घर में हरियाली हो तो मन हरा-भरा हो उठता है..बागवानी के उपकरणों की जानकारी बेहद जरूरी 

घर में हरियाली हो तो मन हरा-भरा हो उठता है..बागवानी के उपकरणों की जानकारी बेहद जरूरी 

bagwani-ojar घर में हरियाली हो तो मन हरा-भरा हो उठता है। वैसे भी पेड़-पौधों के बगैर घर में सजीवता नहीं आती। अब घर में हरियाली लाने के लिए आपको घर के आगे-पीछे खाली पड़ी जमीन इस्तेमाल में लानी हो तो क्या करें? या बालकनी और सीढिय़ों में गमलों में पौधे लगाने हों जिससे घर हरा-भरा दिखे। इसके लिए कुछ उपकरणों की जरूरत पड़ती है जिनसे शायद आप अनभिज्ञ हों। सो बागवानी करने से पहले बागवानी के उपकरणों की जानकारी होना बेहद जरूरी है।
खुरपी:- बागवानी में सबसे ज्यादा प्रयोग होने वाला उपकरण खुरपी है। इससे क्यारियों की जमीन तैयार की जाती है। निराई-गुड़ाई के लिए यह बेहतरीन साधन है। खरपतवार निकालने का काम भी खुरपी के द्वारा ही किया जाता है। खुरपी का प्रयोग करते समय ध्यान रखें कि इससे बीजों या पौधों को किसी प्रकार का नुक्सान न पहुंचे।
फावड़ा:- क्यारियों की खुदाई करने के लिए फावड़े का प्रयोग किया जाता है। खाद व मिट्टी आदि एकसार बनाने के लिए फावड़े का प्रयोग किया जाता है। इस औजार की जरूरत जमीन पर पौधे लगाने की पड़ती है गमलों में नहीं।
कुदाली:- सख्त और पथरीली जमीन को खोदने के लिए कुदाली का प्रयोग किया जाता है। जमीन में दबे हुए कंकड़-पत्थर आदि को खोदने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। जिन पौधों की जड़ें लम्बी होती हैं यह उन्हें जड़ सहित खोदने के लिए प्रयोग किया जाता है। इसके हैंडिल में एक नोकदार फलक होता है।
हसिया:- हसिया का फलक अद्र्ध चंद्राकार होता है और यह घास एवं साग को काटने के काम आती है ।
चाकू:- चाकू का फलक मजबूत धातु का बना होता है। यह ग्राफ्टिंग के काम आता है। कलम वाले पौधे लगाते समय भी इसकी जरूरत पड़ती है।
कैंची:- बाड़ को आकार देने के लिए कैंची की जरूरत पड़ती है। इससे किनारों की घास की कटाई भी करते हैं। सूखी टहनियों और पत्तों को पौधों से अलग करने के काम आती है कैंची।
ट्रावेल करनी:- इसका प्रयोग छोटी पौधे को एक स्थान से उखाड़ कर दूसरे स्थान पर लगाने के लिए किया जाता है। इसकी सहायता से पौधे के चारों ओर मिट्टी को दबाया जाता है।
खटपावड़ा:- इसे गार्डन रेक भी कह सकते हैं। इसमें आगे की ओर कांटे होते हैं। यह क्यारियों की नालियां बनाने तथा बीजों को मिट्टी में मिलाकर बोने के काम आता है। क्यारियों की मिट्टी को एकसार करने के काम भी आता है। खरपतवार और मिट्टी से निकले कंकड़-पत्थर  के लिए इसका प्रयोग करते हैं।
फव्वारा:- इसे हजारा भी कहते हैं। यह नए बीज एवं छोटे बड़े सभी प्रकार के पौधों की सिंचाई के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। फव्वारा पौधों की जड़ों को एकसमान सींचता है। इससे पौधों की जड़ों को कोई नुक्सान भी नहीं पहुंचता। इससे पौधों की पत्तियां एवं सब्जियां आदि साफ एवं चमकदार बनती हैं। इसके अलावा यह भी ध्यान रखें कि निराई-गुड़ाई एवं ग्राफ्टिंग आदि के नुकीली धार वाले औजारों पर धार दे कर रखें ताकि प्रयोग करते समय कोई परेशानी न हो। प्रयोग में आने वाले औजारों को सीलन वाली जगह पर न रखें वरना उनमें जंग लगने का डर बना रहता है। औजारों को भी देखभाल की जरूरत होती है। तभी उनका सही उपयोग किया जा सकता है।
– शिखा चौधरी

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