कुत्ता वफादार ही नहीं, घातक भी

कुत्ता वफादार ही नहीं, घातक भी

आजकल कुत्ता पालना जहाँ फै़शन सा बन चुका है वहीं कुछ लोग अपने शौक या घर की देखभाल के लिए भी कुत्ता पालते हैं क्योंकि कुत्ते को सर्वाधिक वफ़ादार रक्षक समझा जाता है।
ऐसे में भले ही मानव के लिए कुत्ते की अहमियत बढ़ गयी हो लेकिन इसमें भी कोई संदेह नहीं है कि कुत्तों द्वारा फैलने वाली बीमारियों में भी वृद्धि होती जा रही है क्योंकि कुत्तों अथवा अन्य मांसाहारी जानवरों की आंत में ‘वयस्क टेपवर्म इकाट्रबॉकोकस’ पाये जाते हैं। यह वयस्क टेपवर्म लगभग 6 मीटर तक लंबे होते हैं। जब कुत्ते मल त्याग करते हैं तो ‘वयस्क टेपवर्म’ के अंडे बीजाणु बनकर बाहर आ जाते हैं और मिट्टी, पानी, सब्ज़ी अथवा भोजन द्वारा मनुष्य के द्वारा मनुष्य के शरीर में प्रविष्ट हो जाते हैं।
मानव शरीर पर क़ब्जा करते ही सर्वप्रथम आंत में पहुंचते हैं, उसके बाद रक्त नलिकाओं की सहायता से शरीर के विभिन्न अंगों लिवर, प्लीहा, फ़ेफड़ों, रक्त मज्जा अथवा मस्तिष्क आदि में पहुंचकर ‘सिस्ट’ बना देते हैं। इस सिस्ट का आकार बढ़ते-बढ़ते फुटबाल जैसा हो जाता है जिसके कारण उल्टी में खून आने जैसी क्रियाएं शुरू हो जाती हैं और प्रभावित व्यक्ति कई घातक बीमारियों का शिकार बन जाता है। यही नहीं, बल्कि इसके कारण कभी-कभी मानव ‘कोमा’ में भी जा सकता है अथवा पागल भी हो सकता है। अत: कुत्ता पालने के शौक को निम्न बातों को समझने व ध्यान में रखने के पश्चात् ही पूरा करना चाहिए-
चेहरे की खूबसूरती का राज ‘फेस मास्क’

– कुत्तों की समय-समय पर उसके चिकित्सकों से जांच अवश्य करायें तथा नियमित दवाइयां देते रहें।
– कुत्ते को गंदी व सड़ी हुई वस्तुएं तथा कच्चा मांस न खाने दें और उन्हें अन्य पालतू जानवरों का शिकार करने से रोकें।
– कुत्ते को अपने बिस्तर, रसोई तथा खाने अथवा बैठने के स्थानों पर न जाने दें।
– उन्हें नियमित स्नान कराने के पश्चात् अपने हाथों व शरीर को अच्छी तरह साफ़ करें।
– मरने के बाद उसके शव को जमीन में दफऩा दें।पति के लिये भी संवरिए..औरत को घर में रहकर ज्यादा सजना संवरना चाहिए

कुत्ते जहाँ एक ओर अच्छे रक्षक व जासूस साबित होते हैं, वहीं क्रुद्ध होने पर यदि वे काट लें तो मानव के लिए बहुत घातक सिद्ध हो सकता है। हाल ही में किये गये एक सर्वेक्षण के अनुसार देश में लगभग 30 लाख लोग प्रतिवर्ष कुत्तों के शिकार बनते हैं और 30 हजार लोग अपनी जान तक गंवा बैठते हैं।
यद्यपि, आजकल कुत्तों के काटने पर अनेक रोगमुक्त करने वाले इंजेक्शन व दवाएं निर्मित हो चुकी हैं, तथापि यदि पागल कुत्ता काट ले और पर्याप्त उपचार करने में देर हो जाये तो बहुत बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है।
….ध्यान रहे कुत्ता पालने का शौक बुरा नहीं है किंतु असावधानी के कारण यही शौक कभी-कभी बहुत घातक भी साबित हो सकता है।
– मनु भारद्वाज ‘मनु’

Share it
Top