क्या होगा बाल श्रमिकों का भविष्य

क्या होगा बाल श्रमिकों का भविष्य

संयुक्त राष्ट्र की श्रम एजेन्सी द्वारा किये गये एक सर्वेक्षण पर आधारित एक रिपोर्ट के अनुसार विश्व भर में 10 से 14 वर्ष की उम्र के करीब सात करोड़ तीस लाख बच्चे मजदूरी करते हैं। घरेलू नौकर के रूप में काम कर रहे बच्चों की संख्या अगर जोड़ी जाये तो बाल मजदूरों की संख्या कई गुना हो सकती है।
धनी देशों में भी यह समस्या मौजूद है। दक्षिण यूरोप में छोटे उद्योगों में बाल श्रमिक बिना तनख्वाह के अपने ही पारिवारिक व्यवसायों में लगे रहते हैं और पांच से छ: वर्ष की उम्र में ही बाल श्रमिक कार्य करना शुरू कर देते हैं। कृषि व्यवसाय में भी बहुत से बाल श्रमिक हैं। वहां उन्हें तेज धारदार हथियारों व रासायनिक पदार्थों और बिजली से चलने वाले उपकरणों से नुकसान का खतरा होता है। बहुत सी लड़कियां अपने घर से दूसरे घरों में नौकरी के तौर पर कार्य करती हैं जहां वे शारीरिक, मानसिक शोषण तथा यौन-शोषण का शिकार बन जाती हैं।
विश्व में एड्स के खतरे के साथ बाल वेश्यावृत्ति और बच्चों के यौन शोषण की घटनायें बढ़ी हैं क्योंकि युवा और प्रौढ़ व्यक्ति यह सोचते हैं कि कच्ची उम्र की लड़कियों से संसर्ग में एड्स का खतरा कम रहता हैं।
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रपट के अनुसार बाल दासता एक अन्य गंभीर समस्या हैं। दक्षिणी एशिया, पूर्वी अफ्रीका तथा लातीन अमरीकी देशों में बच्चों को गुलाम बनाकर रखने के मामलों का भी पता चला है। ये बच्चे कृषि, कालीन उद्योग तथा वेश्यावृत्ति के धन्धे में लिप्त हैं।
अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की मिशेल हैसेन के अनुसार आज के बाल श्रमिक कल के अशिक्षित और अकुशल युवा होंगे जो भीषण गरीबी की चपेट में होंगे। भारत में बाल श्रमिकों की समस्या निरन्तर गंभीर होती जा रही है। सरकारी तथा गैर सरकारी प्रयासों के बावजूद बाल-श्रम पनपता जा रहा है।
इस पर अकुंश लगाने के लिए हमें सामाजिक-मानवतावादी बनकर सामूहिक प्रयास करने होंगे। समाज के लोगों को आगे – नवाब हुसैन दाऊदसर

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