गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य एवं सौंदर्य

गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य एवं सौंदर्य

pregnantहर स्त्री की यही इच्छा होती है कि वह दूसरों से सुंदर दिखे। इसके लिए वह हर संभव प्रयासरत रहती है तथा अपनी श्रंृगार कला का भी भरपूर प्रयोग करती है। विवाह से पूर्व लड़कियां श्रृंगार करती हैं दूसरों को रिझाने के लिए किंतु विवाह के बाद वही लड़की अपने पति को रिझाने के लिए भरपूर श्रंगार करती है।
जब वह गर्भावस्था में पहुंचती है तो शरीर में होने वाले परिवर्तनों से उत्पन्न मानसिक तनाव, होने वाले बच्चे की चिंता, जी मिचलाना, भूख न लगना, चक्कर आना की शिकायतों की वजह से अपने ऊपर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे पाती और हर समय बिस्तर पर पड़ी रहती है।
नतीजा यह होता है कि गर्भवती का मन हर समय बुझा-बुझा रहता है जो संतान पर बुरा असर डालता है। साथ ही मैला चेहरा, सूखे होंठ, धंसी-आंखें, उलझे बाल, फटी एडियां, ये सभी चेहरे की सुंदरता पर ग्रहण लगाने के लिए काफी होते हैं। स्वास्थ्य और सौंदर्य के प्रति उत्पन्न यह उदासी और नीरसता गर्भधारण की सामान्य प्रक्रि या को और पीड़ादायक बना देती है।
अगर आप गर्भावस्था से गुजर रही हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि इन दिनों आपके लिए स्वास्थ्य और सौंदर्य दोनों की रक्षा करना बेहद जरूरी है। इस संबंध में उचित मार्गदर्शन हेतु गर्भावस्था के दिनों की दिनचर्या में निम्नांकित बातों को शामिल अवश्य करें।
गर्भवती का आहार:-गर्भवती महिलाओं के लिए यह जानना जरूरी है कि गर्भावस्था के दौरान अनका उचित आहार क्या है? गर्भ में पल रहा उनका शिशु माता के आहार से ही अपना पोषण प्राप्त करता है, अत: गर्भवती महिलाओं को अपने आहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए। दूध, दही, पनीर, अंडा, दाल, पालक, गाजर, मूली, टमाटर, मटर, ककड़ी, खीरा, रोटी, घी, मक्खन आदि का नियमित एवं विशेष रूप से इस्तेमाल करना चाहिए।
भरपूर मात्र में दूध एवं पानी का नियमित सेवन पेट को साफ रखता है। डाक्टर या किसी बुजुर्ग की सलाह पर कोई विशेष खाद्य पदार्थ सीमित मात्र में ही सेवन करें । संतुलित भोजन लेते रहने से शारीरिक गठन एवं त्वचा का सौंदर्य बना रहता है।
त्वचा की देखभाल:-गर्भावस्था के दौरान आप सुबह खुली हवा में अवश्य टहलें। स्वच्छ एवं शीतल जल से स्नान करें। इससे मन हल्कापन महसूस करेगा। साथ ही आपकी त्वचा की भी सफाई होती रहेगी। स्नान से पहले शरीर की हल्की मालिश अवश्य करें। इससे शरीर का लचीलापन बना रहता है। स्नान के बाद शरीर पर किसी अच्छे बॉडी लोशन का प्रयोग करें।
फटी एडिय़ों की सफाई के लिए सप्ताह में एक बार पेडिक्योर व मेनीक्योर करें। चेहरे की सफाई पानी में नींबू का रस डालकर रोज करती रहें। दिन में दो बार उबटन, मास्क और फेसपैक भी इस्तेमाल कर सकती हैं। अगर कील मुंहासे उग आये हों तो मेडिकेटेड साबुन का प्रयोग करें। रात में सोते समय कोल्ड क्रीम या स्किन टॉनिक से चेहरे की मालिश करें। पेट की त्वचा को नाखून से न खुजलाएं। इससे आपके पेट पर खरोंच के निशान पड़ सकते हैं।
चेहरे का मेकअप:-चेहरे को क्लीजिंग मिल्क से साफ करके हल्का-सा मास्चराइजर लगायें। इच्छा हो तो चेहरे पर फांउडेशन की पतली परत लगाकर फिर कांपेक्ट पाउडर पफ की सहायता से लगाएं। आंखों में काजल की पतली लकीर खीचें। होंठों पर नेचुरल कलर की लिपस्टिक लगाएं। अगर पार्टी में जाना हो तो चेहरे पर मनचाहा मेकअप किया जा सकता है।
केश विन्यास:-बालों की सफाई एक महत्वपूर्ण पहलू माना जाता है। गंदे बाल आपस में उलझकर टूट जाते हैं। गंदे बालों में में जूं भी हो जाती हैं। आंवला, रीठा, शिकाकाई अथवा अपने मनपसंद ब्रांड के शैंपू से सप्ताह में दो बार बाल अवश्य धोएं। अगर बाल लंबे हों तो चोटी बना लें और बाल छोटे हों तो पोनीटेल बांध लें।
वस्त्र एवं आभूषण:-गर्भावस्था के दौरान ढीले-ढाले वस्त्रों को ही पहनें। सूती कपड़ों का ही प्रयोग करें। घर पर नाइटी का तथा बाहर जाने पर सलवार कुरते का प्रयोग करें। इस अवस्था में हल्के आभूषणों का ही प्रयोग करना चाहिए। ऊंची एड़ी वाली चप्पल का प्रयोग न करें। उपरोक्त तरीके से अपने सौंदर्य एवं स्वास्थ्य की देखभाल आप कर सकती हैं।
– पूनम दिनकर

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