गाय को लेकर तीसरा विश्वयुद्ध

गाय को लेकर तीसरा विश्वयुद्ध

जो लोग यह समझते हैं कि तृतीय विश्वयुद्ध का कारण पेयजल संकट, तेल की उपलब्धता या फिर शक्तिसंपन्नता होगा। उन्हें बता देना उचित होगा कि तीसरा विश्वयुद्ध गाय को लेकर होगा। ऐसा कोई भविष्यवक्ता, राष्ट्राध्यक्ष या राजनीतिज्ञ नहीं कह रहा बल्कि मध्य प्रदेश गोपालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड के अध्यक्ष एवं महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरी ने कहा है। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान के विरोध में गोरक्षकों की नाराजगी को जायज ठहराया जिसमें उन्होंने 70  फीसद गोरक्षकों को अपराध जगत से जुड़ा हुआ बताया था। स्वामी गिरी का मानना है कि गाय का धर्मग्रंथों में भी जिक्र है और वह हमेशा तकरार का विषय रही है। फिर चाहे वह 1857 का स्वतंत्रता संग्राम ही क्यों न रहा हो। यहां तक तो ठीक है लेकिन सवाल यह है कि जब राजस्थान की एक गोशाला में ५ सौ से ज्यादा गायें दम तोड़ रहीं थीं तब ये गोरक्षक कहां थे, क्या वो उस समय किसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर अवैध वसूली करने में तो व्यस्त नहीं थे। यह जांच और शोध का विषय है, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने और राजस्थान की घटना ने गोरक्षकों का जो चेहरा देश के सामने लाया है वह बहुत ही विभत्स और डरावना है, जो विश्वयुद्ध तो नहीं हाँ मानवीयता के खिलाफ युद्ध करने जैसा जरूर है।

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