कुछ आम बीमारियां शरीर में कब घर कर जाती हैं..पता ही नहीं चल पाता, जानें उनके लक्षण..

कुछ आम बीमारियां शरीर में कब घर कर जाती हैं..पता ही नहीं चल पाता, जानें उनके लक्षण..

neck-pain कभी कभी कुछ आम बीमारियां शरीर में कब घर कर जाती हैं, ज्यादा पता ही नहीं चल पाता।
अगर कुछ लक्षण दिखाई भी देते हैं तो हमारी लापरवाही रहते हुए हम उन लक्षणों को इग्नोर करते रहते हैं और बीमारी धीरे धीरे हम पर हावी होती चली जाती है। आइए जानें उन लक्षणों को जो हमें बीमार बना देती हैं।
हार्ट अटैक:-

हार्ट अटैक आने से पूर्व कुछ लक्षण दिखाई देते हैं, आइए जानें:-
-सांस फूलना, दम घुटना।
– थोड़ा सा भारी खाना खाने के बाद गैस बनना, बेचैनी होना।
– बिना वजह थकान होना, आराम करने पर शरीर में थकान बने रहना।
– नाभि के ऊपर कहीं भी दर्द या बेचैनी होना। यह दर्द पीठ, कंधे, जबड़े में भी हो सकता है।
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आर्थराइटिस:-
आर्थराइटिस पहले उम्रदराज लोगों को होती थी। अब यह बीमारी युवाओं को भी होने लगी है। इसका मुख्य कारण शरीर की निष्क्रि यता है। जोड़ों में दर्द बना रहता है, यह बीमारी पुरूषों से ज्यादा महिलाओं को होती है। आर्थराइटिस में जोड़ आपस में जुडऩे लगते हैं उनको हिलाने-डुलाने में दर्द का अहसास होता है।
लक्षण:-
– उंगलियों में जलन रहना।
– जोड़ों में भारीपन व दर्द होना।
– चलने फिरने में मुश्किल होना, दर्द होना।
– प्राय: बिस्तर से उठते ही शरीर के कुछ जोड़ों में अकडऩ होना, धीरे धीरे चलने फिरने पर दर्द कम होना।
– हाथ पैर, घुटने मोडऩे में तकलीफ होना।
सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस:-
यह गर्दन, पीठ, कंधों की मांसपेशियों की जकडऩ के कारण होता है। जो लोग कंप्यूटर पर अधिक देर काम करते हैं, मोबाइल पर अधिक समय बिताते हैं, ई-बुक्स पढ़ते हैं या डिजिटल प्रेजेटेंशन देते हैं, ऐसे जल्द ही इस रोग की गिरफ्त में आ जाते हैं। पीठ, कंधे और गर्दन का दर्द मुख्य इसके टारगेट हैं। उठने-बैठने, सोने के गलत पॉश्चर भी इसके जिम्मेदार हैं।
– हाथों का सुन्न होना या उनमें झनझनाहट होना।
– लगातार सिर दर्द रहना।
– पिंडलियों में क्रैंप्स या ऐंठन होना। वैसे पिंडलियों में क्रैंन्स विटामिन ई की कमी से भी हो सकता है।
– अचानक बेहोश होना।
– साइटिका का दर्द भी लंबर स्पॉन्डिलाइटिस की निशानी है।
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लगातार थकान रहना:-

कभी कभी ऐसी थकान बनी रहती है कि आराम करने पर भी ऐसा नहीं लगता कि शरीर फ्रेश हो गया है। ऐसी थकान को
क्रोनिक फैटीग सिंड्रोम कहते हैं। अगर इसका इलाज ना किया जाए तो इसका शरीर के स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रभाव होने लगता है।
– एकाग्रता में कमी।
– मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना।
– जरा सा काम करते ही थकान महसूस होना।
– पेट में गड़बड़ी बार-बार होना।
– सिरदर्द बने रहना।
– धुंधला दिखना।
– बार-बार शब्द भूलना या क्या करना है उसे भूल जाना।
खून की कमी होना:-
भारतीय महिलाओं में यह समस्या आम होती है। महिलाएं परिवार का तो पूरा ध्यान रखती हैं पर अपनी पोषकता का ध्यान नहीं करती। जो बचता है बस उसी से पेट भर लेती हैं। समय पर न खाना, गलत खान-पान उनकी लापरवाही की ये आदतें उन्हें अनीमिया का शिकार बना देती हैं।
– चलते चलते सांस फूलना और घबराहट होना।
– अनीमिया रोग अगर पुराना हो जाए तो होंठों के किनारे फटने लगते हैं । मसालेदार और नमकीन कुछ भी खाना अच्छा नहीं लगता।
– लगातार थकान बने रहना।
– किसी काम में मन ना लगना।
– मस्तिष्क में भी खून की कमी होने से अचानक बेहोश हो सकता है।
– साथ में आयरन की कमी हो जाए तो पूरा शरीर और जीभ सफेद होने लगती है।
– चेहरे का रंग पीला पडऩा और आंखें सफेद होना।
– हार्ट बीट तेज चलना।
डायबिटिज टाइप -2:-
गलत लाइफ स्टाइल से जुड़ी बीमारी है डायबिटिज ।
– इसमें गला सूखने लगता है।
– थकान महसूस होती है।
– भूख ज्यादा लगने पर भी वजन में बढ़ोत्तरी न होना।
– हाथ पैरों का सुन्न होना। सुइयां चुभने जैसा महसूस होना।
– इनमें से कोई भी लक्षण अधिक देर तक बने रहें तो डाक्टरी जांच अवश्य कराएं।
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