कांग्रेस के पास नीति और विचारधारा नहीं होने से आशय

कांग्रेस के पास नीति और विचारधारा नहीं होने से आशय

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अपने रायपुर दौरे में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी की न ही कोई नीति है न ही कोई विचारधारा है। अब आमजन समझ नहीं पा रहा है कि आखिर आजादी से पहले की पार्टी कांग्रेस बिना नीति और विचारधारा के इतने वर्षों तक सत्ता कैसे संभाल रही थी? अत:जिसने भी शाह की बात सुनी उसे लगा कि यह तो शोध का विषय है कि आखिर बिना नीति और विचारधारा वाली पार्टी जब सरकार में रह सकती है तो फिर भाजपा को नीति और विचारधारा में रहते हुए भी इतने वर्षों तक क्योंकर इंतजार करना पड़ा। कहीं कोई गलती जरूर हो रही है जिस पर किसी का ध्यान नहीं गया है और अगर वह सही हो गई तो ऐसा न हो कि जनता खुद कांग्रेस की नीति और विचारधारा बनाने आगे आ जाए! क्योंकि जिस पार्टी को स्वयं महात्मा गांधी ने खत्म नहीं किया उसे किसी और को खत्म करने का अवसर कैसे दिया जा सकता है!
-पार्टी नेताओं से घिरे शिवराज
यहां किसानों का आंदोलन हिंसात्मक हुआ वहां पुलिस की गोली से 7 किसानों की मौत हो गई। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अनिश्चितकालीन उपवास करने भोपाल के भेल दशहरा मैदान को चुना और लाव-लश्कर के साथ उपवास पर बैठ गए। दरअसल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री चौहान का मानना था कि वो खुले मैदान में बैठकर आमकिसानों की बात सुन सकेंगे और जो खामियां रह गईं हैं उन्हें दूर कर सकेंगे, लेकिन यहां भी मुख्यमंत्री पार्टी नेताओं से ही घिरे नजर आए। दूर-दराज से भी जो आए वो किसान नहीं बल्कि पार्टी के नेता ही रहे जिनके वाहनों में उनके पदों का विवरण साफ मिल रहा था। इस प्रकार एक बार फिर अपनों ने ही शिवराज की योजना को फेल करने का इंतजाम कर दिया।
-शिवसेना दे रही है किसान आंदोलन को हवा!
महाराष्ट्र में भाजपा सरकार की सहयोगी शिवसेना अब किसान आंदोलन को हवा देने का काम कर रही है। दरअसल शिवसेना ने भाजपा सरकार से कहा है कि यदि वह राज्य में मध्यावधि चुनाव से बचना चाहती है तो किसानों का कर्ज पूरी तरह माफ करने की घोषणा करे। शिवसेना का यह सख्त रुख उस समय सामने आया जबकि देवेंद्र फडणवीस सरकार किसानों के प्रदर्शन के कारण आलोचनाओं से बुरी तरह घिर गई। इसलिए कयास लगाए जा रहे हैं कि समय पूर्व चुनाव कराने की दिशा में भी महाराष्ट्र सरकार विचार कर रही है। महाराष्ट्र में भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए सरकार अक्टूबर 2014 में बनी थी. यूं तो फडणवीस ने किसानों के प्रदर्शन के बीच छोटे और सीमांत किसानों के लिए कर्ज माफी का ऐलान किया था. फिर भी शिवसेना किसानों का कर्ज पूरी तरह माफ करने की मांग करते हुए किसान आंदोलन को जिंदा रखना चाहती है।
-जज भी चाहते हैं कि गाय हो राष्ट्रीय पशु घोषित
हैदराबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस बी शिवा शंकर राव का कहना है कि गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा मिलना ही चाहिए। जस्टिस शंकर राव का मानना है कि गाय मां और भगवान की जगह पर है अतध् उसे राष्ट्रीय पशु घोषित कर देना चाहिए। गौरतलब है कि इससे पहले राजस्थान हाई कोर्ट ने भी गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देने की बात कही थी। इस प्रकार विभिन्न स्तर पर यह बात उठ रही है कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर देना चाहिए, इससे दो समस्याएं अपने आप ही समाप्त हो जाएंगी। एक तो गाय को काटने और खाने का मसला हल हो जाएगा और दूसरा उसे संरक्षण मिलेगा तो दूध भी बहुतायत में होगा और देश में दूध का कारोबार अधिक होगा तो अन्य देशों में भी निर्यात किया जा सकेगा। इसलिए गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की वकालत बहुतायत में की जा रही है।  

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