कहीं आप एनोरेक्सिया के शिकार तो नहीं?

कहीं आप एनोरेक्सिया के शिकार तो नहीं?

अपने को स्लिम व ट्रिम दिखाने के लिए युवतियों व महिलाओं में होड़ सी लग गई है। छरहरे बदन के लिए महिलाएं व युवतियां बिना सोचे समझे डायटिंग करने लगती हैं। यद्यपि इनमें से ज्यादातर महिलाएं मोटी नहीं होती लेकिन उन्हें वजन अधिक होने की गलतफहमी हो जाती है।
वजन घटाने के लिए वे कम खाने लगती हैं जिस के कारण उनका वजन बहुत कम हो जाता है और वे एनोरेक्सिया का शिकार हो जाती हैं। एनोरेक्सिया को अनदेखी करने से गंभीर परिणाम भुगतना पड़ सकता है। वजन बहुत अधिक गिरने से पहले ही इलाज शुरू कर दिया जाए तो रोगी के ठीक होने की संभावना अधिक होती है।
प्रसिद्ध मेडिकल जर्नल लैंसेट के नवीनतम अंक में एक शोध रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। इस शोध रिपोर्ट के अनुसार 21 वर्ष की 84 एनोरेक्सिया से ग्रसित महिलाओं पर अध्ययन किया गया था। इन महिलाओं का वजन बहुत अधिक गिर गया था। वे काफी लंबे समय से एनोरेक्सिया की शिकार थी। इलाज के बावजूद भी वे ठीक नहीं हो पाई।
इस शोध में शामिल लंदन के होडेलवर्ग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक डा. स्टीफेल जीफेल के अनुसार शोध में शामिल एनोरेक्सिया के रोगियों में से कुछ रोगी तो पूरी तरह ठीक हो चुके हैं जबकि कुछ रोगी 50 प्रतिशत ही स्वस्थ हुए हैं। 90 प्रतिशत रोगी इलाज शुरू होने के बाद करीब 20 वर्ष से जीवित हैं। अभी भी 10 प्रतिशत रोगी एनोरेक्सिया से पीडि़त हैं जबकि इस बीमारी के लक्षण वाले 16 प्रतिशत रोगी मौत का शिकार हो चुके हैं।
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डा. जीफेल तथा उनके सहयोगियों ने अध्ययन के दौरान पाया कि जो महिला इलाज के दिनों में अपने आहार पर नियंत्रण नहीं रखती, उनके इलाज के दौरान नियंत्रित आहार लेने वाली महिलाओं की तुलना में ठीक होने की संभावना ज्यादा होती है। एक अन्य अध्ययन में चिकित्सकों का कहना है कि इलाज के दौरान चिकित्सकों का उद्देश्य कुछ सामाजिक और मानसिक लक्षणों के साथ रोगी का निर्धारित वजन बढ़ाना भी होता है।
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एक अनुमान के अनुसार विश्व में करीब 70 प्रतिशत महिलाएं तथा 10 पुरूष या तो एनोरेक्सिया या बुलीमिया का शिकार हैं। इनमें से करीब 50 प्रतिशत रोगियों के ठीक हो जाने की संभावना है तथा 6 प्रतिशत रोगियों के मर जाने की आशंका है।
– राजा तालुकदार

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