खुद से भी प्यार करें

खुद से भी प्यार करें

दूसरों की खूबियों-गुणों और खूबसूरती को देख कर आकर्षित होना स्वाभाविक है लेकिन कई बार इनकी तुलना खुद से करना आपको हीन भावना से ग्रस्त कर सकता है। दूसरों के गुणों की तारीफ करने में कोई बुराई नहीं है लेकिन खुद से प्यार करना भी उतना ही जरूरी है। ऐसा करके न केवल आप आत्मविश्वास से भरपूर होंगी बल्कि आत्मसम्मान की भी कोई कमी नहीं होगी।
हम सब में एक अंदर की आवाज होती है जो हमेशा हमें नाकामी या गलती का अहसास करवाती है या हमें कोई चुनौतीपूर्ण कार्य हाथ में न लेने के लिए कहती है। खुद से प्यार करना है तो सबसे पहले आलोचना करने वाली इस आवाज को एक प्रेरक आवाज में बदलना होगा। खुद के प्रति दयालु बनें और गलतियों को सीखने का मौका समझें। इससे आप में नया करने की ताकत और विश्वास पैदा होगा।
हो सकता है आपसे लगातार कुछ गलतियां हो रही हों लेकिन ऐसा तो किसी के साथ भी हो सकता है, उनके साथ भी जो आपकी नजर में कामयाबी के शिखर पर हों। अपनी गलतियों को यूं ही दिमाग से निकाल देना भी सही नहीं है, हालांकि इनसे छूटना जरूरी है। गलतियां करने के लिए अपने आपको माफ करना ज्यादा अर्थपूर्ण होगा बजाय उन्हें भुला देने के।
मुश्किल दौर से गुजर रही अपनी दोस्त के साथ आप कैसा व्यवहार करेंगी? उसके लिए कुछ अच्छा खाने के लिए बनाएंगी, उसे एक रिलेक्सिंग मसाज के लिए ले कर जाएंगी या उसे मोटिवेट करने की कोशिश करेंगी। बस यही सब आप अपने साथ भी आजमाइए। अपनी केयर कीजिए और अपने दिमाग और बॉडी की जरूरतों का ख्याल रखिए। जैसे पूरी नींद, पर्याप्त पानी और हेल्दी खाना। टीवी देख कर नहीं बल्कि पेंटिंग या व्यायाम जैसे संतुष्टि पूर्ण कार्य कर वक्त गुजारें।

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अपनी ताकत से रूबरू हों :
खुद को कमतर मानने की सोच सभी के दिल में कहीं गहरी दबी होती है। अपनी अच्छाइयों के बारे में न सोच कर हम ऐसी गलतियों और कामों के बारे में सोचते हैं जो हमने किए ही नहीं। हम में से ज्यादातर कमियों और गलतियों पर फोकस करते हैं। इस आदत से मुक्त होने के लिए अपनी उपलब्धियों को लिखें। इस सूची को लगातार बढ़ाती रहें।
लेखा-जोखा भावनाओं और बर्ताव का:
डायरी लिखना जेहनी और जिस्मानी सेहत के लिए फायदेमंद होता है। इसमें दुख पहुंचाने वाले क्षणों, भावनाओं और अपने बर्ताव को दर्ज कीजिए। हो सकता है कि चीजें फैलाने के लिए आपने अपने बच्चे को डांटा हो या अपनी करीबी दोस्त का जन्मदिन भूल गई हों।
अपने इस व्यवहार को तीन फिल्टर से निकालें। पहला है समझ, जिसमें आप समझें कि ऐसा व्यवहार आपने क्यों किया? दूसरा है अनुभव जिसमें आपको यह देखना होगा कि दूसरे पेरेंट्स भी ऐसा ही करते हैं क्या और तीसरा फिल्टर है दिलासा जिसमें आपको यह मानना होगा कि आप बुरी नहीं हैं, बस अपने आपे पर काबू नहीं रख पाईं।

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बॉडी से स्ट्रेस निचोड़ दें :
क्या आपका दिमाग बहुत अशांत रहता है। इससे निजात आसानी से पाई जा सकती है। बस अपनी हथेली अपने दिल पर रखिए, दोनों हाथों को हल्का पकड़ें या हथेलियों से अपने घुटनों या बाजुओं को थपथपाएं। ऐसा करके आप अपने शरीर को दयालुता का संकेत देती हैं जिससे आपका नर्वस सिस्टम सक्रिय हो कर आपको तनावमुक्त होने में मदद करता है। समय-समय पर खुद से पूछें कि क्या मैं खुद पर थोड़ी दया कर तनावमुक्त रह सकती हूं?
परफेक्शन को भुला दें :
नामुमकिन लक्ष्यों को हासिल करने और खुद को परफेक्ट बनाने की कोशिश आपकी उत्पादकता को बुरी तरह प्रभावित कर सकती हैं। इन्हें हासिल करने की नाकामी आपको अपनी काबिलियत पर शक करने को मजबूर करेगी। इसके ठीक उलट अगर लक्ष्य आसान और प्राप्त करने योग्य होंगे तो आप कामयाबी की ओर बढ़ेंगी। यही वजह है कि छोटे-छोटे मुकाम पार करते हुए आगे बढऩे में ही समझदारी होगी।
- खुंजरि देवांगन

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