क्यों बिखरता है दांपत्य?

क्यों बिखरता है दांपत्य?

family tiredसुखद दांपत्य में प्रेम की उष्णता, विश्वास, समर्पण, सहनशीलता एक दूसरे के प्रति खिंचाव सभी कुछ तो होता है पर तब प्रेम की उष्णता खत्म होने लगती है या विश्वास डगमगाने लगता है तो सुखद दांपत्य में ग्रहण लग जाता है या कोई घुन लग जाता है जो नींव को धीरे धीरे खोखला कर देता है।
ऐसा महसूस होते ही संभल जाना चाहिए नहीं तो दीवारें गिरते देर नहीं लगती और दापंत्य जीवन बिखर कर टुकड़ों में बंट जाता है। हमें जब भी ऐसे संकेत महसूस हों, उन्हें दूर करने का प्रयास कर अपने सुखी दांपत्य जीवन को बचाना चाहिए।
सुखद दांपत्य की नींव दोनों ओर से बराबर डलती है, फिर भी महिलाओं के त्याग कुछ प्रतिशत ऊपर ही रहते हैं। इस त्याग और समझदारी के कारण महिलाएं चाहें तो घर बचा सकती हैं। जो महिलाएं नासमझी कर जाती हैं, उनका घर बिखर जाता हैं। देखें, कौन से ऐसे संकेत हैं जो बिखराव लाने में मदद करते हैं। हमें उनसे दूर रहना चाहिए ताकि हम अपनी गृहस्थी बचा सकें।
जब अहं टकराता है
अहं ऐसा घुन है जो तलाक तक करवा देता है। पति पत्नी में कैसा अहं। दोनों से मिलकर ही तो दांपत्य बनता है। फिर अहं के कारण कटुता कैसी या दोनों में कौन जीता, कौन हारा, ऐसे विचार क्यों? विवाह एक दूसरे को समझना, एक दूसरे के लिए जीना, एक दूसरे की जिंदगी को शेयर करना ही तो है। फिर मैं क्यों करूं, मैं ही क्यों झुकूं, मैं ही हमेशा सहूं, जैसी भावनाएं सुखी दांपत्य में दरार ही लाती हैं। समय रहते यदि संभल जायेंगे तो दांपत्य बचा रहेगा।
जब दोस्त संबंधी अच्छे न लगें
कभी दांपत्य में ऐसा समय आ जाए जब एक दूसरे के मित्र, सगे संबंधी अच्छे न लगें, उनके सामने अपने पार्टनर को नीचा दिखाने की कोशिश करना या हमेशा दूसरों के दोस्तों और संबंधियों की बिना मतलब बुराई करना दांपत्य के बिखराव का संकेत है। ऐसे में दोनों की समझदारी ही बिखरते दांपत्य को संभाल सकती हैं।
जब आपस में हंसी गायब हो जाए
आपस मे बातें करना, हंसना, घर का वातावरण खुश बनाना ही सुखद दांपत्य की निशानी है। जब इसके स्थान पर एक दूसरे से खिंचा खिंचा रहना, चुप चुप रहना, मतलब की बात करना, जोक पर भी न हंसना शुरू हो जाये तो इसका अर्थ है कि कहीं न कहीं हंसी की रोशनी फीकी पड़ रही है। हमें प्यार की हंसी को कम नहीं होने देना है। रोशनी और चमचमाए, इसका प्रयास करते रहना है।
छोटी छोटी बात पर झगडऩा
पति पत्नी दोनों विभिन्न परिवार से होते हैं। दोनों का रहन सहन, खान पान, व्यवहार व सोचने का तरीका भी अलग होता है पर शादी के बाद दोनों को कुछ कुछ बदलना पड़ता है ताकि मतभेद कम हों, झगड़े कम हों और गाड़ी सही रूप से चलती रहे पर कभी कभी दोनों में मतभेद बढऩे लगते हैं, बात बात पर झगड़े भी होने लगते हैं तो समझना चाहिए कि कहीं न कहीं कुछ कमी है जो उन के रिश्तों को दूर ले जा रही है। ऐसे में दोनों को संभलने की आवश्यकता होती है। फिर से आत्म निरीक्षण कर सोचें कि कहां बदलाव लाकर अपने रिश्तों की बढ़ती खाई को कम किया जा सकता है।
सेक्स प्रताडऩा देना
वैसे तो विवाह के बाद सेक्स आपस में अधिक गहराई तक जोडऩे का साधन होता है। एक दूसरे की भावनाओं इच्छाओं और क्षमतानुसार सेक्स जिंदगी में प्रेम की बहार लाता है पर पत्नी की इच्छा के विरूद्ध जबरदस्ती सेक्स संबंध बनाना भी आपसी प्यार को दूर करता है और समर्पण भाव कम करता है। जब भी कमी ऐसा जीवन में आए तो समय रहते संभलना ही अच्छा है। बात अधिक बढ़ आए तो विवाह सलाहकार से मिलकर अपनी समस्या को करना चाहिए ताकि पुन: अपनी सेक्स लाइफ को आनंदपूर्ण बना सकें और सेक्स के कारण आपसी बिखराव की स्थिति का सामना न करना पड़े।
ईष्र्या
पति पत्नी में यदि कोई आगे बढ़ता है तो यह दोनों के लिए गर्व की बात है। इससे जिंदगी में और बहार आती है पर जब कभी दूसरे की कामयाबी में खुश न होकर ईष्र्या का भाव दिखना जीवन की खुशियों को ग्रहण लगा देता है तो बात बिखराव तक पहुंच जाती है। ऐसे में समझदारी है कि अपनी प्यार की गरमाहट में कामयाबी को अहम् न समझें। दूरियां घटाने के स्थान पर नजदीकियां लायें। तभी बिखराव की चिंगारी को बुझाया जा सकता है।
नीतू गुप्ता

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