गर हार्मोनल असंतुलन हो तो

गर हार्मोनल असंतुलन हो तो

हार्मोनल असंतुलन जीवन के किसी भी पड़ाव में अक्सर सभी को इसका सामना करना पड़ता है। हार्मोनल असंतुलन अक्सर किशोरावस्था, अधेड़ावस्था में महिलाओं को और पुरूषों दोनों का इसका सामना करना पड़ता है। अगर इसका उचित ज्ञान न हो तो चिड़चिड़ापन इतना हो जाता है कि इंसान समझ भी नहीं पाता कि मेरे साथ यह सब क्या हो रहा है।
हार्मोनल असंतुलन क्या है:-
हार्मोनल असंतुलन हमारी दिनचर्या और स्वास्थ्य पर प्रभाव डालते हैं जिसके कारण हमारा मूड सही नहीं रहता। महिलाओं में अनियमित मासिक चक्र, गर्भावस्था, मेनोपॉज, थायराइड, गर्भनिरोधक उपाय, मधुमेह, तनाव, भोजन करने का मन न करना, असमय भोजन करना, सुस्ती, काम करने की इच्छा न करना ये सब हार्मोन्स में व्यवधान उत्पन्न करने, उन्हें असंतुलित करते हैं।
लक्षण:-
नींद न आना भी हार्मोनल असंतुलन का लक्षण है। प्रोजेस्टेरॉन हार्मोन की शरीर में कमी हमें तनावग्रस्त बना देती है जिससे समय पर नहीं आती और पूरी नींद भी नहीं पड़ती।
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– सेक्स करने की इच्छा में कमी आती है जो एस्ट्रोजन नामक हार्मोन की कमी के कारण ऐसा होता है। इस हार्मोनल कमी से छाती पर गांठें हो जाती हैं और वेजाइनल ड्राइनेस भी हार्मोन्स के स्तर में आई कमी से होती है।
– महिलाओं के मूड में बदलाव काफी तेजी से आता है कभी उत्साहित होती हैं तो कभी दुखी। यह सब भी हार्मोनल असंतुलन की ओर इशारा करता है।
– अक्सर थकान महसूस होना, सिर दर्द होना, वजन बढऩा या कम होना भी हार्मोनल असंतुलन का दर्शाता है।
– किशोरावस्था में आए मुंहासे भी इसका एक लक्षण है। अक्सर हार्मोन्स के असंतुलन से ऐसा होता है।
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क्या करना चाहिए:-
ऊपर दिए लक्षण बार बार उत्पन्न हो रहे हों तो अपने डाक्टर से तुरंत मिलें। उन्हीं के परामर्शनुसार चलें। हार्मोन्स की कमी हमारे शरीर में उत्पन्न किसी बीमारी का संकेत देते हैं, इसलिए बदलाव लंबे समय तक होने पर डाक्टर से परामर्श लें। वैसे भी 40 साल की उम्र के बाद हमें रेगुलर चेकअप करवाने चाहिएं ताकि किसी भी तरह की हार्मोंस में आई कमी समय रहते पता चल सके और उसका उचित इलाज हो सके। क्योंकि हमारी उचित जीवन शैली में हार्मोन्स का रोल अहम होता है।
– मेघा

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