ध्यान रखे…..कहीं गायब न हो जाए दुपट्टा…!

ध्यान रखे…..कहीं गायब न हो जाए दुपट्टा…!

7निरंतर सफलता की ऊंचाइयों को छू रही है 21वीं सदी की नारी लेकिन इन गगनचुंबी ऊंचाइयों के साथ-साथ उसके चरित्र का ह्नास भी जारी है। पाश्चात्य संस्कृति की अंधी दौड़ में नारी ने खुद को शामिल कर लिया है। उसके लिबास पर इसकी छाया सबसे गहरी हुई है। कपड़े तो कमतर हुए ही, शालीनता की चादर माना जाने वाला दुपट्टा फैशन की दौड़ में सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ।
वह जमाना और था जब किसी जवान लड़की के कंधों से दुपट्टा या नवविवाहिता लड़की के सीने से आंचल का सरक जाना युवा के मन के भीतर उत्तेजना की लहर फैला दिया करता था और लड़कियां मारे शर्म के अपने आप में गड़ जाया करती थी लेकिन यह जमाना युवाओं का है। उनका अपना स्टाइल है और इस स्टाइल में ढलने के लिए काफी हद तक उन्हें-कांटा लगा-टाइप स्टाइल को अपनाना पड़ता है।
महज दो दशकों के दरम्यान ही साल-दर-साल कंधों से सरकता हुआ दुपट्टा या आंचल पूरी तरह से गायब होने की स्थिति में पहुंच गया है। अमूमन लड़कियों के गले में दुपट्टा है ही नहीं और है भी तो दांयें या बायें किसी एक ही हिस्से के कंधे पर झूलता हुआ अपनी दुर्दशा पर शर्मसार है। जिस अंग को ढंकने के लिए उसे बनाया गया था, अब उसका प्रदर्शन करना आधुनिकता और फैशन की पहली मांग बन गया है।
बदलते जमाने की तेज आंधी के बीच आने वाले दिनों में दुपट्टा गायब होकर अतीत की चीज बन जाये तो कोई आश्चर्य नहीं। फिल्म और रैंप पर तो दुपट्टा गायब हुआ ही, यह बात तो मध्यमवर्ग में भी पैठ कर चुकी है। शादी और पार्टियों में इस वर्ग की लड़कियां अपने दुपट्टे को अपने नियत स्थान पर रखे तो कतई नजर नहीं आती।
आकर्षण का महत्त्व है चाहे इसके लिए कितना भी भद्दा तरीका क्यों न अख्तियार किया जाए। दो दशक पहले तक निम्न मध्वर्गीय लड़कियों का पहनावा सलवार-कमीज तक ही सीमित था पर अब सलवार कुर्ता पहनने पर भी दुपट्टों का प्रयोग इस प्रकार किया जाता है गोया उसे कंधे पर रखना हो। उससे कुछ ढंका नहीं, सिर्फ कंधे पर रखा भर जाता है। कुछ लड़कियां इसे मफलर की तरह भी गले में लपेट लेती हैं।
एक वो समय था जब द्रौपदी के चीरहरण के कारण महाभारत जैसा विनाशकारी युद्ध हो गया पर आज के आधुनिक परिवेश को क्या कहें। यहां किसी दुशासन के चीरहरण करने की जरूरत ही नहीं। आज की द्रौपदियां तो खुद ही अपना चीहरण करवाने को तैयार हैं।
दरअसल लड़कियां आज जिस तरह के सलवार कमीज पहन रही हैं, व बैकलेस और स्लीवलेस हो रहे हैं गले के पास भी उनका आकार गहरा हो रहा है। ऐसे में उनकी यह सोच भी काम करती है कि दुपट्टा डाल लिया तो स्लीवलेस और बैकलेस ड्रेस के मायने ही खत्म हो जाएंगे।
-अरशी निजाम

Share it
Top