गुणकारी है चुम्बक चिकित्सा

गुणकारी है चुम्बक चिकित्सा

चुम्बक चिकित्सा का उल्लेख अथर्व वेद में भी किया गया है। इस चिकित्सा प्रणाली की शिक्षा का ज्ञान नालंदा विश्वविद्यालय और तक्षशिला विश्वविद्यालय में दिया जाता था। यह एक प्राकृतिक और गुणकारी चिकित्सा है।
जापान, जर्मनी, चीन आदि देशों के लोग भारत से शिक्षा प्राप्त करके अपने-अपने देशों में चुम्बक चिकित्सा करते थे परन्तु जब मोहम्मद गजनवी ने भारत पर आक्रमण किए तो उसने इन दोनों विद्यालयों को नष्ट कर दिया। बाद में वही लोग जिन्होंने भारत में शिक्षा प्राप्त की थी, भारत में आकर चुम्बक चिकित्सा प्रणाली से चिकित्सा करने लगे।
शरीर के हर एक अंग को स्वस्थ लहू की जरूरत है। स्वस्थ लहू में लौह कण होते हैं। जिस समय शरीर के लौह कण कमजोर हो जाते हैं तो कई प्रकार के रोगों को जन्म मिलता है।
चुम्बक चिकित्सा खाली पेट करने से लाभ होता है। चुम्बक के प्रयोग के समय धरती बिजली से चलने वाली वस्तुओं घड़ी आदि से चुम्बक को दूर रखें ताकि चुम्बक की शक्ति बनी रहे। चुम्बक लकड़ी पर ही रखें ताकि चुम्बक की शक्ति बनी रहे। चुम्बक चिकित्सा में किसी भी प्रकार की दवा नहीं दी जाती और चुम्बक चिकित्सा में कभी भी उल्टा प्रभाव नहीं होता।
चुम्बक चिकित्सा रोगग्रस्त अंगों पर चुम्बक लगाकर की जाती है। चुम्बक चिकित्सा में चुम्बक जल का और चुम्बक तल का बड़ा योगदान है। चुम्बक जल तीन प्रकार का होता है। उत्तरी ध्रुव पर रखे जल के सेवन से लहू साफ होता है। यह संक्रमण को दूर करता है।
दक्षिणी ध्रुव पर रखा चुम्बक जल कब्ज को दूर करता है। पेट को साफ रखता है। पेट की गैस निकल जाती है। तीसरा उत्तरी और दक्षिणी चुम्बक जल मिलाकर सेवन से लौह तत्व मजबूत और चैतन्य होता है तथा यह शरीर को चुस्ती प्रदान करता है।
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इसी प्रकार चुम्बकीय तेल दो प्रकार का होता है। उत्तरी धु्रवतेल को शरीर के जोड़ों पर लगाने से यह जोड़ों के दर्द को ठीक करता है। दक्षिणी धु्रव चुम्बक तेल से सफेद बाल काले हो जाते हैं और स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है। बालों से रूसी को दूर करता है। पोलियो आदि रोगों के लिए मालिश से लाभ होता है। दोनों प्रकार के तेल तैयार करने में आठ दिन लगते हैं।
चुम्बक चिकित्सा में चुम्बक पट्टियों, चुम्बक चादर, चुम्बक माला-घुटने की चुम्बक पट्टियों आदि को रोगग्रस्त अंगों पर लगा कर रोग ठीक होते हैं। चुम्बकीय चादर के प्रयोग से जोड़ों के तीव्र दर्द, मोटापा, गठिया, अधरंग, पोलियो, रक्तचाप, रीढ़ की हड्डी की सूजन, हड्डियों का टूटना, गुच्छेदार नसें, थकावट आदि में लाभ होता है।
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दमा, पुराना जुकाम, गले के रोग, थाइराइड ग्रंथि, सिर दर्द, सरर्वाइकल, गर्दन की जकडऩ हृदय रोग, पुरानी खांसी, छाती की हड्डियों का दर्द, दिल की धड़कन की गति तेज हो जाना, यह चुम्बकीय माला से ठीक हो सकता है।
-संजय कुमार चतुर्वेदी

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