घर को रखें सुरक्षित

घर को रखें सुरक्षित

घर सुकून, चैन, आराम, तसल्ली आदि पाने का दूसरा नाम है। घर से बाहर व्यक्ति को न चैन मिलता है न आराम। बस वह किसी भी तरह घर पहुंचकर आराम करना चाहता है। अपने घर एवं परिवार के सदस्यों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आपकी है। उन्हें बाहरी संकटों से बचाना और बचाए रखना आपकी जिम्मेदारी है। इस बात का खास ख्याल रखें।
दिन-प्रतिदिन सामाजिक अपराध बढ़ रहे हैं। घरों में चोरी-डकैती की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। इन बढ़ती आपराधिक घटनाओं को देखते हुए घर की सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना बेहद जरूरी है। कोई भोला-भाला दिखाई देने वाला अजनबी कब खूंखार साबित हो जाये, कहा नहीं जा सकता। इसलिए अपने घर एवं परिवार के प्रति सावधानी बरतने में कोई बुराई नहीं है।
घर की सुरक्षा सर्वप्रथम आपके हाथ में है। इसके लिए सबसे पहले तो घर का मुख्य दरवाजा बेहद मजबूत होना चाहिए। उसमें वाइड आई लेंस लगवाएं जिससे पहले दरवाजे में से झांककर देखा जा सके कि बाहर कौन है। जरा भी शक हो तो दरवाजा न खोलें और दरवाजे के अंदर से ही बात करें। यदि जाली का दरवाजा है तो और भी अच्छी बात है। जाली के दरवाजे के अंदर से ही बात करें।
डबल डोर व्यवस्था भी अच्छी रहती है। यह सुरक्षित भी है। कूरियर से लिफाफे या पत्रिकाएं आदि लेने के लिए दरवाजे में छोटी सी खिड़की लगवा दें। यह भी सुरक्षित रहने का एक तरीका है। घर से बाहर जाते समय यह अवश्य देख लें कि ताला ठीक से लगा है या नहीं। ताला मजबूत होना चाहिए। उसे ढंग से लगाकर, बंद करके ही कहीं निकलें। इतना भी ध्यान रखें कि ताला तो मजबूत है मगर चोर दरवाजा तोड़कर ही अंदर घुस गये, इसलिए पहले दरवाजा जरूर मजबूत हो। फिर ताला मजबूत लगायें।
ताला लगाकर घर से निकलें तो या तो चाबी अपने साथ ले जाएं या फिर खास पड़ोसी को दें। महिलाओं की आदत होती है कि वे घर की चाबी घर के बाहर किसी गमले के नीचे या गमले में ही या डोरमैट के नीचे छिपाकर रख जाती हैं। ऐसा करने से बचें। आजकल के चोर बेहद चालाक हो गये हैं। वे पहले घर की चाबी इन्हीं जगहों पर ढूंढते हैं, तभी ताले तोड़ते हैं। पुराने ताले बदल दें। मुख्य दरवाजे पर नया मजबूत ताला ही लगायें।
घर में कभी भी कीमती सामान न रखें। ज्यादा रूपया, ज्वैलरी व अन्य कीमती सामान बैंक लॉकरों में ही रखें। घर में सिर्फ जरूरत का सामान ही रखें। जब भी लॉकर से सामान निकालने जायें तो किसी को भी न बतायें। याद रखें, आपकी सुरक्षा आपके हाथ में है। रूपये-पैसे अथवा जेवर घर में होने की बात किसी पड़ोसी से भी न कहें।
घर से बाहर जाते समय फोन की घंटी भी धीमी कर दें या रिसीवर उठाकर एक तरफ रख दे। घर में लगातार बजती फोन की घंटियों से चोर सतर्क हो जाते हैं कि इस समय घर में कोई नहीं है।
अपने घर की सुरक्षा में आप अपने पड़ोसी की मदद भी ले सकते हैं। एक-दूसरे की अनुपस्थिति में एक-दूसरे के घर का ध्यान रखें। पड़ोसी को अपना नंबर, अपने करीबी का नंबर जरूर देकर रखें जिससे मुसीबत में वह आपको सूचना देकर बुला सके। अपने पड़ोसी के साथ बनाकर रखेंगी तो वह आपका साथ अवश्य देंगे। वैसे भी रिश्तेदारों से पहले पड़ोसी ही पास में होते हैं और वे ही काम आते हैं।
कामकाजी महिलाओं को अपने घर की सुरक्षा के विषय में अधिक सोचना पड़ता है। जब पति-पत्नी दोनों ही नौकरी करते हों तो ऐसे में घर की सुरक्षा का प्रश्न तो उठता ही है। इसके लिए खिड़की, दरवाजों में ग्रिल व जाली लगवाएं। बच्चों को समझा दें कि यदि कोई अजनबी व्यक्ति घर में आए तो दरवाजा न खोलें। यदि कोई परिचित आपकी अनुपस्थिति में आये तो आपको फोन करके तुरंत सूचित कर दें। अपने बच्चों को पूरी तरह से ट्रेंड कर दें। घर की डायरी में इरमजेंसी नंबर सबसे ऊपर लिखें।
यदि लौटते समय आपको बाहर से ताला टूटा या खिड़की, दरवाजा टूटा दिखाई दे तो फौरन घर के अंदर न घुसें बल्कि पहले पुलिस को सूचना दें। क्या मालूम चोर अभी घर में घुसे ही बैठे हों? इसलिए अपनी सुरक्षा के विषय में सोचें।
– शिखा चौधरी

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