खांसी के साथ खून आए तो सतर्क हो जाएं..!

खांसी के साथ खून आए तो सतर्क हो जाएं..!

अपने देश में लाखों की तादाद में, चाहे वह नौजवान हों या बूढ़े किसी न किसी रूप में खांसी से पीडि़त रहते हैं। कभी जाड़ों में खांसी का प्रकोप ठंड के साथ अचानक बढ़ता है तो सूखी खांसी बलगम वाली खांसी में बदल जाती है। कभी मौसम में बदलाव आते ही न थमने वाली खांसी का कहर टूट पड़ता है और लोग खांसी से छुटकारा पाने के लिए तरह- तरह की एलोपैथिक दवाइयां और विभिन्न घरेलू नुस्खे आजमाते रहते हैं।
दवा के इस्तेमाल से खांसी में थोड़ी राहत तो मिलती है पर वह पूरी तरह से दूर नहीं हो पाती, क्योंकि खांसी के कारणों पर लोग ध्यान नहीं देते। वैसे लगातार खांसी बने रहना अपने आप में ही एक चिंता का कारण है और ऊपर से अगर खांसी के साथ खून भी आने लगे तो यह एक गंभीर व खतरनाक समस्या है। खांसी के साथ खून आने पर लापरवाही करना सीधे-सीधे मौत को निमंत्रण देने के समान है। याद रखें कि खांसी के साथ मुंह से खून आने पर किसी थोरेसिक सर्जन यानी चेस्ट सर्जन से परामर्श लें अन्यथा लापरवाही करने से जान भी जा सकती है।
क्यों आता है खांसी के साथ खून: खांसी के साथ खून आने के कई कारण हैं। भारत में सबसे बड़ा कारण फेफड़े की टी.बी.है। टी.बी.का इंफेक्शन जब सही इलाज के अभाव में भीषण रूप धारण कर लेता है तो खांसी के साथ खून आना शुरू हो जाता है। कभी-कभी रक्तस्राव इतना भयंकर होता है कि टी.बी.इंफेक्शन से पीडि़त मरीज कुछ ही घंटों में दम तोड़ देता है।
यह देखा गया है कि टी.बी.का इलाज करने के बाद उसके इंफेक्शन पर नियंत्रण तो पा लिया जाता है पर खांसी के साथ खून का आना जारी रहता है। इसका कारण यह होता है कि टी.बी.का इंफेक्शन समाप्त तो हो जाता है पर यह अपने पीछे फेफड़े पर बड़े-बड़े खोखले घाव छोड़ जाता है जिसमें दूसरे कीटाणु खास कर फंजाई अपना डेरा जमा लेते हैं। इस दशा को मेडिकल भाषा में ‘एस्पर्जीलोमा’ या ‘एस्पर्जीलोसिस’ कहते हैं, जिसकी वजह से मरीज को खांसी के साथ खून आने लगता है। भारत में एस्पर्जीलोमा रोग से ग्रस्त मरीजों की संख्या भी लाखों में है, जो अज्ञानता की वजह से गलत इलाज कराते रहते हैं और जिसकी वजह से बचा हुआ स्वस्थ फेफड़ा भी रोगग्रस्त हो जाता है और जान जाने के सिवा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता।
फेफड़े का इंफेक्शन बार-बार न होने दें: खांसी के साथ खून आने का दूसरा कारण ‘ब्रोन्कियक्टेसिस’ नामक रोग है। इस बीमारी में श्वास नली में इंफेक्शन होने से, फेफड़े में स्थित श्वास नली में लगातार सूजन रहने से उसकी दीवारें बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, नतीजतन, फेफड़े के अंदर स्थित श्वास नली की शाखाएं या तो सिकुड़ जाती हैं या अनावश्यक रूप से गुब्बारे की तरह फूल जाती हैं।
