गर्भस्थ शिशु के दांतों के विकास पर… मां के दंतरोगों का पड़ता है प्रभाव

गर्भस्थ शिशु के दांतों के विकास पर… मां के दंतरोगों का पड़ता है प्रभाव

1 गर्भस्थ शिशु का स्वास्थ्य मां के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। अगर मां स्वास्थ्य संबंधी नियमों का अनुसरण करते हुए अपनी दैनिक कार्यों को करती है तो निश्चित रूप से बच्चा स्वस्थ पैदा होगा। अनेकों महिलाएं गर्भावस्था में दांतों से संबंधित रोगों पर ध्यान नहीं देती जिसकेे कारण गर्भस्थ शिशु के दांतों का समुचित विकास नहीं हो पाता।
आज भारत में मसूड़ों की बीमारियां, टेढ़े मेढ़े दांत तथा मुख के कैंसर से काफी संख्या में लोग ग्रसित हैं। गर्भावस्था में दांतों की समस्याओं पर ध्यान नहीं देने से बच्चे के रोग संक्रमित होने के साथ दंतहीन होने की भी संभावना होती है।
बच्चे के दांतों का स्वस्थ और सुन्दर होना गर्भवती महिला द्वारा गर्भावस्था में लिए जाने वाले आहार तथा उसकी जीवन शैली पर निर्भर करता है। बच्चे के दांतों के स्वस्थ और सुन्दर होने की प्रक्रि या गर्भधारण करने के डेढ़ माह बाद शुरू हो जाती है, इसलिए गर्भवती महिला को बिना डाक्टरी सलाह के कोई भी औषधि नहीं ग्रहण करनी चाहिए। रोगग्रस्त होने पर उपचार के समय डाक्टर को गर्भवती होने की बात बतला देनी चाहिए ताकि उन्हें वैसी दवाएं न दी जाएं जिससे गर्भस्थ शिशु को नुकसान पहुंचे।
लेह में आईटीबीपी जवानों का चीनी सैनिकों से हुआ आमना-सामना

पाश्चात्य देशों में चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में हुए शोधों से ज्ञात हुआ है कि गर्भावस्था में स्त्री के मसूड़ों के रोग या पायरिया से
संक्र मित होने पर बच्चे के दांतों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। दांत निकलने से समय बच्चे को काफी कष्ट होता है। दांतों का आकार और स्वरूप बिगड़ जाता है। वंशानुगत बीमारियों के कारण भी बच्चे को दांत संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। जन्म से पहले बच्चे के दांतों संबंधी बीमारियों का इलाज संभव नहीं होता, इसलिए बच्चे के जन्म लेने के बाद रोगानुसार इलाज हो सकता है।
बच्चे के दांत व शरीर रोगमुक्त हों, इसके लिए गर्भवती द्वारा गर्भावस्था में संतुलित आहार लेना आवश्यक होता है गर्भावस्था के दौरान गर्भवती को सुबह तथा शाम में दंत धावन अवश्य करना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान तरल पदार्थ, विटामिन डी युक्त पदार्थं, दूध तथा इससे बने पदार्थ अंडा, मछली, आयोडीन युक्त पदार्थ हरी सब्जियां गाजर, टमाटर, पालक, मूली गोभी तथा सूखे मेवे का पर्याप्त मात्रा में सेवन करना चाहिए।
सौंदर्य का प्रतीक है बिंदिया..इसके बिना पूरा नहीं माना जाता नारी श्रृंगार

सही मात्रा में भोजन तथा सही दिनचर्या से बच्चे के दांतों के विकास के साथ शरीर का विकास भी ठीक से होता है।
– राजा तालुकदार[आप ये ख़बरें अपने मोबाइल पर पढना चाहते है तो दैनिक रॉयल बुलेटिन की मोबाइलएप को डाउनलोड कीजिये….गूगल के प्लेस्टोर में जाकर
royal bulletin
टाइप करे और एप डाउनलोड करे..आप हमारी हिंदी न्यूज़ वेबसाइटwww.royalbulletin.comऔर अंग्रेजी news वेबसाइटwww.royalbulletin.inको भी लाइक करे]

Share it
Share it
Share it
Top