कैसे शुरू हुई गिनती की व्यवस्था..गिनती के बगैर लोगों का नहीं चलता काम

कैसे शुरू हुई गिनती की व्यवस्था..गिनती के बगैर लोगों का नहीं चलता काम

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आज कुछ भी खरीदना हो तो पहले पैसे गिनते होते हैं। गिनती के बगैर लोगों का काम नहीं चलता। गिनती के बारे में क्या कहना इस पर तो कई गाने भी बनाए गए है जिसे हम अक्सर सुनते भी रहते हैं। लेकिन यह गिनती के सिस्टम का सिलसिला शुरू कहां से हुआ क्या आपको यह पता है? अकसर यह सवाल उठता ही रहता है कि मनुष्य ने गिनती का सिस्टम किस तरह से विकसित और किया कैसे। आईए हम बताते है आपको इस सिस्टम के बारे में कुछ तथ्य।
शुरुआत कुछ इस प्रकार से हुई- चूंकि तब नंबर के लिए उनके पास शब्द नहीं थे, इसलिए हर वस्तु या ची़ज, जिसे उसे गिनना होता था, के एवज में वह केवल एक लकीर खींच दिया करता था। फिर वह गिनने के लिए अपनें उंगलियों का प्रयोग करने लगा। डिजिट शब्द ‘लातिन’ के शब्द ‘डिजिटस’ से बनाया है जिसका अर्थ होता है- उंगली। सहायक बनीं उंगलिया
माधुरी दीक्षित का एक, दो, तीन वाला जो गाना है शायद छोटे बच्चे सुनें तो कुछ डिजिट्स आसानी से गिनती सीख सकें। दरअसल,बच्चों को गिनती सिखाना ही सबसे कठिन काम है। आज हम बहुत आसानी से कह देते हैं कि दो और दो- चार होते हैं लेकिन इस तरह सोचने में आदमी को हजारों साल लगे। दरअसल, प्राचीन समय में आदमी के पास गिनती का कोई सिस्टम उपलब्ध था ही नहीं। अगर उसको यह बताना होता था कि उसके पास कितने जानवर हैं, तो वह जितनें जानवर होते थे उनके एवज में एक पत्थर झोले में डाल दिया करता था । यही कारण है कि शब्द वैâलकुलेट लातिन शब्द कैलकुलस से लिया गया है जिसका अर्थ है पत्थर। सवाल यह है कि मानव ने गिनती का सिस्टम किस तरह से विकसित किया? नंबर के लिए उसके पास शब्द तो थे नहीं। अब दोनों हाथों में दस उंगलियां होती हैं, इसलिए नंबर सिस्टम में दस का आम इस्तेमाल होने लगा।
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क्या प्राचीन समय में दुनियाभर में एक ही नंबर सिस्टम प्रयोग होता था?
नहीं, कुछ व्यवस्थ 12 पर आधारित थे, कुछ 60 और कुछ 20 पर और बहुत से 2, 5 और 8 पर। 2000 वर्ष पहले रोमनों ने एक व्यवस्था विकसित की। यूरोप में 16वीं शताब्दी तक इसी का प्रयोग किया जाता था। घड़ियों और कुछ पुस्तकों में भी पाठों को नंबर देने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता था। इस व्यवसथा का आज भी इस्तेमाल किया जाता है लेकिन यह बहुत ही जटिल व्यवस्था है। आज जो हम नंबर सिस्टम का प्रयोग करते हैं, उसका आविष्कार हजारों वर्ष पहले भारत में हुआ था। इसे दशमलव सिस्टम कहते थे क्योंकि इसे दस के आधार पर विकसित किया गया था। इस सिस्टम में सारे नंबर नौ डिजिट 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 में लिखे जाते हैं और फिर शून्य आता है। सन् ९०० में इस व्यवस्थ को अरब व्यापारी भारत से यूरोप ले गये।जिसे आधुनिक रूप देकर आगे बढ़ाया गया।आप ये ख़बरें और ज्यादा पढना चाहते है तो दैनिक रॉयल unnamed
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