गौरैया दिवस आज… गौरैया संरक्षण के प्रति लोगों को किया जायेगा जागरूक

गौरैया दिवस आज… गौरैया संरक्षण के प्रति लोगों को किया जायेगा जागरूक

लखनऊ। घर-घर में फुदक-फुदक कर चहकने वाली गौरैया संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिये आज विश्व गौरैया दिवस के रूप में मनाया जायेगा। विश्व गौरैया दिवस पहली बार वर्ष 2010 में मनाया गया था। यह दिवस प्रत्येक वर्ष 20 मार्च को पूरी दुनिया में गौरैया पक्षी के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मनाया जाता है।
शहरीकरण तथा लोगों की जीवनशैली में बदलाव के कारण घर-घर में, गॉंवों तथा छतों पर चहकने वाली गौरैया की संख्या में कुछ सालों में काफी कमी आई है। पहले घरों में रोशनदान, अटारी, टीन की छतें आदि बनाई जाती थी जिनमें गौरैया अपना घोसला बनाती थी। लखनऊ स्थित नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान के निदेशक अनुपम गुप्ता ने यहां बताया कि गौरैया अपने अस्तित्व के लिए मनुष्यों और अपने आस पास के वातावरण से काफी जद्दोजहद कर रही है। ऐसे समय में इन पक्षियों के लिए वातावरण को इनके प्रति अनुकूल बनाने में सहायता प्रदान करनी चाहिए। तभी ये हमारे बीच चहचहायेंगी।
प्राणि उद्यान के निदेशक ने बताया कि गौरैया की घटती संख्या के लिये भोजन, जल की कमी, घोसलों के लिए उचित स्थानों की कमी तथा तेजी से कटते पेड़-पौधों को माना जा रहा है।
गौरैया के बच्चों का भोजन शुरूआती दस-पन्द्रह दिनों में सिर्फ कीड़े-मकोड़े ही होते हैं। खेतों, गमलों के पेड़-पौधों में भी रासायनिक पदार्थों का उपयोग करते हैं जिससे न तो पौधों को कीड़े लगते हैं और न ही इस पक्षी का समुचित भोजन पनप पाता है। गौरैया समेत दुनिया भर के हजारों पक्षी विलुप्त हो चुके हैं या फिर किसी कोने में अपनी अन्तिम सांसें गिन रहे हैं।
श्री गुप्ता ने बताया कि जीवनशैली में बदलाव के कारण यह प्रजाति विलुप्त होती जा रही है। शहरों के बाहर खुले स्थान, बाग-बगीचों का कम होना एवं बढ़ती आबादी, शहरीकरण तथा वाहन प्रदूषण के कारण गौरैया की संख्या में कमी होती जा रही है। गौरैया के महत्व को देखते हुए दिल्ली सरकार ने इसे राजकीय पक्षी भी घोषित किया है।
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उन्होंने बताया कि आगामी 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस के रूप में मनाया जायेगा। गौरैया का संरक्षण मनुष्य के हित से भी जुड़ी हुई है। गौरैया हमारे घरों के आस-पास कीट-पतंगों को खाकर उनकी संख्या सीमित करती है तथा पर्यावरण को शुद्ध करती है।
श्री गुप्ता ने बताया कि गौरैया कीट-पतंगों से होने वाली बीमारियों से भी बचाव करती हैं। साथ ही फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीट-पतंगों को खाकर उनकी संख्या सीमित करने के साथ फसलों की उत्पादकता को बढ़ाती हैं।
उन्होंने लोगों को गर्मी के दिनों में अपने घरों की छतों पर एक पानी का पात्र रखने का सुझाव दिया ताकि प्यासे पक्षी अपनी प्यास बुझा सकें। गौरैया के खाने के लिए छतों पर अनाज, पार्कों में एवं आस-पास के खाली स्थानों पर रखें। श्री गुप्ता ने बताया कि गौरैया के लिए कुछ न कुछ तो करना ही होगा वरना यह भी मॉरीशस के डोडो पक्षी और गिद्ध की तरह पूरी तरह से विलुप्त हो जायेंगे। सबको मिलकर गौरैया का संरक्षण करना चाहिए।

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