कहने में संकोच न करें…ज़रूर कहें अपने दिल की बात…!

कहने में संकोच न करें…ज़रूर कहें अपने दिल की बात…!

मनुष्य की विशेषता यही है कि हम अपनी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त कर सकते हैं, जबकि अन्य प्राणी ऐसा नहीं कर सकते। फिर भी देखने में यही आता है कि हम क्रोध और नाराजगी तो प्रकट कर देते हैं किंतु प्यार और प्रशंसा की अभिव्यक्ति में अक्सर संकोच कर जाते हैं। हम लोग तो धन्यवाद का शब्द बोलने तक में कंजूसी करते हैं, केवल क्षणिक संकोच अथवा असमंजस के कारण।आप का अधीनस्थ कर्मचारी अथवा सहयोगी पूरी मेहनत, लगन और निष्ठा से केवल अपना कार्य ही नहीं करता, वरन अपने दायित्व के दायरे में कहीं बढ़कर आप की जिम्मेेदारियों में आप को हर प्रकार से सहयोग देता है, सहायता करता है।आप की जिम्मेवारियों को अपनी कर अपने ऊपर ले लेता है। आप का दायां हाथ बन जाता है। क्या कभी काम की भीड़भाड़, भागदौड़ व व्यस्तता से दो मिनट का समय निकाल कर आप ने उसे पास बिठा कर प्रशंसा के दो शब्द कहे हैं? शायद नहीं, यह कमजोरी सामान्यत: हम सब में है।
गृहिणी घंटों खप कर, भांति-भांति के स्वादिष्ट व्यंजन और पकवान बनाती है। अपनी पाक कला का सारा ज्ञान और कौशल लगा देती है। मन का सारा स्नेह भी उड़ेल देती है। हम अपनी मानसिक, पारिवारिक, कारोबारी अथवा अन्य उलझनों में ग्रस्त परोसा हुआ भोजन उदरस्थ भर कर लेते हैं। यह भी नहीं देख पाते कि वह बेचारी प्रशंसा के दो बोल सुनने के लिए कितनी उत्सुकता से प्रतीक्षारत है। उस के मन की दशा का जरा अनुमान लगा कर देखिए।
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प्यार और प्रशंसा के दो शब्द बोलने में जेब से कुछ खर्च भी नहीं होता। ऐसा भी नहीं है कि यदाकदा प्रशंसा का भाव हमारे मन में आता ही नहीं। कठिनाई बस इतनी है कि उचित समय पर प्यार अथवा प्रशंसा व्यक्त करने में हम संकोच या लापरवाही कर जाते हैं। कारण यही है कि हम इस भावना को महत्व नहीं देते। दिन प्रतिदिन के जीवन में अनेकों ऐसे अवसर आते रहते हैं कि प्यार अथवा प्रशंसा के दो शब्द, सुनने वाले का मन जीत लेते हैं, उसका हौसला बढ़ाते तथा उस का उत्साह दुगुना कर देते हैं।
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अगली बार किसी भी अवसर पर किसी के लिए मन में प्यार, प्रशंसा या कृतज्ञता का भाव उत्पन्न हो तो उसे दबाइए मत, टालिए मत। संकोच और दुविधा में मत पडि़ए। जो मन में आया है उसे कह डालिए। सयानों का यह भी कहना है कि किसी को डांटना डपटना हो तो अकेले में डांटिए और किसी की प्रशंसा करनी हो तो सब के सामने करिए। इस का भी अपना महत्व है।
ओम प्रकाश बजाज

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