घर की सुंदरता में चार चांद लगाते हैं कृत्रिम पौधे

घर की सुंदरता में चार चांद लगाते हैं कृत्रिम पौधे

artificial-plants-बदलते वक्त के साथ-साथ हमारी आवश्यकता की बहुत सी वस्तुएं निरंतर बदलती चली जा रही हैं। हमारा रहने का ढंग, खाने-पीने का स्टाइल, बात-चीत का तरीका, वस्त्रों में परिवर्तन आदि ऐसी बहुत-सी चीजें हैं जिन्हें हम निरंतर बदलने की कोशिश करते रहते हैं मगर कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिन्हें चाहकर भी नहीं बदल सकते। इन्हीं में से एक है मनुष्य का प्रकृति-प्रेम।
जैसे-जैसे शहरों का आकार सुरसा के मुंह के समान फैलता जा रहा है, वैसे-वैसे हरियाली भीगी बिल्ली सी स्वयं में ही सिमटती जा रही है। शहरों में व्यस्तता इतनी अधिक होती है कि कभी-कभी तो खाने तक की भी फुर्सत मनुष्यों के पास नहीं होती। ऐसी परिस्थितियों में पौधों की सेवा कौन करे? ऐसे में दिनोंदिन हरियाली से विमुख होते जाना तथा उसे देखने की लालसा बढ़ते जाना स्वाभाविक है। इसी विकट समस्या के समाधान के फलस्वरूप कृत्रिम पौधों का निर्माण किया गया।
कृत्रिम पौधों को ‘सिल्क प्लांट’ के नाम से भी जाना जाता है। इनके निर्माण के लिए सिंथेटिक मेटीरियल का इस्तेमाल किया जाता है। निर्माण कार्य इतना कलात्मक ढंग से होता है कि पौधे के प्राकृतिक और कृत्रिम रूप का भेद करना सरल नहीं होता। कृत्रिम पौधों की बाह्य आकृति से लेकर रंग-रोगन तक सब कुछ बड़ा ही स्वाभाविक होता है। फर्क मात्रा इतना ही होता है कि ये निर्जीव होते हैं और आपकी उपेक्षा पाकर भी कुम्हलाने के बजाय मुस्कुराते ही रहते हैं।
प्राकृतिक पौधों की जितनी भी किस्में आमतौर पर पसंद की जाती हैं उनमें से कम से कम आधी की अनुकृति कृत्रिम पौधों के रूप में तो बनायी ही जा चुकी है। इनकी लंबाई छ: इंच से लेकर दस फीट तक हो सकती है तथा कीमत सौ रूपये से लेकर दस हजार रूपये तक हो सकती है। साधारणत: कीमत का निर्धारण आकार के आधार पर ही किया जाता है यानी जैसा पौधा वैसी कीमत।
आप छींटदार पत्ते वाले ‘कलोडियम्स’ से भी अपने कमरे का कोना सजा सकते हैं या फिर दो हजार से पांच हजार तक खर्च करके बांस का पूरा झुरमुट ही उठा लाइये। द्वार सज्जा सफेद फूलों के गुच्छों से आच्छादित बेल (फ्लावरिंग क्र ीपर) से की जा सकती है। दूसरी ओर बोगेनवेलिया जैसे हैंगिंग प्लांट खंभों की खूबसूरती में चार-चांद लगा सकते हैं। अगर एक कमरे की शोभा ‘बर्ड ऑफ पैराडाइज’ बढ़ा रहा हो और दूसरे कमरे की ‘डस्टर लिलिज’, तो फिर बगीचों में झांकने की किसे जरूरत होगी?
अगर आप लत्तरनुमा बेल से अपने घर की दीवारें सुसज्जित करना चाहते हों तो बिगोनिया, बिनास्टा, पासी-फ्लोरा, मनीप्लांट, बुश आदि अनेकानेक किस्मों में से आप अपने पसंदीदा किस्म के पौधे को चयनित कर अपने घर की दीवारों को आकर्षक बना सकते हैं।
