कहानी- प्रवचन का प्रभाव

कहानी- प्रवचन का प्रभाव

bal-khani अंधेरे में लुकते-छिपते, रूपए की पोटली हाथ में दबाए वह मेन सड़क पर आ पहुंचा। रात हो जाने की वजह से सड़क सुनसान थी। कुछ-पशु और भिगमंगे इधर-उधर लेटे हुए ऊंघ रहे थे। वह एक पेड़ के अंधेरे में बैठ कर कुछ सोचने लगा।
अकस्मात उठा। देखा सूरज निकल आया था। लोग-बाग इधर-उधर टहलने लगे थे। वह हर व्यक्ति को देख कर चौंक उठता। उसके दिमाग में एक नई बात कौंधी। आखिर मैं भी जवान हूं, ये भिखमंगे और पशु भी रोज घूम-घूम कर अपना भोजन जुटाते हैं। मेरी मां ने हमेशा इसी तरह डांट लगाई कि मैं जन्म से ही काम करने से दूर भागता रहा।
ओह। कितना अच्छा साधु है। साधु का उपदेश सुनकर कितनी शांति मिलती है, मन को ! हां मिलती तो है। कितनी प्रेरणा मिलती है, उसके उपदेश को सुन कर। दंपति की बातें सुनकर आवारा युवक सोचने लगा, ‘मन को शांति मिलती है। वह शाम होते ही साधु का उपदेश सुनने चल पड़ा।
अंधेरे में किए जाने वाले, छुप कर किए जाने वाले और जिस कर्म में भय हो, उसे कदापि नहीं करना चाहिए। इन कर्मों से मन में अशांति आती है। ये मनुष्य के कर्म नहीं, दानवीय कर्म हैं। इतना सुनते आवारा युवक उठ खड़ा हुआ। वह साधु के पास पहुंचा।
साधु के पास उस (आवारा) युवक को देख कर उपदेश सुनने आए कई लोग चिल्लाने लगे-पकड़ो इसे, इसने मुहल्ले में कई लोगों के यहां चोरियां की हैं। यह चोर है-महात्मा जी इसे पकड़ लीजिए। साधु ने उस युवक को सिर से पैर तक देखा। युवक सिर झुकाए खड़ा था। साधु ने पूछा-प्यारे भाई, ये सारे लोग जो कह रहे हैं वह सही है? युवक ने हां में सिर हिलाया।
महात्मा जी, मैं आज तक अज्ञानता के कारण गंदे कार्य करता रहा। अज्ञानता ने मेरे मन पर इस कदर अधिकार कर लिया था कि मैने अपनी इस स्थिति और कर्म को ही अच्छा मान लिया था। मुझे क्षमा कर दें। आज से मैं परिश्रम करके ही रोटी खाऊंगा।
युवक की बात सुन कर साधु ने कहा-जा, आज से तुमने अच्छे मार्ग पर चलने का वचन दिया है। लोग तुमको चोर न समझें, इसके लिए तुम पिछले कर्मों का प्रायश्चित करो। साधु और युवक की बातें सुनकर उपस्थित जन समूह साधु की प्रशंसा करने लगा। वचन के प्रभाव ने अपना चमत्कार दिखा दिया था। युवक साधु के आश्रम में रहने लगा।
– अखिलेश आर्येन्दु
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