कृत्रिम सौंदर्य प्रसाधनों से सावधान ! नैसर्गिक संसाधनों का ही करें प्रयोग

कृत्रिम सौंदर्य प्रसाधनों से सावधान ! नैसर्गिक संसाधनों का ही करें प्रयोग

 सुंदर दिखना कौन नहीं चाहता? खासकर स्त्रियों में आकर्षक दिखने और सजने-सँवरने की प्रवृत्ति प्राकृतिक रूप से होती है क्योंकि सौंदर्य, सौम्यता, कोमलता, आकर्षण तथा श्रृंगारप्रियता के गुण मूल रूप से स्त्रीवर्ग में प्राकृतिक रूप से ही होते हैं परंतु एक बात विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है कि इस संबंध में किये जाने वाले प्रयास भी प्राकृतिक, निरापद और सौंदर्य की रक्षा करने वाले होने चाहिए। ऐसा तभी हो सकेगा, जब श्रृंगार करने के लिए कृत्रिम सौंदर्य प्रसाधनों का नहीं बल्कि नैसर्गिक संसाधनों का ही प्रयोग किया जाए।
बढ़ती हुई महंगाई, महत्वाकांक्षा, विलासिता, भौतिक सुख-सुविधाओं की चकाचौंध, शौकीन मिजाजी और बढ़ती हुई अहंकारी प्रवृत्ति से प्रभावित होने वाले लोग इन कारणों से धन को सर्वाधिक महत्त्व देते हैं क्योंकि इन सब कारणों की पूर्ति-प्राप्ति के लिए धन का होना आवश्यक है और तब येन-केन-प्रकारेण यानी जैसे भी हा,धन कमाने का जुगाड़ किया करते हैं। इसी प्रकार का एक प्रयास है ब्यूटी-पार्लर चलाना। गत 5-6 वर्षों में देश के हर बड़े-छोटे नगर की गली-गली में ब्यूटी पार्लर खुल गये हैं और खुलते ही जा रहे हैं।
आज सौंदर्य के मामले में कई युवा लड़कियों में होड़ सी लग गई है। पहले विवाह के समय सिर्फ दुल्हन का श्रंगार ही ब्यूटी पार्लर द्वारा करवाया जाता था। ब्यूटी पार्लरों में उच्चवर्ग की महिलाएं ही जाया करती थीं लेकिन आज मध्यम और निम्नवर्गीय परिवारों की युवतियों तथा महिलाओं ने भी जाना शुरू कर दिया है। दिनोंदिन यह शौक बढ़ता ही जा रहा है, और ब्यूटी-पार्लर का धंधा धड़ल्ले से चल रहा है लेकिन इस मुद्दे पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है कि इन कृत्रिम नकली सौंदर्य प्रसाधनों का उपयोग करने का परिणाम क्या होगा।
इन ब्यूटी पार्लरों के सौंदर्य प्रसाधनों में अमोनिया, हाइड्रोजन परआक्साइड, चर्बी, ऐसीटोन, वैक्सीन, वैसलीन, जिंक, स्पिरिट, अल्कोहल, ग्रीस आदि रसायनों का प्रयोग किया जाता है। ये रसायन त्वचा के लिए हानिकारक है। चेहरे के रंग में निखार लाने के लिए ब्लीचिंग की जाती है जिसमें अमोनिया होता है जो त्वचा को जला कर कड़ी कर देता है।
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बालों को काला करने के लिए हाइड्रोजन परआक्साइड और आर्गनिज हाइड्रोकार्बन नामक रसायन इस्तेमाल किये जाते हैं। ये रसायन इतने हानिकारक होते हैं कि इनसे बाल झडऩे शुरू हो जाते हैं तथा तेजी से सफेद होने लगते हैं। लिपस्टिक में एक ऐसा रसायन होता है जिसके नियमित प्रयोग से होंठों का प्राकृतिक रंग खत्म हो जाता है तथा होंठों पर सफेद दाग उभर आते हैं।
अपने सौंदर्य की देखभाल और सुरक्षा करना अच्छा है, आवश्यक भी लेकिन यह भी बहुत आवश्यक है कि इसके लिए किये जाने वाले प्रयास भी अच्छे और निरापद हों।
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गलत ढंग से किया गया अच्छा काम भी बुरा साबित होता है। सौंदर्य बढ़ाने के लिए ब्यूटी पार्लरों में जाने की बजाय नींबू, खीरा, तुलसी, नीम, गुलाब, चिरौंजी, बादाम, दही, बेसन, दूध, हल्दी, चंदन आदि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर, त्वचा को हानि पहुंचाए बिना , युवतियां व महिलाएं अपने सौंदर्य मे चार चांद लगा सकती हैं। यदि ब्यूटी पार्लर में जाएं भी तो यह जांच कर लें कि वहां श्रृंगार प्रसाधनों के रूप में की जाने वाली सामग्री प्राकृतिक द्रव्यों से बनी है या कृत्रिम हानिकारक रसायनों से।
– उमेश कुमार साहू

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