये। कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केन्द्रों तथा कई अन्य संस्थाओं की ओर से किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाये जाते हैं। श्री सेतिया ने कहा कि धान की खेती में कीटनाशकों का कम से कम इस्तेमाल होना चाहिये, क्योंकि विदेश में ऐसे चावल की मांग है, जिसमें कीटनाशकों का कम से कम उपयोग किया गया हो। उन्होंने कहा कि सरकार को कृषि मंडियों में ही फसलों के प्रमाणित बीज, उर्वरक, कीटनाशाक आदि उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देना चाहिये।

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