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श्वास नली की ऐसी अवस्था आने पर छाती से बलगम बाहर निकालने की क्रिया प्रणाली पूर्ण रूप से बाधित हो जाती है जिसकी वजह से बलगम बाहर निकलने के बजाय गाढ़ा हो कर नलियों में स्थायी रूप से जमा हो जाता है और खून की नलियां भी आकार में बढ़ कर कमजोर हो जाती हैं। इन सबका परिणाम यह होता है कि खांसी होने पर दबाव के कारण खून की नलियां फट जाती हैं और खांसी के साथ मुंह से खून आने लगता है। ब्रोन्कियक्टेसिस के मरीजों को चाहिए कि फेफड़े के उस क्षतिग्रस्त हिस्से को तुरंत किसी चेस्ट सर्जन के पास जा कर जल्दी से जल्दी निकलवा दें अन्यथा फेफड़े के स्वस्थ हिस्से भी लपेट में आ जाएंगे।
फेफड़े का कैंसर: खांसी के साथ खून आने का तीसरा कारण फेफड़े का कैंसर है। धूम्रपान की बढ़ती आदत की वजह से युवाओं में फेफड़े का कैंसर होने की संख्या में हर साल बढ़ोतरी हो रही है। खेत-खलिहानों में काम करने वाले मजदूरों में बीड़ी पीने की आदत फेफड़े के कैंसर को जन्म देने में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है। धूम्रपान की आदत एक गंभीर चिंता का विषय है क्योंकि धूम्रपान न केवल फेफड़े के कैंसर को जन्म देता है बल्कि शरीर में विभिन्न अंगों को सप्लाई करने वाली खून की नलियों में सिकुडऩ पैदा करता है जिसकी वजह से लोग फेफड़े के साथ-साथ हाथ-पैर भी गवां बैठते हैं। अगर किसी धूम्रपान के आदी नौजवान के खांसने पर खून आए तो फेफड़े के कैंसर होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
फेफड़े में मवाद: खांसी के साथ खून आने का एक और महत्त्वपूर्ण कारण फेफड़े में मवाद यानी लंब ऐब्सेस है। इंफेक्शन की वजह से खून की नलियां कमजोर पड़ जाती हैं और खांसी के साथ आए क्षणिक दबाव की वजह से फट जाती हैं जिससे खांसी के साथ खून भी आने लगता है। कभी-कभी नवयुवक-नवयुवतियों में फेफड़े में स्थित खून की नलियों की संरचना में जन्मजात कमी होती है। ये खून की नलियां फेफड़े को सप्लाई करने के पहले ही आपस में जुड़ जाती हैं, जिसे पी.ए.वी.एम.(पलमोनरी आरटीरियो वेंस मेलफोरमेशन) कहते हैं।
कभी-कभी किसी सड़क दुर्घटना में लगी पुरानी छाती की चोट या छाती के अंदर जमे हुए मवाद की वजह से फेफड़े में स्थित श्वास नली का फेफड़े की बाहरी सतह से सीधा संपर्क हो जाता है। इस भयानक स्थिति में जब मरीज खांसता है तो बलगम के साथ खून आने की आशंका रहती है।
सकारात्मक मानसिक दृष्टिकोण द्वारा ही संभव है संपूर्ण उपचार

खांसी के साथ खून की शिकायत है तो कहां जाए: अगर खांसी के साथ खून आता है तो तुरंत किसी चेस्ट सर्जन से परामर्श लें। खांसी और उसके साथ आने वाले खून के कारणों की जांच नितांत आवश्यक है क्योंकि खून आने के कारणों का इलाज करने से ही इस गंभीर समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। इस समस्या से पीडि़त मरीज हमेशा किसी ऐसे अस्पताल में जाएं जहां किसी थोरेसिक सर्जन की 24 घंटे उपलब्धता हो और फेफड़े व दिल के ऑपरेशन नियमित होते हों।
खांसी के साथ खून आने पर कुछ अत्याधुनिक जांचों की जरूरत पड़ सकती है जैसे ब्रॉन्कोस्कोपी, थोरेकोस्कोपी आदि। अस्पताल में आने से पहले यह अवश्य सुनिश्चित कर लें कि वहां अत्याधुनिक ब्लड बैंक की 24 घंटे सुविधा है या नहीं, अत्याधुनिक आई.सी.यू.व क्रिटिकल केयर यूनिट की उपलब्धता है या नहीं और वेंटीलेटर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं या नहीं।
– नरेंद्र देवांगन

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