कांवड़ यात्रा को लेकर बरती जा रही उदासीनता...रास्ते में ट्रांसफार्मरों की नहीं हो सकी बेरीकैटिंग

कांवड़ यात्रा को लेकर बरती जा रही उदासीनता...रास्ते में ट्रांसफार्मरों की नहीं हो सकी बेरीकैटिंग

मुजफ्फरनगर। वर्तमान समय कांवड़ यात्रा का है। यह यात्रा कुछ ही घंटों में प्रारंभ होने वाली है। अर्थात नौ जुलाई की रात्रि से यह यात्रा प्रारंभ हो जाएगी। वैसे तो कुछ दूर के कांवडियों ने तो अपनी यात्रा प्रारंभ भी कर दी है। कांवड़ यात्रा को लेकर जिला प्रशासन गंभीर नजर आ रहा है। उसने बैठक कर संबंधित विभागों के अधिकारियों को इस संबंध में आगाह भी कर दिया था, लेकिन वह इसके प्रति गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। कांवड़ यात्रा को विधिवत् प्रारंभ होने में कुछ ही घंटे शेष हैं, लेकिन अभी तक संबंधित मार्ग के न तो गड्ढे भरे गये हैं, न मार्ग के दोनो ओर खड़े भांग के पेड़ ही काटे गये हैं, न विद्युत के लटक रहे जर्जर तारों को बदला गया है, न ही सड़क पर रखे गये ट्रांसफार्मरों की घेराबंदी की गयी, न ही सड़क पर बेरी केटिंग की गयी। विभागों की इस प्रकार की उदासीनता भारी पड़ सकती है।

ग्राम सिसौना से लेकर जिला चिकित्सालय तक का मार्ग कांवड यात्रा का मुख्य मार्ग है। इस मार्ग से लगभग तीन करोड़ से अधिक कांवडिया गुजरेंगे गंगाजल लेकर। जिला प्रशासन ने हाल ही में सभी विभागों की, जो इस कांवड़ यात्रा से संबंधित हैं, बैठक ली थी। बैठक में कांवड यात्रा को लेकर पूरी व्यवस्था करने को कहा गया था, ताकि शिवभक्तों को किसी प्रकार की यात्रा में असुविधा न हो। कांवड यात्रा प्रारंभ होने में कुछ ही घंटे शेष हैं। नगर पालिका की ओर से कांवड मार्ग पर बेरी केटिंग को लेकर ठेका छोडा जाता है, जो कि आज छोडा गया, जबकि इससे पहले यह काम हो जाना चाहिए था, ताकि समय रहते बेरी केटिंग का कार्य पूरा हो जाता है।

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इसमें पूरी तरह से उदासीनता बरती गयी। इस संबंध में पालिका के कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी डा. रविंद्र सिंह राठी का कहना था कि यह कार्य शीघ्र ही पूरा करा दिया जाएगा समय रहते। वहीं दूसरी ओर सबसे अधिक उदासीनतापूर्ण रवैया विद्युत विभाग का है। उसने अभी तक मार्ग पर नगर में खुले में रखे गये ट्रांसफार्मरों की घेराबंदी नहीं की है। एक दो स्थानों पर नगर के बाहर देखने को मिली, लेकिन वह केवल खानापूर्ति भर नजर आयी। इसमें चार-पांच बल्लियां लगा उसे कवर किया गया है। जिसमें से इंसान तो दूर की बात है बड़ा जानवर गाय-भैंस आदि भी निकल जाए। यह ट्रांसपफार्मर व विद्युत पोलों की घेराबंदी किस काम की है। जो बल्लियां लगायी गयी हैं, उनमें फासला भी कई पुफट का है। होना तो यह चाहिए कि पिछले सालों की की भांति जालीनुमा घेराबंदी की जाए, जिसमें से इंसान तो क्या उसका हाथ भी नहीं निकल पाता। इस प्रकार की घेराबंदी से किसी प्रकार की अनहोनी की आशंका ना के बराकर रह जाती है, लेकिन विद्युत विभाग की ओर से की जा रही घेराबंदी जो कुछ स्थानों पर देखने को मिली, उससे किसी भी समय अनहोनी की आशंका बनी रहेगी। कांवड मार्ग पर मदनी चौक से आगे बझेडी फाटक के मध्य लटके विद्युत के तार आसानी से देखे जा सकते हैं। साथ ही यहां पर सड़क पर फैला गंदा पानी व कीचड़ भी किसी अनहोनी को दावत दे सकता है।

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क्या इस गंदे व कीचड से होकर शिवभक्त गुजरंेगे। इसके साथ ही नगर में अंसारी रोड पर भी एलआईसी के पास ट्रांसफार्मर व नंगे तार तथा बीएसएनएल सरवट गेट पर रखे ट्रांसफार्मर व उसके नंगे तार किसी भी समय अनहोनी को जन्म दे सकते हैं। जब इस बारे में नगर के अधिशासी अभियंता केपी पुरी से वार्ता करने की कोशिश की गयी, तो उनका फोन बंद मिला। विद्युत विभाग शायद किसी बड़े हादसे की प्रतीक्षा कर रहा है। इस मार्ग पर उगे भांग के पेड़ भी आसानी से देखे जा सकते हैं। जिन्हे काफी समय पहले काटा जाना चाहिए था।

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