ग्रीष्म ऋतु में खान पान

ग्रीष्म ऋतु में खान पान

ग्रीष्म ऋतु के दिनों में खाने-पीने के मामले में लापरवाही करना बीमारी को न्यौता देना होता है। इस ऋतु में खान-पान संबंधी निम्नलिखित बातों को ध्यान
में रखकर उचित आहार-विहार करके स्वास्थ्य और शरीर की रक्षा की जा सकती है।
– इस ऋतु में तेज मिर्च मसालेदार, खट्टे, उष्ण प्रकृति के पदार्थों का, मांसाहारी भोजन व अण्डों का तथा शराब का सेवन करने से अम्लता (एसिडिटी,) अम्ल पित्त, अल्सर, उच्च रक्तचाप, पेशाब में रूकावट और जलन आदि अनेक व्याधियां उत्पन्न होती हैं। अत: इन सबके सेवन का त्याग करना चाहिए।
– बाजार में शीतल पेयों का प्रयोग न करके घर पर ही शीतल पेय तैयार कर प्रयोग करें, जैसे-नींबू की शिकंजी, ठण्डाई, मौसमी या संतरे का रस, अंगूर का रस, गन्ने का रस आदि। बाजार में मिलने वाले पेयों की गुणवत्ता का कोई भरोसा नहीं। उनमें मिलावट हो सकती है और हानिकारक तत्व भी सकते हैं।
ग्रीष्म ऋतु में सौंदर्य की देखभाल कैसे करें…?

– दिन भर में 8-10 गिलास पानी 1-1 घंटे के अंतर से बिना प्यास के भी पीने चाहिए। इससे शरीर में उष्णता और जलन नहीं होती, पेट, आंतें व मूत्रशय शुद्ध होता रहता है, मुंह नहीं सूखता, पेशाब में रूकावट और जलन नहीं होती, होंठ नहीं फटते और भूख खुलकर लगती है।
– इन दिनों में अनाज का अंकुरण शीघ्र होता है अत: चना, गेहूं, मूंग, मोठ आदि को अंकुरित करके प्रात: नाश्ते में सेवन करना चाहिए। अंकुरित अन्न में हरा धनिया, पिसी काली मिर्च व सेंधा नमक बुरक लें एवं नींबू निचोड़ कर सेवन करें। अंकुरित अन्न अत्यंत पौष्टिक और सुपाच्य होता है।
पानी पिएं और रखें ब्लड प्रेशर पर कंट्रोल…!

– घर से जब भी बाहर जाएं, तब एक गिलास ठण्डा पानी पीकर ही निकलें। इससे प्यास का वेग नहीं बढ़ता और लू से बचाव होता है। जेब में प्याज रखने से भी लू से बचाव होता है।
– इस ऋतु में आम का पना, धनिया व पुदीने की चटनी तथा दही में जीरा व काला नमक डाल कर खाना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। दूध चावल की खीर अवश्य खानी चाहिए।
– उमेश कुमार साहू

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