किशोरवय का प्यार

किशोरवय का प्यार

आजकल के किशोर समय से पूर्व ही काफी परिपक्व बातें करने लगे हैं। कारण है उनका जीवन को टीवी, फिल्म, किताबों के जरिए विस्तृत रूप से देखना, पढऩा व समझना। जो प्यार पूर्व में इस उम्र में अनजानी रासायनिक प्रक्रिया के दौरान उमंगों से भरपूर लहू में रचने-बसने लगता था, वह जानते बूझते, केलक्युलेटेड तरीकों से किया जाता है। जिस किशोर या किशोरी के विपरीत सैक्स के मित्र नहीं होते, उसे कॉलेज में बेचारा माना जाता है।
आजकल ज्यादातर लड़कियां अपने ब्वॉय फ्रैंडस, उनकी जेब, बाह्य व्यक्तित्व व हल्का-फुल्का मजाकिया स्वभाव देखकर बनाती हैं। लड़के खूबसूरती के शैदाई होते हैं। कई किशोर जोड़े यह बात मानते हैं कि वे बगैर एक-दूसरे को मन से जाने दैहिक स्तर पर जानने के लिए बेकरार हो उठते हैं जबकि परिपक्व लोग प्यार के लिए आपसी समझ व स्थिरता का होना जरूरी समझते हैं।
18 वर्षीय मनीष गोयल का मानना है, ‘पच्चीस में मुश्किल से दो-तीन जोड़े ही प्यार में ईमानदारी बरतते हैं। बाकी के लिये यह सिर्फ सुविधा का कारण है। जब वे किसी पार्टी या रेस्त्रां में जाते हैं तो बगल में चलती एक अत्याधुनिक खूबसूरत लड़की उनकी प्रतिष्ठा में चार चांद लगाती हुई केवल उनकी शान बढ़ाती है, उनका टैम्पो हाई रखती है।
ढलती उम्र में सौंदर्य सुरक्षा
यह बात और है कि प्यार में ठोकर खाई वे लड़कियां इस अनुभव से कुछ मेच्योर होने पर बाद में केवल बाहरी चकाचौंध पर ही नहीं मर मिटती बल्कि किसी लड़के को ब्वॉयफ्रैंड बनाने के पहले उसका चरित्र कैसा है, यह भी जानना चाहती हैं। यह एक अच्छी बात है कि इस उम्र में जाति धर्म के बंधन दोस्ती में आड़े नहीं आते। दोस्ती का अंजाम शादी नहीं है, यह बात भी उनके अवचेतन मन में समाई होती है।
आप भी बन सकते हैं अच्छे जीवन-साथी
आज के माहौल में दरअसल इस उम्र की दोस्ती ज्यादातर अच्छा समय बिता लेने का एक शगल मात्र है। इस उम्र में लड़के-लड़की न अपने पैरों पर खड़े होते हैं, न जीवनसाथी को लेकर उनके विचार स्पष्ट होते हैं, इसलिए एक-दूसरे को लेकर प्रतिबद्धता का सवाल ही नहीं उठता।
ज्यादातर लड़के-लड़कियां ऐसे मामलों को लेकर प्रैक्टिकल और यथार्थवादी होते हैं (आज के दौर में)। स्कूल, कॉलेज में होने वाले रोमांस अक्सर अल्पावधि तक ही चलते हैं। इसका जादू जितनी जल्दी चढ़ता है, उतनी ही जल्दी उतर भी जाता है क्योंकि फिर करियर और भविष्य बनाने जैसी अहम् बातों की प्राथमिकता सामने होती है।
किशोरवय इसीलिए प्रयोगों का समय होता है क्योंकि यही वह समय है जब अलग-अलग लड़कियों से डेटिंग कर लड़के उनके बारे में वह जानकारी हासिल करते हैं जो उन्हें परिपक्व बनाती है।
– उषा जैन ‘शीरीं’

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