कहानी: चालाक नौकर

कहानी: चालाक नौकर

 ईरान के एक गांव में एक जमींदार रहता था। उसने अपने पास एक आदमी नौकर रखा था। वह बहुत चालाक और होशियार था। एक दिन जमींदार के खेतों में काम करने वाले कुछ किसान, उसके लिए एक भुना हुआ मुर्गा तथा एक बोतल फलों का रस ले कर आए। जमींदार ने थाली में रखे भुने मुर्गे को कपड़े से ढक नौकर को बुला कर थाली व फलों के रस की बोतल को घर ले जाने को कहा।
जमींदार को पता था कि नौकर बहुत चालाक और शैतान है। कहीं वह रास्ते में मुर्गा चट न कर जाए, इसलिए उसने नौकर को हिदायत दी, ‘देखो, इस थाली में कपड़े से जिंदा चिडिय़ा ढकी हुई है और बोतल में जहर है। खबरदार, रास्ते में इस कपड़े को हटाया वरना चिडिय़ा उड़ जाएगी। साथ ही बोतल का ढक्कन खोल कर सूंघने की भी कोशिश न करना वरना जहर को सूंघते ही तुम मर जाओगे। जाओ, दोनों चीजों को सावधानी से घर पहुंचा आओ।’
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नौकर होशियार था। वह फौरन समझ गया कि मालिक उसे बहका रहे हैं। खेत से थोड़ी दूर जाने के बाद एक सुनसान जगह देख कर वह वहीं बैठ गया। पहले उसने स्वाद ले-ले कर थाली में रखा भुना मुर्गा खाया, फिर बोतल में रखा सारा रस भी पी लिया। उधर दोपहर को जमींदार ने घर पहुंच पत्नी से फटाफट भोजन परोस देने को कहा।
पत्नी ने चूल्हे पर चावल चढ़ा रखे थे, जो अभी पूरी तरह पके नहीं थे, इसलिए बोली, ‘अभी खाना तैयार नहीं हुआ है। आपको थोड़ी देर इंतजार करना पड़ेगा।’ ‘कोई बात नहीं, मैंने जो भुना मुर्गा और रस की बोतल नौकर के हाथ भेजी थी, तुम वही दे दो।’ जमींदार ने कहा।
हैरान-परेशान पत्नी ने जब बताया कि नौकर तो यहां आया ही नहीं तो जमींदार गुस्से से आग-बबूला हो उठा। उलटे पांव खेत की तरफ चल दिया।
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खेत में पहुंच जमींदार ने देखा कि नौकर मजे से सो रहा है। जमींदार ने उसे जगाते हुए मुर्गे और रस के बारे में पूछा तो नौकर ने बेहद मायूसी के साथ जवाब दिया, ‘मालिक, जब मैं घर जा रहा था, तब रास्ते में इतनी जोर की हवा चली कि थाल पर ढका कपड़ा उड़ गया।’
नौकर ने जम्हाई लेते हुए आगे कहा, ‘जैसा कि आपने पहले ही कहा था, उसके अंदर ढकी जिंदा चिडिय़ा यानी मुर्गा उड़ गया। अब मैं घबरा गया कि आप मुझे इसकी कड़ी सजा देंगे, इसलिए मैंने बोतल में रखा सारा जहर पी लिया। अब मैं यहां लेटा-लेटा मौत का इंतजार कर रहा हूं।’ अब जमींदार भला क्या कर सकता था। वह नौकर की चालाकी के आगे अपना सिर पीट कर रह गया।
– नरेंद्र देवांगन

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