कहीं हड्डियों की परेशानी के लिए खर्राटे तो जिम्मेदार नहीं

कहीं हड्डियों की परेशानी के लिए खर्राटे तो जिम्मेदार नहीं

पहले खर्राटों को गहरी नींद की निशानी माना जाता था पर विशेषज्ञों ने इस पर खूब स्टडी की तो पता चला खर्राटे गहरी नींद की निशानी न होकर कई बीमारियों को इंगित करते है। एक रिसर्च के अनुसार भारत में खर्राटे लेने वालों की संख्या भी कुछ कम नहीं है। 20 से 50 वर्ष के लोगों को इस बीमारी की संभावना अधिक होती है।
तेज खर्राटे आपकी अपनी नींद भी उड़ा सकते हैं, आपकी हड्डियों की समस्या को भी दुगना करते हैं। हार्ट प्राब्लम भी खर्राटों से हो सकती है। रयूमेटाइड आर्थराइटिस महिलाओं पर ज्यादा प्रभाव डालती है पुरूषों की अपेक्षा। इससे जोड़ों का लचीलापन कम होता है और हड्डियों की ताकत भी जोड़ ढीले पडऩे लगते हैं।
लक्षण:-
शुरूआत में थकान, भूख न लगना, कमजोरी महसूस होना आम लक्षण हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जागरूकता की कमी के कारण धीरे धीरे परेशानी बढऩे लगती है और कुछ समय के बाद तकलीफदेह हो जाती है और संभावना मुश्किल हो जाता है।
छात्रों के लिए घातक है लापरवाही

हमारे भारत वर्ष में रयूमेटाइड आर्थराइटिस के रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हमारे शरीर में कई हानिकारक कैमिकल्स बनते हैं जिनके कारण जोड़ों में पाया जाने वाला तरल सूखने लगता है। इससे प्रभावित स्थान के आसपास त्वचा लाल हो जाती है, गर्म हो जाती है और साथ ही असहनीय दर्द होने लगता है।
ऐसे लक्षण दिखने पर समय पर डाक्टरी जांच कराएं ताकि शुरूआत में इसे संभाल लिया जाए। रोग के आगे बढऩे पर बहुत परेशानियों का सामना पड़ सकता है और कई बार डाक्टरी सर्जरी करवाने की सलाह देते हैं।
बाल कथा : अच्छी बुरी संगति

अगर खर्राटे छोटी उम्र में आने लगे तो डाक्टरी जांच करवाएं कुछ प्राणायाम कर श्वांस नली को साफ रखें। उज्जयी प्राणायाम खर्राटे रोकने में मदद करता हे। किसी विशेषज्ञ से प्राणायाम करना सीखें। जोड़ों की सूक्ष्म क्रियाएं नियमित करें ताकि जोड़ सक्रिय बने रहें।
– नीतू गुप्ता

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