खरीदारी करते समय रहे सावधान

खरीदारी करते समय रहे सावधान

घर की ज्यादातर खरीदारी महिलाओं के जिम्मे होती है। उन्हें खाने-पीने की चीजें, परिधान, साबुन, वाशिंग पाउडर, घर के बर्तन इत्यदि विविध प्रकार की वस्तुएं खरीदनी होती हैं लेकिन बजट सीमित होता है। यदि हर बार जब भी वे बाजार जाती हैं ऐसी चीजें खरीद लाती हैं जिन्हें वे खरीदना नहीं चाहती थी तो यह बड़ा खतरनाक रूझान हो सकता है और यदि उन खरीदी हुई चीजों का उनका परिवार कोई उपयोग नहीं कर पाता है तो उनके मासिक बजट का महत्वपूर्ण हिस्सा व्यर्थ ही चला जाएगा।
हम इस बात पर विचार करके देखें कि वे क्या कारण थे जिन्होंने उस महिला को वे चीजें खरीदने के लिए लालायित किया जो कतई उसके मतलब की नहीं थी तो हम पाएंगे कि सेल्समैन और सेल्स गर्ल्स की लच्छेदार बातों और टी. वी. चैनलों पर लगातार दिखाए जाने वाले उन वस्तुओं के विज्ञापन बार बार सेल लगने की लालच ने उसके दिमाग के अन्दरूनी कोने में घर कर लिया था। जब दुकान पर खड़े सेल्समैन ने उन्हें ‘प्रेशराइज’ किया तो उन्होंने बगैर सोचे-समझे वह चीज खरीद ली। अक्सर ऐसी खरीदारी के बाद घर लौटते हुए हम सोचते हैं कि कैसे आटोमेटिक तरीके से उस सेल्समैन ने हमारे पर्स से पैसे निकाल लिए और अनइच्छित वस्तु हमें थमा दी। जब हम किसी बड़ी वस्तु या मकान, कार इत्यादि की खरीदारी के लिए निकलते हैं तो उपरोक्त प्रवृत्ति बड़ी दु:खदायी साबित हो सकती है क्योंकि या तो हम गलत लोकेशन पर गलत मकान खरीदे हुए होंगे या ऐसी कार खरीद लेंगे जो हमारे बजट से बाहर होगी। फिर इन्हें लेकर सारी आयु रोते-झींकते रहेंगे या घाटा उठाकर किसी अन्य व्यक्ति को बेच देंगे। इस परिस्थिति से बचने के लिए खरीदारी करने से पूर्व निम्न सिद्धांत को याद रखें:- आप उस वक्त जो आपको वास्तव में चाहिए, को उचित मूल्य पर ही खरीदेंगे? जब सेल्समैन या सेल्स गर्ल अपनी लम्बी-चौड़ी हांक रहे हों, आप इस सिद्धान्त को अपने होंठों से बुदबुदाते रहिए जो चीज आपको चाहिए ही नहीं, वह सस्ती से सस्ती भी मिले, तब भी आपके लिए बेकार है। अब आप कोई पुरानी कार या निर्मित मकान या प्लांट इत्यदि खरीदने जाते हैं तो इनके एजेन्टों का रटा-रटाया वाक्य होता है-मेरी एक और ग्राहक से बात चल रही है। आप आज खरीदना चाहें तो स्वागत है। कल तक शायद यह बिक जाए। बेहतर है आप इस शब्द जाल में न फंसें क्योंकि जीवन भर की पूंजी जिसकी खरीद में लगनी है, उसका फैसला खड़े-खड़े नहीं हो सकता। आप उससे पूछिए कि आपने ही उसे क्यों नहीं खरीद लिया। उसके न खरीदने का क्या कारण था। एजेन्ट को इस प्रश्न का उत्तर देना ही होगा। उसके बताए कारण की तार्किकता पर ध्यान दीजिए। अगर वह ‘गप्प’ मार रहा है तो उसके तर्क आपके सामने भोथरे पड़ जाऐंगे। इससे आप एक अवांछित वस्तु की खरीद से बच जाएंगे।
– सतीश सरदाना

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