क्या आप जानते हैं… ड्रग्स से भी कहीं ज्यादा खतरनाक है शराब

क्या आप जानते हैं… ड्रग्स से भी कहीं ज्यादा खतरनाक है शराब

wwine  शराबी और शराब की बुराइयां गिनने में गिनती भी कम पड़ जाती है, लेकिन पिछले सालों में हुए शोध कार्यों से यह बात सामने आई है कि शराब हेरोइन, कोकीन जैसे ड्रग्स से भी ज्यादा खतरनाक है। ब्रिटेन में हुए उस अध्ययन पर गौर करें। ब्रिटेन की ‘इंडिपेंडेंट साइंटिफिक कमेटी ऑन ड्रग्स’ के चेयरमैन प्रोफेसर डेविड नट ने तमाम नशीली दवाओं को 100 के पैमाने पर नापा। इस स्केल पर 100 का मतलब था बहुत ज्यादा नुकसानदेह और 0 (शून्य) का मतलब था हानिरहित। गहन रिसर्च के बाद इस पैमाने पर शराब को मिले 72 प्वाइंट, दूसरे और तीसरे नंबर पर आने वाले हेरोइन को 55, गांजे को 54, कोकीन को 27 और तंबाकू को 26 प्वाइंट दिए गए। बुरे नशे के लिए बदनाम और युवाओं के बीच में खूब लोकप्रिय ‘एलएसडी’ का नशा अपने 7 प्वाइंट के साथ काफी पीछे रह गया। नशे के मामले में शराब अव्वल रही। यह रिपोर्ट साइंस जनरल ‘लांसेट’ में छपी है। इस टेस्ट स्केल का मकसद स्वास्थ्य के मुद्दे पर उन सरकारों को जागरूक बनाना रहा जो शराब के बुरे अंजामों को ले कर गंभीर नहीं हैं।
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प्रोफेसर डेविड नट की टीम ने अपनी इस रेटिंग को मोटे तौर पर 2 हिस्सों में बांटा था, पहला, इस्तेमाल करने वाले को नुकसान, दूसरा, समाज को होने वाला नुकसान। पीने वाले के नुकसान को 9 आधारों पर आंका गया, जैसे स्वास्थ्य को नुकसान, टूटते रिश्ते, नशे की आदत वगैरह-वगैरह। यहां समाज को होने वाले नुकसान को 7 आधारों पर देखा गया जैसे नशे के इस्तेमाल से होने वाले अपराध, पर्यावरण नुकसान, पारिवारिक लड़ाई, पैसे की बरबादी और समाज में तनाव व हिंसा वगैरह-वगैरह। उपरोक्त नशों से जुड़ी बुराइयों के आंकलन के बाद यह सच्चाई सामने आई कि व्यक्ति और समाज को शराब सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, शराब पीने के कारण केवल 1 साल में दिल का दौरा, लिवर की बीमारियों, कैंसर और सड़क हादसों में 25 लाख लोग मरते हैं। यह संख्या 1 साल में मरने वाले लोगों की कुल संख्या का 3.8 प्रतिशत बैठती है। असामयिक मृत्यु के अलावा लोगों को जीवनभर के लिए विकलांग बना देने के लिए भी शराब बहुत हद तक जिम्मेवार है। यहां उल्लेखनीय है कि शराब और तंबाकू का सेवन तो दुनिया के अधिकतर देशों में लीगल है, वहीं गांजा, हेरोइन, एलएसडी का सेवन व बिक्री गैरकानूनी है। प्रोफेसर नट को इस बात पर सख्त ऐतराज है कि शराब और तंबाकू से समाज और व्यक्ति के स्तर पर ज्यादा खतरा है तो फिर ऐसे नशों को लीगल होने का दर्जा कैसे हासिल है?
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व्यक्ति और समाज के हित को देखते हुए विभिन्न देशों की सरकारें तंबाकू और शराब के चलन पर सख्ती से रोक क्यों नहीं लगाती? शराब को हेरोइन और कोकेन से भी खतरनाक नशा मानने वाले प्रोफेसर डेविड नट पहले ब्रिटेन में ‘मिसयूज ऑफ ड्रग्स’ पर बनी अडवायजरी काउंसिल के चेयरमैन थे। शराब को भी हेरोइन और कोकेन की तरह गैर कानूनी न मानने के कारण ही उन्होंने तब सरकार की कड़ी आलोचना भी की थी।
‘डेली एक्सप्रेस’ के अनुसार यूट्रैश्ट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि मधुमेह के रोगियों के बीच उनकी शराब पीने की आदत और आंखों की रोशनी की तेजी से कम होते जाने के बीच सीधा और गहरा संबंध है। इस शोध के लिए यूट्रैश्ट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों में टाइप-2 मधुमेह के 1,239 मरीजों का गहराई से अध्ययन किया और इस नतीजे पर पहुंचे कि अध्ययन में शामिल शराब पीने के अभ्यस्त जहां 700 मरीजों की शराब पीने के कारण आंखों की रोशनी बहुत कम हो गई, वहीं अन्य लोग तो शराब पीने की वजह से अंधे हो गए थे। ‘डायबिटिक मेडिसिन जरनल’ में प्रकाशित तथ्यों के अनुसार, इस शोध में शामिल ऐसे कुछ टाइप-2 मधुमेह के शिकार मरीज थे जो शराब नहीं पीते थे। मधुमेह के रोगी होने के बावजूद उनकी आंखों की रोशनी 5 वर्ष पूर्व जैसी बरकरार थी। ब्रिटेन की मुख्य शोधकर्ता विक्टोरिया किंग ने कहा है कि शोध में इस बात की पुष्टि हुई है कि शराब के सेवन से टाइप-2 मधुमेह के मरीजों की परेशानियां बढ़ जाती हैं और ऐसे मधुमेह के मरीज जो अधिक मात्रा में शराब लेते हैं, पूरी तरह से अंधे हो सकते हैं। शोधकर्ता विक्टोरिया किंग का यह भी कहना है कि अक्सर यह कहा जाता है कि 2 पैग शराब रोज पीने से व्यक्ति स्वस्थ बना रहता है और दिल के रोगियों के लिए रैड वाइन फायदेमंद होती है। शराब को ले कर उपरोक्त यह मत किसी व्यक्ति या व्यक्तिगत मत तो नहीं हो सकता है पर किसी ऐसे शोध पर आधारित यह प्रमाणित सत्य नहीं है। किंग ने अपने शोध से तो यही निष्कर्ष निकाला है कि मधुमेह रोगियों को 2 पैग शराब सदा के लिए अंधा बना सकती है।
– नरेंद्र देवांगन 

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