कहानी: ऐसा नहीं हो सकता..ईश्वर ने सबकी जोड़ी बनाकर भेजी है

कहानी: ऐसा नहीं हो सकता..ईश्वर ने सबकी जोड़ी बनाकर भेजी है

marriage_card हर बार की तरह आज फिर लड़के वालों ने कोकिल को रिजेक्ट कर दिया था। यह कहकर कि लड़की काली है। लड़के वालों के जाते ही पिता चिल्लाए मैं तो परेशान हो गया हूं इस लड़की से, थक गया हूं इसके लिए वर खोजते-खोजते। पता नहीं इसकी किस्मत में फेरे लिखे हैं कि नहीं। कैसी औलाद पैदा की है इस मनहूस मां ने। होते से मर जाती तो अच्छा होता। समाज, रिश्तेदारों के सामने नीचा तो न देखना पड़ता। दादी माँ ने आग में घी डालने की कोशिश की।कोकिल का दिल टूटकर छलनी हो गया था घरवालों की बातों से। अपने कमरे में जाकर वह फूट-फूटकर रोने लगी। माँ ने सांत्वना दी बेटे दु:खी मत हो, ईश्वर ने सबकी जोड़ी बनाकर भेजी है। समय आने पर सब कुछ अपने आप हो जाएगा। मां ने दिलासा देने की कोशिश की। मां, इसकी चिंता नहीं है मुझे कि मेरी शादी नहीं हो रही है। पिताजी और दादी की बातें सुनकर मेरा कलेजा छलनी हो जाता है। अगर मैं काली हूं, खूबसूरत नहीं हूं, तो इसमें मेरा क्या कुसूर? पिताजी क्यों नहीं समझते इस बात को… दिन रात मुझे ताने मारते रहते हैं। दम घुटने लगा है मेरा इस घर में।
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पिताजी खड़े-खड़े सारी बातें सुन रहे थे। भड़कते हुए बोले दम घुटने लगा है तो भागेगी क्या? वैसे ही हमें तेरे कारण कौन सा कम नीचा देखना पड़ रहा है… फिर अपनी पत्नी सारिका की ओर घूरते हुए बोले कितनी जुबान चलने लगी है इसकी, तुमने ही बिगाड़ा है इसे। इतना बोलेगी तो ससुराल में चार दिन नहीं टिक पाएगी। कौन झेलेगा इसे? अब खड़ी-खड़ी मेरा मुंह क्या देख रही हो, चौके में जाकर कुछ काम-धाम करो और साथ में इसे भी ले जाओ। समझाओ कि कम बोले और ठीक से घर गृहस्थी का काम सीख ले। सौ गुण हों तब कहीं जाकर एक अवगुण दब पाता है। कुछ बोलने से पहले जरा सोच लिया करो, बेटी के दिल पर क्या गुजर रही है। कभी सोचा है तुमने। कहते हुए सारिका रसोई में चली गई। मां आप कितनी अच्छी हैं, कितना खयाल रखती हैं मेरा। पिताजी को तो बस अपनी इज्जत की चिंता है, मेरी भावनाओं को कभी आज तक समझने की कोशिश नहीं की उन्होंने। चपातियां सेंकते हुए कोकिल बोली।अब पिताजी का रुख कुछ बदलने लगा था। कोकिल खुश थी और आश्चर्यचकित भी। एक दिन उन्होंने कोकिल को बुलाकर कहा देखो बेटा हम तुम्हारा बुरा नहीं चाहते। आखिर बेटी हो हमारी। अनजाने में हमसे जो कुछ हुआ इसके लिए हमें खेद है। पिताजी आप ऐसी बातों क्यों कर रहे हैं, मुझे कोई शिकायत नहीं है बल्कि मेरे कारण आपको कितना परेशान होना पड़ रहा है। अब इन बातों को छोड़ो जो हुआ सो हुआ। फिर कोई देखने वाले आ रहे हैं क्या? कोकिल ने पूछा। हां, शायद तुम्हें कोई पसंद न आए। चाहे जो भी हो पर तुम्हें कुछ नहीं कहना है…। क्या मतलब? मैं कुछ समझी नहीं। पिछली बार तुम्हारे न कहने से ही बात बिगड़ी थी। मेरी जिंदगी का सवाल है। हर किसी से तो शादी नहीं कर सकती न। माना कि वह लड़का अच्छा नहीं था पर कल जो लड़का तुम्हें देखने आ रहा है वह खानदानी है। गांव में नाम चलता है उसका एवं उसके परिवार का।
नारी ही ब्रह्म विद्या, अन्नपूर्णा, ऋद्धि एवं सिद्धि है
 कहां से आ रहे हैं लड़के वाले? सारिका ने रसोई से आते हुए पल्लू पोंछते हुए कहा। आहूजा परिवार का इकलौता चिराग है वह, कौन नहीं जानता उसे। पिता गर्व से बोले। अच्छा तो उस जीत की बात कर रहे हैं आप? हां-हां वही, तुम जानती हो उसे? उसे कौन नहीं जानता। एक नम्बर का बदमाश है वह। कोकिल से रहा न गया मैं तो अच्छे से जानती हूं उसे। तुमने कुछ गलत करते अपनी आँखों से देखा है क्या? लोगों ने जो कुछ कहा तुमने उस पर विश्वास कर लिया। लोगों का क्या है कुछ भी कहते रहते हैं। अच्छों को बुरा साबित करना तो लोगों की आदत होती है। हमें किसी की बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।नहीं जी, ऐसा नहीं है। वह लड़का वाकई अच्छा नहीं है। कल ही बाजू वाली सुमन ताई उसके बारे में कितना कुछ बता रही थी। हम आँखों देखे मक्खी नहीं निगल सकते। सारिका ने समझाने की कोशिश की। तुम लोगों की बात पर ध्यान मत दो। शादी के पहले तो सब लड़के ऐसे ही होते हैं। शादी के बाद सब सुधर जाते हैं। आप कुछ भी कहें मेरी आत्मा नहीं कह रही ऐसे घर में लड़की देने के लिए। मुसीबत की असली जड़ तुम ही हो। तुम्हारी वजह से इस लड़की के हाथ पीले नहीं हो पा रहे हैं। जैसा खुद बोलती हो वैसा ही इसको भी बोलना सिखा दिया। बहुत हो गई तुम्हारी ये बकवास। अब इस घर में वही होगा जो मैं चाहूंगा। कहते हुए पिताजी ने मां को जोरदार थप्पड़ मारा। आप जहां चाहे मेरा रिश्ता कर दीजिए पर मां से कुछ मत कहिए। सुन ले तेरी वजह से मेरा बना बनाया खेल बिगड़ गया तो बात अच्छी नही होगी। बात तय हो चुकी है। वह लोग बस औपचारिकता मात्र के लिए देखने आ रहे हैं। पिताजी आदेशात्मक स्वर में बोले। आप पिता और पति के नाम पर कलंक हैं। धिक्कार है आपको… चाहे जो भी हो अपनी बेटी की जिंदगी बर्बाद नहीं होने दूंगी… सरिता चीखते हुए बोली।कोकिल के पिता समझ गए थे अब पत्नी के आगे उनकी दाल गलने वाली नहीं है। वह पछता रहे थे कभी अपने तो कभी अपनी पत्नी के फैसले पर।  (विनायक फीचर्स)   आप ये ख़बरें और ज्यादा पढना चाहते है तो दैनिक रॉयल unnamed
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