ग्रीष्म ऋतु में सौंदर्य की देखभाल कैसे करें…?

ग्रीष्म ऋतु में सौंदर्य की देखभाल कैसे करें…?

ग्रीष्म ऋतु में सौंदर्य के प्रति सचेत रहना आवश्यक होता है। यूं तो हर ऋतु में ही स्वास्थ्य और सौंदर्य का संतुलन बनाये रखना पड़ता है परंतु ग्रीष्म ऋतु में बढ़ती सूर्य की तपन, गर्म गर्म हवाएं और मौसम का बदलाव सौंदर्य को बिगाड़ देते हैं, इसलिए सौंदर्य बरकरार रखने के लिए संयमित ढंग से रहना आवश्यक होता है।
सस्ते सौंदर्य प्रसाधनों से सावधान रहें:- ग्रीष्म ऋतु में सौंदर्य प्रसाधनों की अधिकता से परहेज रखना चाहिए। कुछ सौंदर्य प्रसाधन तो इतने घातक होते हैं कि गर्मी के कारण शरीर में इन्फेक्शन भी कर देते हैं। कुछ तड़कीली-भड़कीली सौंदर्य सामग्री जैसे लिपस्टिक, क्रीम तथा सस्ते सुगंधित तेल व पाउडर ऐसे होते हैं जिनसे शरीर में एलर्जी तक हो जाती है। कृत्रिम उबटन, सुरमा एवं काजल भी हानिकारक सिद्ध हो सकते हैं।
उबटन की प्रक्रिया भी लाभप्रद है:- ग्रीष्म ऋतु में उबटन करना स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होता है। उत्तम किस्म के लेप से उबटन करने से त्वचा में निखार तो आता ही है, इससे शरीर में ठंडक भी पहुंचती है और त्वचा के रोमछिद्र भी खुल जाते हैं।
उबटन लेप घर में ही सामग्री जुटाकर तैयार किया जा सकता है यथा
– दो चम्मच उड़द की दाल (भीगी हुई) में एक नींबू का रस तथा दो चम्मच खीरे के रस को मिलाकर पीस कर गाढ़ा लेप तैयार कर लें। त्वचा में निखार लाने के लिए यह उत्तम लेप है। सुबह शाम इस लेप को लगाना लाभदायक होता है।
– दो चम्मच बेसन में, दो चम्मच नारियल पानी, दो चम्मच चिरौंजी व खीरे का रस मिलाकर गाढ़ा लेप तैयार कर लें। यह लेप त्वचा में ताजगी लाता है।
– दो चम्मच दही, दो चम्मच नींबू रस, दो चम्मच बेसन में टमाटर का रस मिलाकर बढिय़ा लेप तैयार कर लें। शाम सुबह इस लेप को त्वचा पर लगाने से त्वचा निर्मल व आभायुक्त हो उठेगी।
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– दो चम्मच नींबू रस, एक चम्मच घिसा चंदन, दो चम्मच ग्लिसरीन, एक चम्मच गुलाब जल को मिलाकर रोज रात सोने से पूर्व लगा लेना चाहिए। इससे त्वचा आकर्षक एवं कांतिमय हो जायेगी।
– एक चम्मच ताजा दूध, एक चम्मच खीरे का रस, दो चम्मच पिसी हुई मुलतानी मिट्टी, आधा चम्मच ताजी मलाई मिलाकर लेप तैयार कर लें। सुबह शाम नियमित रूप से इस लेप को आहिस्ता आहिस्ता संपूर्ण शरीर पर मालिश के रूप में लगायें।
एक दो घंटे बाद इस लेप को ठंडे पानी से धो डालें। यह प्रक्रिया कुछ दिनों तक नियमित रूप से करने से त्वचा कोमल और स्निग्ध हो जायेगी।
उक्त लेपों में सामग्री की मात्र बढ़ाई जा सकती है परंतु अनुपात वही होना चाहिए। इससे लेपों का त्वचा पर विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा और शीघ्र ही त्वचा में निखार के लक्षण दिखाई देने लगेंगे।
कृत्रिम सौंदर्य सामग्री से परहेज रखें:- ग्रीष्म ऋतु में कृत्रिम सौंदर्य प्रसाधनों से परहेज रखना स्वास्थ्य और सौंदर्य दोनों के लिए उत्तम होता है। ग्रीष्म ऋतु में चेहरे पर क्रीम, पाउडर व लिपस्टिक लगाने से स्थिति और भी हास्यास्प्रद बन जाती है। गर्मी के प्रकोप से सौंदर्य अपने चेहरे को आकर्षक बनाने की बजाय और भी भड़कीला बना देती है।
अधिकतर क्रीमें ग्रीष्म ऋतु में गर्मी की तपन से फैलती हैं। इन क्रीमों के प्रयोग से चेहरे का हाल और बेहाल हो जाता है इसलिए ग्रीष्म ऋतु में सौंदर्य सामग्रियों का प्रयोग बड़ी ही सावधानीपूर्वक करना चाहिए। यदि आवश्यक हो सौंदर्य प्रसाधनों को प्रयोग करना तो वाटरप्रूफ प्रसाधन ही प्रयोग में लाएं। सादगीपूर्ण जीवन में आकर्षण होता है।
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ग्रीष्म ऋतु में स्नान करना भी लाभप्रद है:- ग्रीष्म ऋतु में ठंडे पानी से नहाने का आनन्द ही कुछ और होता है। ठंडे पानी से स्नान करने से प्रथम तो गर्मी का प्रकोप शरीर पर नहीं होने पाता, दूसरे इससे शरीर के आन्तरिक अवयव भी ठंडापन महसूस करते हैं। ठंडे पानी से स्नान करने से मस्तिष्क में ताजगी आती है तथा आंखों की गर्मी में भी राहत मिलती है।
फव्वारे से नहाने से त्वचा में चमत्कारिक ताजगी आती है। इससे त्वचा खिल उठती है और रोम छिद्र खुल जाते हैं। धूप से आने के पश्चात आंखों को ठंडे पानी से धोना आंखों में ताजगी लाता है।
खानपान संतुलित एवं संयमित रखें:- ग्रीष्म ऋतु में सौंदर्य में चार चांद लगाने में संतुलित आहार की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। ग्रीष्म ऋतु में आहार भूख से थोड़ा कम ही लेना चाहिए।
इससे पाचन क्रिया भी विधिवत होती है और शरीर के संपूर्ण अंग सक्रिय भी रहते हैं। दलिया, भीगे चने, सोयाबीन, खीरा, नींबू, खरबूजा और तरबूजा जैसे पौष्टिक आहार लेना लाभदायक होता है।
शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ ग्रीष्म ऋतु में रहा जाए तो शरीर की सुंदरता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ सकता और आप हमेशा की तरह पूर्ण रूपेण तरोताजा बने रहेंगे।
– अमरलाल साहू

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