आपके पसंदीदा पौधे देशी हों या विदेशी, कृत्रिम पौधों के संसार में हर देश की सीमाएं आ जाती हैं। किसी भी देश के पौधों को कृत्रिम पौधों के जरिए चंद सिक्कों के बल पर अपना गुलाम बनाकर घर में कैद कर सकते हैं क्योंकि अब यह असंभव नहीं रहा। ग्लैडिओलस और फाइकस की विभिन्न किस्में चार सौ से दो हजार तक में उपलब्ध हो जाती हैं। डेफेन-बाकिया की कीमत सैंकड़ों में और फिलोन-डेंड्रोन की कीमत हजारों में आंकी गयी है। कमल और गुलाब के फूल जो भारतीय परिवेश की पहचान हैं, आसानी से मिल जाते हैं, वहीं सूर्यमुखी सहज ही प्राप्त हो जाते हैं।
बात क्रि समस ट्री की हो या पाम ट्री की, स्पाइडर प्लांट की हो या फिर रबर प्लांट की, अब कुछ भी हमारी मेहनत का मोहताज नहीं रहा मगर इन सबों में सबसे लोकप्रिय और कीमती है बोन्साई का कृत्रिम रूप। बोन्साई बनाने की लंबी और श्रमसाध्य प्रक्रि या से बचने की प्रवृत्ति ही लोगों को कृत्रिम बोन्साई खरीदने को विवश कर देती है।
ट्यूलिप, लूपीन, फ्लाक्स, ग्लैडिओलस आदि रंग-बिरंगे, लाल, पीले, गुलाबी, बैंगनी फूलों की खूबसूरती इतनी आकर्षक है कि तंगदिल भी रीझ कर रह जाए। फूल-पत्ते की बात तो एक तरफ, सृजनात्मक (सृजनशील) मस्तिष्क ने तो अब कैक्ट्स, सब्जी और फलों से आच्छादित पौधे, यहां तक कि घास की भी हू-ब-हू अनुकृति तैयार कर ली है यानी कि हरियाली को जिस रूप में भी कैद करना चाहें, कर सकते हैं और उस पर खासियत यह कि पौधे न तो खाद और पानी की मांग करेंगे और न ही धूप एवं हवा की। ध्यान तो केवल इस बात का रखना है कि जब इन पौधों पर धूल गर्दा जमे तो उसे साफ पानी से धो डालें तथा साफ कपड़े से उसे पोंछ लें। ध्यान रहे कि उसे धूप में सूखने के लिए ज्यादा देर तक न छोड़ें। उसका रंग खराब हो जाएगा। कृत्रिम पौधे की सफाई संभव हो तो प्रतिदिन करें। अगर यह संभव न हो तो सप्ताह में एक दिन इसकी सफाई अवश्य करें। फिर देखें कि सौंदर्य पहले की भांति निखर जायेगा। कृत्रिम पौधे से घर सजाने के और भी कई फायदे हैं। एक तो इसमें कीड़े नहीं लगते और दूसरा रात में घर से बाहर निकालने की जरूरत नहीं होती क्योंकि ये सजीव पौधों की भांति रात में कार्बन डाईऑक्साइड नहीं छोड़ते, अत: आप इनके सान्निध्य में भी खर्राटे मार कर चैन की नींद सो सकते हैं।
फैशन की चकाचौंध दुनियां में कृत्रिम पौधे भी फैशन को बढ़ाने में अहम् भूमिका निभाते हैं। ये घर की सुन्दरता में चार-चांद तो लगाते ही हैं, इसके साथ ही ये आपके व्यक्तित्व को बढ़ाने में भी अपना सक्रि य योगदान प्रदान करते हैं, तो फिर देर किस बात की? जाइए और बाजार से अपने मनपसंद कृत्रिम पौधों को घर ले आइए। आंखों को ठंडक पहुंचाने वाले, सदाबहार हरियाली और कभी न मुरझाने वाले मनभावन फूल आपके घर की शोभा बढ़ाने के लिए बेताब हो रहे हैं।
आनंद कुमार अनंत

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