घर आए अतिथि को उचित सम्मान दें

घर आए अतिथि को उचित सम्मान दें

अतिथि सत्कार का भारतीय संस्कृति में विशेष स्थान है। हमारी संस्कृति में तो अतिथि को भगवान का रूप माना जाता है। यदि अतिथि का उचित मान सम्मान किया जाये और अतिथि को आपने जाते समय उपहार स्वरूप कुछ नहीं भी दिया तो उस बारे में उसका ध्यान नहीं जाएगा। आपके साथ उसने कैसा समय बिताया, इस की याद उसे सदा रहेगी। वैसे तो अतिथि सत्कार करना बड़े छोटों, सभी सदस्यों का फर्ज होता है परन्तु शादीशुदा लोगों से इसकी उम्मीद ज्यादा की जाती है। शादी के बाद यदि आप कुछ परिस्थितियोंवश परिवार से अलग रह रहे हैं तो उसकी सारी जिम्मेदारी आप पर पड़ती है। आइए देखें इस जिम्मेदारी को हंसते खेलते कैसे निभाया जाए?
– घर आए मेहमानों का स्वागत हंस कर करें। उन्हें ऐसा महसूस न हो कि उनका आना आप को अच्छा नहीं लग रहा है।
– यदि अतिथि कुछ दिन रूकने के लिए आए हैं तो कोशिश कीजिए कि एक से अधिक कमरे होने पर उन्हें एक कमरा अलग से दे दें।
– खाने की मेज पर कोशिश करें कि आप भी उनका साथ दें। यदि काम का सारा बोझ आप पर है तो अपने परिवार के साथ उन्हें भोजन पर बिठाएं।
– जो भोजन अपने तैयार किया है, वही मेहमानों और अपने परिवार वाले सदस्यों को परोसें।
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– अतिथियों के आगे कभी पैसों का रोना न रोयें।
– अतिथि यदि आपके लिये या परिवार के किसी सदस्य के लिए कोई उपहार लाए हों तो उन्हें प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार करें। कोई नुक्ताचीनी न करें।
– अतिथियों से बातें करते समय किसी प्रकार की तानाकशी न करें। बोलते समय संयम बरतें। अधिक बोलते हुए अन्जाने में कुछ गलत न निकल जाए, इस बात पर विशेष ध्यान दें।
– साधारण बर्ताव रखें। न तो यह लगे कि आप अत्यधिक प्रसन्न हैं, न यह लगे कि आप पर बोझ है।
– मायके और ससुराल से आए अतिथियों को बराबर सम्मान दें। दोनों पक्षों के मेहमानों की परवाह करें।
– यदि अतिथि खुशी से घर के कामों में हाथ बंटवाना चाहें तो उन्हें मदद करने दें।
– ससुराल से किसी कारण मधुर संबंध न भी हों तो वहां से आए अतिथि का अपमान न करें।
– किसी रिश्तेदार, मित्र की बुराई दूसरे से न करें।भ्रष्टाचार बनाम शिष्टाचार

– अतिथियों को बोझ न समझकर सामान्य वातावरण दें।
– बच्चों को भी मेहमानों से मिल जुलकर रहने के लिए प्रेरित करें।
– यदि आप आए हुए मेहमानों के साथ घूमने जा रहे हैं तो कुछ खाने पीने की व्यवस्था पहले से करके जायें।
– समय निकालकर शॉपिंग आदि में उनकी मदद करें।
– यदि आप कामकाजी हैं तो उन्हें अलग से एक चाबी दे दें जिससे वे अपनी सुविधानुसार आ जा सकें।
– विदा करते समय हंस कर अपनी हैसियत अनुसार उपहार दें। यदि आप देने की स्थिति में नहीं हैं तो उन्हें जतलायें नहीं। घर आने पर दिया उचित सम्मान भी उनके लिए काफी है।
– नीतू गुप्ता

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