कालसर्प योग दोष ही नहीं, अपितु फलदायी भी

कालसर्प योग दोष ही नहीं, अपितु फलदायी भी

Sanjay Saxenaमनुष्य की जन्म कुण्डली में कालसर्प योग दोष अभी कुछ ही वर्षों से बताया जा रहा है, इस योग का वर्णन किसी वेद या पुराणों में नहीं है, फिर भी नई खोज करके इसे भयावह रूप से शामिल किया गया है। 12 प्रकार का कालसर्प योग दोष मुख्य रूप से प्रचलित है। जन्मकुण्डली में सभी ग्रह राहु और केतु की एक ही बाजु में स्थित हो, तो ऐसी गृहस्थिति को ‘कालसर्प योग’ कहते है। देखने में आया है कि जिस कुण्डली में कालसर्प दोष योग पाया जाता है, उसमें सन्तान अवरोध, घर में गृहस्थ जीवन में कलह, कठोर परिश्रम का फल न मिलना, धन के लिये तरसना, शारीरिक हीनता एवं मानसिक दुर्बलता के कारण निराशा की भावना जागृत होना पाया जाता है, यानि की जीवन में किसी भी एक चीज का वियोग भी झेलना पडता है। मुख्य रूप से 12 प्रकार के कालसर्प योग है। 1. अनन्त कालसर्प योग, 2. कुलिक कालसर्प योग, 3. वासुकी कालसर्प योग, 4. शंखपाल कालसर्प योग, 5. पदम कालसर्प योग, 6. महापदम कालसर्प योग, 7. तक्षक कालसर्प योग, 8. कर्कोटक कालसर्प योग, 9. शंखनाद कालसर्प योग, 10. पातक कालसर्प योग, 11. विषाक्त कालसर्प योग, 12. शेषनाग कालसर्प योग है।कालसर्प योग स्वतंत्र भारत की कुण्डली में भी विद्यमान है व जो देश के महान व्यक्ति हुए है, उनकी कुण्डली में भी कालसर्प योग विद्यमान है।
जैसे मधुर एवं जादूभरी आवाज की ज्ञान सम्राज्ञी लता मंगेशकर, आचार्य रजनीश, रामकथा वाचक श्री मुरारीबापू, भूतपूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई, श्री चन्द्रशेखर, भारत के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू भी कालसर्प योग दोष से पीडित थे। कालसर्प योग दोष से व्यक्ति उचाईयों पर पहुंचकर भी किसी न किसी चीज का वियोग झेलता है, इसलिए आप भय न करके, इसका उपाय करे।
-:शिवरात्रि पर विशेष पूजा:-
श्रावण मास भगवान शिव की पूजा का महीना माना गया है। देवो के देव महादेव अतिशीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता हैं। भगवान शंकर के समान कोई दानी नहीं है। शिवरात्रि को प्रातःकाल शिवालय में जाकर गंगाजल, दूध्, दही, घी, शहद, शक्कर आदि दोनों हाथों से मलकर शिवपिण्डी का मंजन करें। दीपक, धूप, वस्त्र, यज्ञोपवित, गंध, चन्दन, भस्म, कुमकुम, बेलपत्र, भांग के पत्ते, शमीपत्र, मंदार, आक के पुष्प, धतूरा, कमलगट्टा चढायें।
शिवरात्रि के आसान उपाय
पंचामृत स्नान से आरोग्य, सौभाग्य व गृहशान्ति प्राप्त होती है।
6 फलों के रस से अभिषेक करने से सुख-सम्पन्नता, व्यापार में वृद्धि प्राप्त होती है।
खाण्ड के जल से रूद्राभिषेक करने से व्यापार में तरक्की, लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
सरसो के तेल व नीम के रस से अभिषेक करने से शत्रु का दमन होता है।
देशी घी से अभिषेक करने से संतान की प्राप्ति होती है।
अविवाहित कन्याओं के विवाह में विलम्ब दूर करने के लिये शिवालय में दीपक जलाकर ‘ऊँ उमापतये नमः’ मंत्र पढें।
अविवाहित लडको के विवाह में विलम्ब दूर करने के लिये शिवालय में दीपक जलाकर ‘ऊँ गौरीपतये नमः’ मंत्र पढें।
धन प्राप्ति के लिये आठ माला शिवलिंग के सामने पढें। ऊँ नमः शिवाय धन देहि।
शत्रुनाश के लिये ऊँ नमः शिवाय शत्रुम् नाश्य मंत्र का जाप करें।
भोलेनाथ पर रखें यकीन, अगर कोई है वहम, तो करें उपाय

