कितने जरूरी हैं मेडिकल चेकअप

कितने जरूरी हैं मेडिकल चेकअप

स्वास्थ्य परीक्षणों के महत्त्व पर डाक्टरों द्वारा काफी जोर दिया जाता है। प्राय: एलोपेथिक विशेषज्ञ ब्लड टेस्ट या अन्य कई प्रकार के टेस्ट करवाए बिना दवाई लिखते ही नहीं। यह भी सर्वविदित है कि टेस्ट करने वाली लेबोरेटरी द्वारा डाक्टरों को कमीशन भी दिया जाता है ताकि वे उन्हें अधिक से अधिक मरीज भिजवाएं।
मेरी एक संबंधी वरिष्ठ डाक्टर हैं। आवश्यकता होने पर उन्होंने कुछ मरीजों को एक्सरे करवाने को कहा। अगले महीने के प्रारंभ में एक सज्जन उनके पास आए और बताया कि वे पड़ोस में स्थित एक्सरे केन्द्र से आए हैं। उन्होंने एक लिफाफा डाक्टर के सामने रख दिया। पूछे जाने पर कि यह क्या है, वे झेंप गए और अटकते हुए बता पाए कि पिछले महीने भिजवाए गए एक्सरे के मरीजों हेतु यह कमीशन है। डाक्टर को बहुत क्रोध आया और उन्होंने इस सज्जन को अपने क्लीनिक से निकल जाने को कहा और यह भी कहा कि वे भविष्य में अपने मरीजों को उनके यहां एक्सरे न करवाने को कहेंगी।
कुछ डाक्टर ऐसे हैं जो इन बातों से घृणा करते हैं किंतु अधिक संख्या उन डाक्टरों की है जो बिना हिचक एक्सरे केन्द्रों व लैब से कमीशन लेते हैं। यह तो हुई डाक्टरों की बात। मरीज भी दो प्रकार के हैं-एक वे जो डाक्टर के कहने पर ही जांच करवाना पसंद करते हैं, दूसरे वे जो डाक्टर के न कहने पर भी अपने आप अपने खून आदि की जांच करवाते रहते हैं। क्या हमारे शरीर को इतनी जांचों या फुल चेकअप या एक्जीक्यूटिव चेकअप की आवश्यकता होती है। अपोलो अस्पताल जैसे कई अस्पताल एक्जीक्यूटिव हैल्थ चेकअप के नाम पर मरीजों को दबा कर लूट रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के चेकअप से मरीजों को कोई विशेष लाभ नहीं होता। इसके बावजूद इनकी लोकप्रियता इसलिए बढ़ रही है तो इसलिए क्योंकि ये अस्पताल के लिए अंधाधुंध कमाई का स्रोत हैं।
नियमित चेकअप की बात सुनने में तो अच्छी लगती है क्योंकि परहेज को इलाज से बेहतर माना गया है किंतु विशेषज्ञों के अनुसार बहुत बार इन टेस्टों से हानि भी हो सकती है क्योंकि मरीज को कोई बीमारी न होने पर भी किसी टेस्ट का पॉजिटिव रिजल्ट आ जाता है तो मरीज अत्यधिक तनाव, मेडिकल जांच और दवाइयों के दुष्चक्र में से गुजरता है। अमरीकी डाक्टरों की संस्था यू. एस. प्रिवेंटिव सर्विसिज टास्क फोर्स तो यहां तक कहती है कि जितना समय डाक्टर मरीजों के ब्लड टेस्ट, छाती के एक्सरे और ई. सी. जी. देखने में लगाते हैं उतने समय में मरीजों को धूम्रपान, व्यायाम न करना और गलत जीवन शैलियों की हानियों के बारे में बताएं तो ज्यादा अच्छा होगा। इस संस्था के अनुसार केवल निम्न रूटीन टेस्ट ही करवाए जाने चाहिए।
छात्रों के लिए घातक है लापरवाही

