क्या आप बदसूरत कहलाना पसंद करेंगी….?

क्या आप बदसूरत कहलाना पसंद करेंगी….?

 माना कि सुंदरता प्राकृतिक देन है परन्तु इसे सुरक्षा प्रदान करना तो आपका कर्तव्य बनता है।
प्राकृतिक सुंदरता को बनाये रखना इसलिए जरूरी है कि बनावटी सुंदरता लम्बी नहीं चलती, अत: आप अपनी सुंदरता के प्रति सजग रहें। कहीं ऐसा न हो बाद में पछताना पड़े क्योंकि आपकी सजगता के अभाव में समय से पूर्व सुंदरता जाती रहेगी।
जहां कहीं क्रोध, ईष्र्या, घमंड व कामांधता आपकी सुंदरता को बदसूरती में बदल सकती है, वहीं तनाव मुक्त वातावरण, मुस्कुराहट, आत्म संतुष्टि, प्यार, नियमित हल्का फुल्का व्यायाम आपकी सुंदरता में चार चांद लगा देगा। युवकों के बजाय युवतियां अधिक सौंदर्यप्रिय होती हैं अत: हर उम्र की युवती को सौंदर्य के प्रति सजगता बरतनी चाहिए। इसका अर्थ यह नहीं कि आप सौंदर्य प्रसाधनों का प्रयोग ही न करें परन्तु उनकी रासायनिक घातकता से भी बचें।
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क्रोध में त्यौरियां चढ़ाना असमय चेहरे पर झुर्रियों को आमंत्रण है। यह एक वैज्ञानिक सत्य है कि क्रोध में हमारे तंत्रिका तंत्र को अधिक कार्य करना पड़ता है जिससे त्वचा पर सीधा असर पड़ता है। एक त्वचा विशेषज्ञ का कहना है कि त्वचा को शुष्क न होने दिया जाये। इसमें नमी बनी रहनी चाहिए।
क्रोध व तनाव न केवल आपकी सुंदरता छीनते हैं साथ ही सिरदर्द, कील मुहांसे, अल्सर जैसे रोगों को जन्म देते हैं। किसी की सुंदरता को देख कर र्ईष्र्या न करें। इससे आपकी मानसिकता भी असुंदर हो जायेगी तथा सुंदरता के प्रति आपको सदा जलन बनी रहेगी। इससे आपके पास उपलब्ध सौंदर्य भी जाता रहेगा।
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आप अपनी फिगर अकेले में हल्के व्यायाम द्वारा बना सकती हैं। समय समय पर मेकअप भी करें जैसे किसी पार्टी, विवाह शादी में जाना है तो आप सौन्दर्य प्रसाधनों का प्रयोग करें परन्तु मेकअप ऐसा न हो कि भद्दा लगे वरना पार्टी में आप मजाक का मुद्दा बन जायेंगी। प्राकृतिक सुंदरता सदाबहार होती है। इसे लम्बा चलाने के लिए क्रोध, तनाव, र्ईष्र्या से बचें। अब आप ही अंदाज लगाइये, क्या आप बदसूरत रहना पसंद करेंगी या प्राकृतिक खूबसूरत। नजर न लगे, कुछ लोग तो यहां तक कहते हैं कि लोग सुंदर नहीं हुआ करते। सुंदरता आंखों में होती है।
– राजेन्द्र स्वामी ‘लवली’

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