ब्रेकिंग न्यूज़
Search

कोहरे ने लगायी रेलवे को करोड़ों की चपत

सत्येन्द्र सिंह उज्जवल
मुजफ्फरनगर। सफेद आसमानी आफत के नाम से जाने जाना वाला कोहरा न केवल आमजन को बुरी तरह से प्रभावित करता है सर्दी के मौसम में, बल्कि यह सैंकड़ों लोगों के मौत के मुंह में जाने की वजह भी बनता है। पिछले दो माह में इसने आमजन को न केवल प्रभावित किया, बल्कि कई लोगों की मौत का वजह भी बना। सर्दी के मौसम में कोहरा शारीरिक व आर्थिक रूप से नुकसान पहुचाने को मुख्य कारण माना जाता रहा है। इसी परिपाटी पर चलते हुए कोहरे ने पिछले दो माह (नवंबर-दिसंबर) में रेलवे विभाग को आर्थिक स्तर पर चोट पहुंचाते हुए बुरी तरह से प्रभावित किया है। जिसके चलते रेलवे अधिकारियों के माथे पर हाड़ कंपाने वाली सर्दी के इस मौसम में चिंता की लकीरें खींचते हुए ठंडे पसीने ला दिये हैं। कोहरे ने ट्रेनों के परिचालन को बुरी तरह से प्रभावित करते हुए उनकी गति पर ब्रेक लगा दिये। जिसके चलते वह अपनी तय गति से संचालित नहीं हो पाने के चलते घंटों की विलंबता से चल रही हैं। कोहरे ने न केवल ट्रेनों की गति को प्रभावित किया ,बल्कि रेलवे की आय पर भी ब्रेक लगा दिये।

आगरा में सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने का प्रयास, पुलिस फोर्स तैनात

loading...

जिसके चलते दो माह में दिल्ली-देहरादून-सहारनपुर मार्ग पर पांच करोड़ से अधिक की आर्थिक हानि रेलवे को उठानी पड़ी है। जो कि चिंता का सबब है रेलवे अधिकारियों के लिए। यह करोड़ों का नुकसान सभी छोटे-बड़े स्टेशनों पर हो चुका है। गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर जैसे बड़े स्टेशन व परतापुर, मोदीनगर, दौराला, सकौती, खतौली, मंसूरपुर, देवबंद जैसे छोटे स्टेशन भी शामिल हैं।
रेलवे विभाग ने आय बढ़ाने को लेकर व यात्रियों की सुविधा के चलते कई योजना सर्दी के मौसम से पहले बना ली थीं, लेकिन कोहरे ने सभी आय बढ़ाने वाली योजनाओं पर पानी फेरते हुए रेलवे की कमाई पर अपना ग्रहण लगा दिया। रेलवे अधिकारियों का कहना था कि सर्दी के मौसम में कोहरा अधिक होने के चलते ट्रेनों का संचालन काफी प्रभावित होता है। जिसके चलते वह घंटों की विलंबता के साथ परिचालित होती हैं। जिसका खामियाजा यात्रियों को घंटों स्टेशन पर ट्रेन की प्रतीक्षा के रूप में चुकाना पड़ता है। मेरठ से लेकर सहारनपुर से प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग गाजियाबाद, दिल्ली व नोएडा में सर्विस व व्यापार के सिलसिले में यात्रा करते हैं। अपनी यात्रा में वह ट्रेन को ही सस्ता व सुलभ यात्रा रूपी साधन मानकर इसकी यात्रा को प्राथमिकता देते हैं।

मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल पर फेंका जूता, चश्मा टूटा, आरोपी गिरफ्तार


जब ट्रेनों की विलंबता हावी हो, तो इस प्रकार के लोग घंटों की प्रतीक्षा करने के स्थान पर बस आदि साधन का सहारा लेते हैं। यह सहारा रेलवे विभाग के लिए घाटे का सौदा साबित होता है। जिसके चलते उसे आर्थिक हानि होती है। सर्दी के मौसम में ट्रेनों की बजाए बस व डग्गामार वाहनों का सहारा लेने को लेकर लोगों का कहना था कि पैसे तो ट्रेनों की अपेक्षा कुछ अधिक देने पड़ते हैं, लेकिन वह घंटों की प्रतीक्षा से बच जाते हैं। उनका कहना था कि यदि वह घंटों की प्रतीक्षा करने लगे, तो वह सर्विस नहीं कर पाएंगे। इसी के चलते राजधानी दिल्ली को जाने वाले सर्विसमैन तथा बिजनेसमैन सभी बस यात्री ही होते हैं। वह बस को ही सर्दी के मौसम में यात्रा का उचित विकल्प मानते हैं। पिछले दो माह में वैसे तो कोहरे ने उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम को भी काफी नुकसान पहुंचाया है, लेकिन ट्रेनों की यात्रा छोड़ बस की यात्रा करने वाले यात्रियों ने इस नुकसान की कुछ प्रतिशत भरपाई तो कर दी है। पिछले दो माह में ट्रेनों में यात्रियों का प्रतिशत 23 प्रतिशत तक घटा है। आय बढ़ाने को लेकर रेलवे विभाग की ओर से स्टेशनों पर विभिन्न कंपनिया का प्रचार-प्रसार का प्रसारण, एटीएम मशीन लगाना, शुल्क शौचालय आदि निर्णय लिये हैं। इसके अलावा निजी कंपनियां साझेदारी कर किराये के रूप में मिलने वाली रकम से आय में वृद्धि करने का प्लान बनाया जा रहा है।

‘मेरी दुदर्शा देखकर बेटा नहीं आना चाहेगा राजनीति में’

वहीं दूसरी ओर मुजफ्फरनगर रोडवेज डिपो के सहायक क्षे. प्रबंधक बीपी अग्रवाल का कोहरे के चलते डिपो की आय को लेकर कहना था कि उनकी डिपो की लगभग 60 बसें देहरादून-दिल्ली मार्ग पर संचालित होती हैं। यह रूट डिपो का सबसे आय वाला रूट है। डिपो की प्रतिदिन की औसत आय है 23 लाख के करीब। जो कि कोहरे में कुछ बसों के प्रभावित होने के चलते पिछले दो माह में घटकर 19 लाख प्रतिदिन पर आ गयी है। इस बार सर्दी के मौसम में दो माह में पिछले सालों के मुकाबले आय का औसत कम घटा है। हो सकता है यह ट्रेनों की यात्रा छोड़ रोडवेज की यात्रा करने वाले यात्रियों के कारण हो।

 



loading...