– सब वयस्क पुरूषों व स्त्रियों के लिए समय-समय पर रक्तचाप नपवाना क्योंकि उच्च रक्तचाप से हृदय रोग, स्ट्रोक, गुर्दों की बीमारियां और दिल का दौरा हो सकता है।
– 35 से 65 वर्ष के पुरूषों और 45 से 65 वर्ष की स्त्रियों के लिए खून में कोलेस्ट्राल की मात्र की जांच क्योंकि खून में कोलेस्ट्राल अधिक होने पर हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है।
– 50 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों में समय-समय पर मल में रक्त की उपस्थिति हेतु जांच क्योंकि मल में रक्त पेट के कैंसर को दर्शा सकता है।
– 50 से 69 वर्ष की स्त्रियों को एक वर्ष में एक दो बार स्तनों का मैमोग्राम कराना चाहिए ताकि ब्रेस्ट कैंसर के विषय में समय पर पता चल सके।
– यौनिक दृष्टि से सक्रिय महिलाओं में हर तीन वर्ष में एक बार गर्भाशय कैंसर की जांच हेतु पैप स्मीयर टेस्ट।
– बच्चों व बड़ों हेतु आंखों की परीक्षा।
– वृद्ध लोगों की श्रवण शक्ति की जांच।
उक्त संस्था के अनुसार शेष मेडिकल जांचों का विशेष महत्त्व नहीं है क्योंकि उनसे स्वास्थ्य व आयु वृद्धि में कोई लाभ नहीं होता। संस्था रक्त में शर्करा व थायरायड, ग्लूकोमा की जांच हेतु आंखों में दबाव का माप और हड्डियों के घनत्व की जांच के विषय में अभी किसी निर्णय पर नहीं पहुंच पायी है।
कुछ विशेषज्ञों में इस बात पर मतभेद है कि मैमोग्राम्स 40 वर्ष की आयु में प्रारंभ हों या 50 वर्ष में क्योंकि कम उम्र की महिलाओं में गलत रिपोर्ट आने की संभावना रहती है। एक बार गलत रिपोर्ट आने से कैंसर न होने पर भी महिला को अत्यधिक चिंता या बायोप्सी को भुगतना पड़ेगा।
बाल कथा : अच्छी बुरी संगति

प्रोस्टेट कैंसर की जांच के लिए पी. एस. ए. टेस्ट किया जाता है किंतु पी. एस. ए. का स्तर अधिक होना सदा प्रोस्टेट कैंसर का परिचायक नहीं होता और गलत रिपोर्ट आ जाने पर मरीज को बायोप्सी और प्रोस्टेट का आपरेशन करवाना पड़ सकता है। संस्था के अनुसार डाक्टरों को अपने मरीजों की जीवन शैली बदलने पर अधिक जोर देना चाहिए। मेडिकल जांच का सर्वाधिक लाभ उठाने हेतु निम्न बातों की ओर ध्यान दें।
– 40 वर्ष आयु तक हर वर्ष नियमित जांच की आवश्यकता नहीं होती। जिन्हें कोई बीमारी न हो, वे 5 वर्ष के अंतराल पर जांच करवा सकते हैं।
– जब आप जांच हेतु जाएं तो अपने सभी पुराने रिकार्ड साथ ले जाएं और यदि आपके परिवार में किसी को उस तरह की बीमारी हो तो उसकी जानकारी भी डाक्टर को दें।
– रूटीन जांच में छाती का एक्सरे, ई सी जी और रक्त की रूटीन जांचें ही करवाएं। यह न समझें कि जितनी जांच हो जाए, अच्छा है। साधारण जांच में डाक्टर को आपकी ऊंचाई, वजऩ, पल्स, रक्तचाप, कोलेस्ट्राल हेतु रक्त जांच और पेट के कैंसर हेतु जांच करनी चाहिए। महिलाओं के लिए इसके अतिरिक्त पैप स्मीयर टैस्ट और ब्रेस्ट कैंसर हेतु जांच होनी चाहिए। यही आपके स्वास्थ्य के लिए काफी है।
– अशोक गुप्त

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