कहानी- मैं विवाह नहीं करूंगी.. मेरा दूल्हा तो मेरे खिलौने हैं

कहानी- मैं विवाह नहीं करूंगी.. मेरा दूल्हा तो मेरे खिलौने हैं

rajkumariचंपा राजकुमारी खिलौनों की शौकीन थी। जब-तब वह खिलौने मंगवाती, उनसे खेलकर दिल बहलाती, फिर उन्हें सजा देती। उसके खिलौनों से सारा महल सज गया था। बचपन में राजा-रानी उसके द्वारा खिलौनों की जिद करने पर खिलौने मंगवा देते। और बेटी को खुश देखकर वे बहुत खुश होते। वे उसकी हर जिद पूरी करते। इससे चंपा बहुत जिद्दी हो गई थी। धीरे-धीरे चंपा की खिलौनों की मांग बढ़ती गई। राजा-रानी उसकी मांग इसलिए पूरी कर देते कि समझदार होने पर खिलौनों का शौक अपने आप ही खत्म हो जाएगा पर जैसे-जैसे चंपा बड़ी होती गई, खिलौनों का शौक भी बढ़ता ही गया। राजा-रानी उसे समझाते और कहते- अब तुम्हारी उम्र खिलौनों से खेलने की नहीं है। तुम्हें एक दिन दूसरे घर जाना है। उनकी बात सुन वह मुंह बिगाड़ती और कहती- मैं विवाह हर्गिज नहीं करूंगी। मेरा दूल्हा तो मेरे खिलौने हैं। मैंने इनसे विवाह कर लिया है। उसकी इस तरह की बातें सुन राजा-रानी कुछ कह नहीं पाते। रोज सुबह उठने के पश्चात नित्यकर्म और नहा-धोकर तैयार होने के पश्चात चंपा अपने खिलौनों को एक जगह से उठाकर दूसरी जगह रखती। दिनभर वह ऐसे ही करती। राजा-रानी बहुत चिंतित थे, क्योंकि उनसे चंपा के विवाह के बारे में सभी पूछते पर वे चंपा के खिलौनों वाले शौक के कारण कहीं भी विवाह की बात करने में हिचकिचाते थे कहीं चंपा का हमने रिश्ता तय कर दिया और चंपा ने इन्कार कर दिया तो सभी ओर हमारी बदनामी होगी और लोग ताने देकर कहेंगे कि बेटी की इच्छा के विरुद्ध माता-पिता जबरदस्ती उसका विवाह कर रहे हैं। सौतेले माता-पिता भी ऐसा नहीं करते। रात में भी राजा-रानी को चिंता के मारे नींद नहीं आती थी।
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पड़ोस के राजा सुमंत सिंह राजा के दोस्त थे। एक दिन वे अपने बेटे चंदर सिंह को लेकर उनसे मिलने आए। राजा-रानी ने उनका स्वागत-सत्कार किया। भोजन-पानी होने के पश्चात राजा उन्हें महल दिखाने लगे। सभी ओर खिलौने देखकर सुमंतसिंह और चंदर सिंह खुश हो रहे थे। चंदरसिंह ने तो यहां तक कहा- वाह राजा साहब! बहुत खूब, खिलौनों को महल में इतनी अच्छी तरह सजाया है कि महल की शान में चार चांद लग गए। राजा बोले- यह काम मेरा नहीं मेरी बेटी चंपा का है। उसे खिलौनों का बचपन से ही शौक रहा है। और उसके कारण ही आज सारा महल खिलौनों से सजा हुआ है। चंदर सिंह राजा से बोले- अपनी बेटी से मुझे मिलवाएंगे। राजा उन्हें चंपा के कमरे में लेकर आए। वह कमरे में खिलौने सजा रही थी। उन्हें देख वह बाहर जाने लगी। राजा द्वारा सारी बात बतलाने पर उसने सुमंत सिंह और चंदर सिंह को नमस्कार किया। फिर राजा बहाने से चंदर सिंह को उसके पास छोड़कर सुमंत सिंह को अपने साथ ले गए। बहुत देर तक चंदर सिंह के नहीं आने पर महल में काम करने वाले आदमी को सारी बात बतलाकर सुमंत सिंह ने बुलाने भेजा। वह आदमी कमरे में आया और चंदर सिंह से बोला- आपको राजा साहब ने बुलवाया है। चंदर सिंह, चंपा के कमरे से चला गया। फिर सुमंत सिंह के साथ अपने राज्य लौट गया। रात में राजा ने चंपा को अपने पास बुलाकर इतनी देर तक चंदर सिंह के कमरे में बैठने का कारण पूछा- चंपा सारी बात बतलाकर बोली- पिताजी! वह मेरे शौक को जानते हुए भी मुझसे विवाह करने को तैयार हैं। उसने मेरा शौक जानकर खिलौने दिलाने की बात कही है पर मैंने ही आगे वाली स्थिति को जानते हुए विवाह करने से इन्कार कर दिया है। उसने हाथ जोड़कर विवाह की हां भरने की विनती की पर मैं कुछ कह पाती इसके पहले ही महल का आदमी उसे बुलाने आ गया।
राजा ने चंपा से पूछा- बेटी! तुझे चंदरसिंह पसंद हैं। वह लजाकर भाग गई। दूसरे दिन राजा सुमंत सिंह के राज्य पहुंचे। उन्हें इस तरह अचानक आए देख सुमंत सिंह आश्चर्य में पड़ गए, फिर राजा द्वारा सारी बात बतलाने पर सुमंत सिंह बोले- यह तो बहुत अच्छी बात होगी, क्योंकि तुम्हारा महल खिलौनों से भर चुका है। अब विवाह पश्चात् बहू हमारे महल को खिलौनों से सजाएगी। मुझे रिश्ता मंजूर है। राजा अपने राज्य को लौट आए।
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सारी बात रानी और चंपा को बतलाई। फिर शुभ मुहूर्त निकलवाकर विवाह की तारीख तय की और सुमंत सिंह को खबर भिजवाई। वे अपने आदमियों के साथ आए। चंपा के लिए बहुत से सामान के साथ ढेर सारे खिलौने लाए। उन्हें देख चंपा बहुत खुश हो गई। चंपा और चंदर सिंह का विवाह धूमधाम से हुआ। राजा ने राज्य की सारी जनता को भोजन पर बुलाया।
सभी चंपा के लिए खिलौने का उपहार लेकर आए। इस तरह बहुत सारे खिलौने चंपा को उपहारस्वरूप मिले। राजा-रानी ने भी अपनी बेटी को दहेज के साथ बहुत से खिलौने दिए। राजा चंपा को विदा करते हुए सुमंतसिंह से बोले- अब मेरी बेटी खिलौनोवाली राजकुमारी से बदलकर खिलौनें वाली बहू हो गई है। यह सुन सुमंतसिंह हंस दिए। चंपा और चंदरसिंह मुस्करा दिए। (प्रेम फीचर्स)
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