गुस्सा भी आता है प्रधानमंत्री को 

 गुस्सा भी आता है प्रधानमंत्री को 

पानी जब सिर से ऊपर चला जाए तो गुस्सा आना लाजमी हो जाता है। इस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह रहे हैं कि उन्हें गुस्सा आया है। बकौल प्रधानमंत्री मोदी उनके गुस्से की वजह वो कथित गौ रक्षक हैं जिनका आतंक पूरे देश में फैला हुआ है और अब इनके खिलाफ दूसरे वर्ग के लोग भी लामबंद होते दिखाई दे रहे हैं। दरअसल दादरी में बीफ मामले में एक बुजुर्ग की हत्या और उसके बाद देश के विभिन्न हिस्सों से लगातार गौ रक्षकों का कानून हाथ में लेने की घटनाओं का सामने आना बताता है कि यह सेवकों या रक्षकों का काम नहीं है बल्कि इसके पीछे आपराधिक प्रवत्ति के लोग सक्रिय हैं, जो रात के अंधेरे में किए गए अपने अपराध को छुपाने के लिए दिन के उजाले में गौ रक्षकों का चोला पहनकर उत्पात मचाते फिरते हैं। इस प्रकार यदि प्रधानमंत्री मोदी की मानें तो इस समय देश में करीब 70 फीसद गौ रक्षक ऐसे ही अपराधी किस्म के लोग हैं, जिनसे सेवा या सुरक्षा की उम्मीद रखना बेमानी है। अगर यह सही नहीं है तो फिर क्या कारण है कि गुजरात के ऊना में गाय के नाम पर दलितों की बेरहमी से पिटाई की जाती है।मध्य प्रदेश में महिलाओं को पीटा जाता है, हरियाणा में गौमूत्र और गोबर खिलाया जाता है। दूसरी तरफ सुविधाओं के अभाव में भूखी-प्यासी, कीचड़ में फंसी एक-दो नहीं बल्कि पांच सौ से अधिक गायों की असमय मौत हो जाती है, वो भी भाजपा शासित राज्य राजस्थान में, जहां की मुख्यमंत्री बकायदा समारोह कर लोगों को गौ रक्षा की शपथ दिलाती दिखती हैं, उनके राज्य की एक गौशाला में गायें दम क्यों तोड़ती दिखती हैं। इस तरह पिछले एक साल से लगातार गाय की सियासत पर खामोश रहने वाले प्रधानमंत्री मोदी को मुखर होना पड़ता है और वो भी बोलते हैं तो कहां जहां से एक नया इतिहास लिखा जाना है। अर्थात् पहली बार देश के प्रधानमंत्री मोदी ने टाउनहॉल मीटिंग में लोगों के सवालों का जवाब देते हुए अपने मन की बात की तो गुस्सा भी सामने आ ही गया। खामोशी को तोड़ते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘कथित गौ रक्षकों की हरकतों से मुझे बहुत गुस्सा आता है। ये रात में अपराधी होते हैं और दिन में गौ रक्षक बन जाते हैं।’चूंकि यह बात प्रधानमंत्री की ओर से आई है इसलिए मुद्दे पर गंभीरता पूर्वक विचार कर व्यवस्था को सुधारने की दिशा में कार्य किया जाना चाहिए था, लेकिन हुआ इसके विपरीत क्योंकि विपक्ष तो दूर की बात है स्वयं भाजपा के सहयोगी संगठनों ने प्रधानमंत्री मोदी के बयान का विरोध कर दिया है। हद यह है कि अखिल भारतीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय महासचिव मुन्ना कुमार शर्मा ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर गौ रक्षा में कुछ घटनाएं हो जाती हैं तो मारपीट करने वालों को जेल भी भेजा जाता है, लेकिन 70-80 फीसदी लोगों को अपराधी कहना गलत है। यहां उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को याद दिलाते हुए कहा कि ‘2014′ के चुनाव में मोदी ने गौ हत्या पर रोक लगाने का वादा किया था, लेकिन गौ हत्या बढ़ गई है। अगर एक भी गौ रक्षक गिरफ्तार हुआ तो हम इसका कड़ा विरोध करेंगे।’यही नहीं उन्होंने आरोप लगाया कि ‘मोदी संसद में ध्यान भटकाने के लिए ऐसे बयान दे रहे हैं।’ बात साफ है कि जब तक मन-मुताबिक खेलने का अवसर मिलता है तो किसी को कोई दिक्कत नहीं हुई लेकिन जैसे ही नियम और कानून की बात हुई तो बदजुबानी शुरू हो गई। इससे हटकर विपक्ष कहता है कि प्रधानमंत्री मोदी को गुस्सा तो इस बात पर आना चाहिए कि उन्होंने आम चुनाव के दौरान देश की जनता से वादा किया था कि अच्छे दिन लाएंगे लेकिन क्या हुआ। इसी तरह उन्होंने कहा था कि सौ दिन में कालाधन विदेशों से लाकर आम नागरिकों के खाते में जमा करा देंगे, लेकिन इस पर भी क्या हुआ।आखिर इन पर मोदीजी को गुस्सा क्यों नहीं आता! यह कहना है कांग्रेस के नेता और पूर्व मंत्री मनीष तिवारी का। उनकी नजर में गोरक्षा के नाम पर होने वाले अपराधों की तो महज आड़ ले रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी, असल में उन्हें अपनी असफलताओं के कारण गुस्सा आ रहा है। अंततः अमेरिका के टाउनहाल की तर्ज पर शुरू किए गए इस कार्यक्रम का आगाज ठीक नहीं रहा क्योंकि इसमें ऐसे तथ्य सामने आए हैं जिसे लेकर अपने भी खफा नजर आ रहे हैं, इससे हालात और बिगड़ सकते हैं और चूंकि उत्तर प्रदेश और पंजाब में विधानसभा चुनाव का समय भी करीब आ रहा है ऐसे में पार्टी को हार का मुंह भी देखना पड़ सकता है। वैसे भी बातें तो बहुत हो चुकी हैं अब तो देश की जनता उन कामों को होते हुए देखना चाहती है जिनसे उन्हें महंगाई से छुटकारा मिल सके और रोजगार के अवसर मिल सवेंâ और सबसे बड़ी उम्मीद यह कि काला धन वापस आए ताकि हर नागरिक के खाते में15-15 लाख रुपए जमा कराए जा सवेंâ।

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