कविता

कविता

लुकती छिपती प्रीत वो
कहाँ गया नवनीत वो
दूध छाछ की रीत वो
नाचे भँवरे चटकी कलियाँ
इठलाती अल्हड सी गलियां
आँगन वाले नीम तले वें
खिलबतियां हंसती फुलझडिय़ाँ
मृदुल मृदुल संगीत वो
कहाँ गया मनमीत वो
वें अमुवा की डार वो झूले
लौट रहे परदेशी भूले
पनघट पर जुटती पनिहारन
गाय, भैस, घूंघट, पथि हारन
बहुवों के बंटते सिंधारे
भावज भेजी रीत वो
बागों में कूकी कोयलया
मुदित हवा पहने पायलया
मोर, पपीहे, मेढक, बगुले
खेत क्यार अमिया और फलियां
पुलकित-पुलकित मौसम छलिया
कहाँ गए मनमीत वो
लुकती छिपती प्रीत वो
कहाँ गया नवनीत वो
दूध छाछ की रीत वो
-डॉ पुष्पलता

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