कविता-आपको तो ढूंढे नहीं मिलता हर रोज

कविता-आपको तो ढूंढे नहीं मिलता हर रोज

11111111अखिलेश भईया आपको तो ढूंढे नहीं मिलता हर रोज
लेकिन हम तो खुद तराशते हैं, हीरा हर रोज
आपको मिल जाते खोटे सिक्के हर रोज,
हम तो भुना लेते हैं,फटा नोट भी हर रोज
आप युवाओं में बहुत भारी हैं,
पर भईया दबी-कुचली जनता तो हमारी है
राहुल भैया के भी हम बहुत आभारी हैं
किसानों के कर्जा माफी करने का ब्यान, आप पर भारी है
इसी लिए तो राहुल जी जगह-जगह खाट बिछवा रहे हैं
हमारी बनने वाली सीएम, शीला दीक्षित जी 85 साल की बेचारी हैं
हर जगह उनका पहुंचना बहुत लाचारी है
इसलिए राहुल जी जगह-जगह खाट बिछवा रहे हैं
शीला दीक्षित जी चल फिर नहीं सकी, इसीलिए उन्हें खाट सहित उठा रहे हैं
हमारे मोदी जी महान है, बुलेट ट्रेनें चला रहे हैं
दिल्ली से लखनऊ तक मोदी जी बुलेट ट्रेन से आ रहे हैं,
मायावती जी के लिए अपनी लखनऊ की कुर्सी बहुत जरूरी है
दिल्ली से लखनऊ की बहुत ज्यादा दूरी है,
मोदी जी की बुलेट ट्रेन में जगह मिलनी जरूरी है
मायावती जी रैलियां कर-कर के, अपनी शक्ति दिखा रही हैं
बुलेट ट्रेन में ही एक कुर्सी हथियाना भी जरूरी है
मजबूरी है लखनऊ की कुर्सी बहुत जरूरी है।
– ठा. उदयपाल सिंह
203/12, सदर बाजार, मुजफ्फरनगर

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