कालसर्प योग दोष का निराकरण रविवार, शनिवार, अमावस्या, नागपंचमी एवं शिवरात्रि के दिन सायंकाल ‘गोधुली बेला’ में होता है। गंगा जी के किनारे स्नान करके आसन पर बैठे, नागदेवता की प्रतिमा या नाग-नागिन का जोड़ा, नीले कपडे पर सवा किलो सात अनाज, दोने में फूलों का आसन देकर स्थापित करें, जौं के आटे में घी का दीपक जलायें, 4 नारियल सामने रखे, नीले फूल, फल, जौं, काले तिल, पताशे चढायें एवं नाग-नागिन के जोडे़ एवं चारों नारियल को सवा किलो दूध से स्नान करायें। धूप, दीप, अगरबत्ती जलाये। आप सर्वप्रथम संकल्प लें कि यह दोष दूर हो और उत्तम फल प्राप्त हो।
मन्त्र जाप विधिपूर्वक करें!
ओम गं. गणपतये नमः
ओम नमः शिवाय
ओम भ्रां भ्रीं भ्रौ सः राहुवे नमः
ओम स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमः
ओम गंगे पतित पावनी गंगे नमः
महामृत्युन्जय मंत्र
नाग गायत्री ऊँ नवकुल नागाय विघन्यै विषदन्ताय धीमहि तन्नो सर्पः प्रचोदयात्।। उपरोक्त मंत्रों की 1-1 माला करें।
मंत्र पढने के बाद कपूर से भगवान शिव की आरती करें।
आरती के तत्पश्चात सभी सामान एक-एक करके चलते जल में प्रवाह करें। नाग-नागिन दोने में फूलों के उपर सजाकर चलते जल में प्रवाह करें। फिर यह कहें, हें गंगे मैया मैं अपनी कुण्डली में विराजमान कालसर्प योग दोष दूर करने का उपाय करने आया हूं, मेरी पूजा स्वीकार करके मुझे इस दोष से मुक्ति दिलाओं व मुझे उत्तम फल प्रदान करो। आप तो सभी संकटों को तारने वाली हो। आखिरी में आप हाथ जोडकर ब्राह्मण को भोजन करायें व दक्षिणा देकर चरण स्पर्श करें।
शिवरात्रि व नागपंचमी पर कालसर्प योग दोष के आसान उपाय
1. शिवपूजन प्रतिदिन करें एवं सोमवार के दिन शंकर भगवान का अभिषेक करें! लघुरूद्र, महारूद्र का पाठ पढें,उत्तम रहेगा।
2. चांदी की नाग प्रतिमा का रोजाना अभिषेक करें, जल प्रतिदिन ग्रहण करें।
3. ऊँ नमः शिवाय पंचाक्षर मंत्र का जाप रोजाना एक माला करें।
4. नवनाग ‘स्त्रोत’ प्रतिदिन 9 बार पढें एवं मोर पंख अपने बैडरूम में लगाये।
5. राहु-केतु का दान बुधवार, अमावस्या को करें, क्योंकि राहु-केतु ग्रह के कारण ही कालसर्प योग दोष उत्पन्न होता है।
6. नाग देवता की चांदी की अंगूठी मध्यमा अंगुली में सोमवार के दिन धारण करें।
7. शिवलिंग पर तांबे का सर्प विधिपूर्वक चढायें।
8. लोहे, तांबे व चांदी के सर्प जोडे को नारियल में कलावे से बांधकर पूजन करके जल में प्रवाह करें।
9. नाग पंचमी के दिन शिव पूजा व नाग पूजा करें।
10. घर के पूजाघर में रूद्राष्टकं का पाठ उच्च स्वर में पढे।
11. गंगाघाट पर पार्थिव शिवलिंग बनाकर रूद्राभिषेक व नाग पूजा करायें एवं खोटे सिक्के गंगाजी में प्रवाहित करें।
12. कालसर्प योग दोष निवारण यंत्र अपने पूजाघर में लगाये व नाग गायत्री पढें।
13. महाशिवरात्रि व नागपंचमी पर्व पर नाग गायत्री 108 बार पढकर नाग-नागिन का जोडा शिवपिण्डी पर पूजन करके चढाये।
नाग गायत्री मंत्र- ऊँ नवकुल नागाय विघन्यै विषदन्ताय धीमहि,
तन्नोः सर्पः प्रचोदयात्।। रूद्राक्ष की माला से जाप करें।
नोटः- उपरोक्त उपायों में से अपनी सुविधा व सामर्थ्य अनुसार कोई भी एक उपाय करें।-संजय सक्सैनाहस्तरेखा विशेषज्ञ
शिवालिक राशि रत्न व रूद्राक्ष केन्द्र मो.नं.- 9837400222

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