खुशियों के रंग, चूडिय़ों के संग

खुशियों के रंग, चूडिय़ों के संग

चूड़ी की खनक जितनी प्यारी होती है उतना ही इसका महत्त्व भी है। चूड़ी को सुहागन सुहाग के प्रतीक के रूप में पहनती है तो कुंवारी लड़की फैशन के तौर पर। वक्त चाहे कितना भी बदल जाए, चूड़ी की खनक और महत्त्व कम नहीं हो सकते हालांकि वर्तमान दौर में लड़कियां चूड़ी हर वक्त नहीं पहनती।
महिलाएं दो-चार चूडिय़ों से काम चला लेती हैं। फिर भी शादी-ब्याह के मौके पर महिलाएं चूडिय़ों से हाथ भर लेती हैं। यह सिर्फ पहनने का आभूषण नहीं है बल्कि हमारी संस्कृति है, सभ्यता है। शादी के मौके पर दुल्हन की चूडिय़ों का विशेष ख्याल रखा जाता है। आजकल रेडियम प्लेटेड चूडिय़ां, रेडियम पॉलिश्ड सोने की चूडिय़ां, हीरे जडि़त सोने व ब्राइट गोल्ड की चूडिय़ां दुल्हन की खास पसंद बन गयी हैं।
भारत के विभिन्न प्रदेशों में चूड़ी अलग-अलग नामों से प्रसिद्ध हैं। प्रत्येक राज्य में चूडिय़ों को पहनने पहनाने का अंदाज भी अलग-अलग है। मिथिला में लाह की लहठी पहनी जाती है। यहां की ज्यादातर महिलाएं लाल रंग की लहठी पहनती हैं। कुछ दुल्हन अपने परिधान के अनुसार रंगों का चयन करती है। दुल्हन अपने बहन या सहेलियों के सिर के पास कलाइयों को आपस में रगड़ कर कलीरा उनके सिर को छुआती है। ऐसा माना जाता है कि जिस भी लड़की के सिर पर यह कलीरा टूट कर गिरता है, उसकी शादी भी जल्दी हो जाती है।
मोबाइल बजा रहा है खतरे की घंटी
मारवाड़ी दुल्हन सोने व आइवरी की चूडिय़ा पहनती हैं। राजपूत दुल्हन की चूड़ी में साधारण आइवरी की चूडिय़ां होती हैं जो साइज के हिसाब से कलाई से लेकर कंघे तक पहनी जाती है। उत्तर प्रदेश में दुल्हन लाह की लाल व हरी चूडिय़ां पहनती हैं। इनके आसपास कांच (शीशा) की चूडिय़ां पहनी जाती हैं।
राजस्थान व गुजरात की अविवाहित आदिवासी महिलाएं हड्डियों से बनी चूडिय़ां पहनती हैं जो कलाई से शुरू होते हुए कोहनी तक जाती हैं लेकिन वहां की शादीशुदा महिलाएं कोहनी से ऊपर तक ये चूडिय़ां पहनती हैं। लाह की लाल रंग की चूड़ी, सफेद सीप व मोटी लोहे की चूड़ी जिसे सोने में भी पहना जाता है। परंपरागत रूप में केरल में दुल्हन सोने की चूडिय़ां सम संख्या में पहनती हैं।
दुर्गंधयुक्त पसीने से बचें
कई मुस्लिम परिवारों में चूडिय़ां नहीं पहनी जाती, फिर भी हल्दी की रस्म के दौरान कुछ राज्यों की महिलाएं लाल लाह की चूडिय़ां पहनती हैं। प्राय: सभी प्रांतों में चूड़ी वाले आशीष के नाम पर एक चूड़ी अपनी ओर से पहनाते हैं। सुनहरी और लाल रंग के अलावा हरी और सफेद रंग की चूडिय़ां भी रिवाज में हैं। ये गुडलक और खुशहाली की प्रतीक हैं। कई प्रांतों में शादी के रस्म के साथ दूल्हे द्वारा दुल्हन को चूड़ी पहनाने की रस्म अदा की जाती है। कुल मिलाकर लड़कियों एवं महिलाओं की खुशी के रंग चूड़ी के संग गुजरते हैं जो सुख एवं खुशहाली की प्रतीक मानी जाती हैं।
– नर्मदेश्वर प्रसाद चौधरी

Share it
Top