करियर चमकाने वाले कोर्स

करियर चमकाने वाले कोर्स

पिछले कुछ वर्षों में करियर ट्रैंड तेजी से बदला है। विद्यार्थी मेडिकल, इंजीनियरिंग या फिर मैनेजमेंट जैसे कोर्सों के साथ कुछ ऐसे क्षेत्रों में भी हाथ आजमाने लगे हैं, जहां चुनौतियों के साथ आगे बढऩे का भी काफी अवसर होता है। ये कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां युवाओं के लिए आगे आने वाले दिनों में बेशुमार मौके हैं।
एनर्जी इंजीनियरिंग: एनर्जी इंजीनियरिंग का कोर्स भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। सोलर व विंड एनर्जी पर सरकार का फोकस काफी बढ़ा है। देश में कई सोलर पार्क भी बन रहे हैं। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में एनर्जी इंजीनियर्स की मांग काफी बढऩे वाली है। इस क्षेत्र में संभावनाओं को देखते हुए बड़ी कंपनियां भी यहां कदम रखने जा रही हैं।
आप भौतिकी और गणित के साथ 12वीं करने के बाद बीटेक में प्रवेश ले कर इस क्षेत्र में करियर बना सकते हैं। आमतौर पर एनर्जी क्षेत्र में बीटेक, एमटेक डिग्रीधारी विद्यार्थियों की ज्यादा मांग होती है। जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग के बारे में जागरूकता बढऩे से भी एनर्जी इंजीनियरों की मांग बढ़ी है। सरकारी संस्थानों के साथ निजी क्षेत्र की कंपनियों में भी काम करने के काफी अवसर होते हैं।
मैनेजमेंट कंसल्टेंसी : आज के दौर में संस्थान के विकास में मैनेजमेंट कंसल्टेंट का अहम योगदान होता है। ये संस्थान की तरक्की के लिए रणनीति तैयार करने के साथ व्यापार की मौजूदा समस्याओं का विश्लेषण करते हैं। देश के प्रमुख संस्थानों से एमबीए की डिग्री हासिल करने के बाद मैनेजमेंट कंसल्टेंट के रूप में कैरियर बनाया जा सकता है। इस क्षेत्र में एक्सपोजर भी काफी मिलता है। एमबीए करने के बाद एसोसिएट अथवा कंसल्टेंट जैसी सीनियर पोजिशन पर काम मिल सकता है। अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि परंपरागत व्यवसाय में लोग जितना कई साल में सीखते हैं, उतना हुनर तो एक साल की मैनेजमेंट कंसल्टेंसी में हासिल कर लेते हैं। इस क्षेत्र में सफल होने के लिए बेहतर कम्युनिकेशन स्किल्स जरूरी हैं ताकि आप अपने विचारों से क्लाइंट को प्रभावित करने में सफल हो सकें। क्लाइंट की बातों को सुनना और उसका अच्छा मार्गदर्शन करना भी जरूरी है। इस क्षेत्र में शुरूआत में 5 से 8 लाख रूपए सालाना का पैकेज मिलने लगता है।
लॉजिस्टिक्स: ई-कॉमर्स की उछाल ने लॉजिस्टिक को काफी तेजी से उभारने का काम किया है। केपीएमजी-स्नैपडील की रिपोर्ट के अनुसार, ई-कॉमर्स व ई-रिटेल से जुड़े लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग व तकनीकी क्षेत्र में आने वाले दिनों में सबसे अधिक नौकरियां पैदा होंगी। देश के विभिन्न संस्थानों में इस क्षेत्र के लिए अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट दोनों तरह के कोर्स मौजूद हैं। अंडर ग्रेजुएट कोर्स के लिए 12वीं पास तथा पीजी कोर्स के लिए ग्रेजुएशन करना जरूरी है। इन दिनों लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट में ही दो वर्षीय एमबीए कोर्स भी कई संस्थान ऑफर कर रहे हैं। कोर्स करने के बाद नौकरी की ढेरों संभावनाएं होती हैं।
फैशन स्टाइलिंग: देश में फैशन स्टाइलिंग का कॉन्सेप्ट अभी भी नया है। हाल के वर्षों में फैशन के प्रति लोगों का क्रेज बढ़ा है जिससे इस क्षेत्र में काफी स्कोप देखा जा रहा है। यदि आप लोगों को स्टाइलिश बनाने का हुनर रखते हैं, तो फैशन स्टाइलिंग में काफी अच्छा करियर बना सकते हैं। इस क्षेत्र में सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि आप अपने काम में कितने हुनरमंद हैं और खुद की मार्केटिंग किस तरह से कर पाते हैं। साथ ही, आपको फैशन दुनिया के नए ट्रेंड की जानाकरी भी जरूर होनी चाहिए। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी(निफ्ट) आदि से यह कोर्स किया जा सकता है। इस कोर्स में प्रवेश के लिए 12वीं पास होना जरूरी है। कोर्स पूरा करने के बाद आप फैशन हाउस, एड एजेंसी, फिल्म इंडस्ट्री, इवेंट मैनेजमेंट कंपनी आदि में जॉब की तलाश कर सकते हैं।
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ऐप्स डेवलपमेंट: ऐप्स डेवलपमेंट का कोर्स युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। कंप्यूटर साइंस में डिग्री, जैसे बीई या बीटेक करके ऐप्स डेवलपमेंट के क्षेत्र मेें करियर बनाया जा सकता है। इसके लिए आईओएस या जावा पर एप्लिकेशन राइटिंग के लिए प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेस की जानकारी होनी चाहिए। कई निजी संस्थान ऐप्स डेवलपमेंट में शॉर्ट टर्म या डिप्लोमा कोर्स संचालित करते हैं। इसमें ढाई-तीन महीने का एडवांस ट्रेनिंग कोर्स चलाया जाता है। यहां मोबाइल यूआई डिजाइनर और यूजर एक्सपीरियंस एंड यूजेबिलिटी विशेषज्ञ के रूप में काम कर सकते हैं। इसके अलावा, इस क्षेत्र में इंजीनियर और मोबाइल आर्किटेक्ट के रूप में भी नौकरी के अवसर मौजूद हैं। प्रोग्रामिंग में ट्रेंड आईटी प्रोफेशनल्स की डिमांड ज्यादा है। इस क्षेत्र में एंड्रॉयड ऐप डेवलपर, मोबाइल ऐप डेवलपमेंट कंसल्टेंट, मोबाइल ऐप टेस्टर, मोबाइल ऐप डेवलपमेंट डिबगिंग एक्सपर्ट जैसे पदों पर जॉब्स के अवसर मिलते हैं।
फाइनेंशियल इंजीनियरिंग: फाइनेंशियल इंजीनियरिंग तेजी से उभरता हुआ करियर है और इस क्षेत्र में संभावनाएं भी अनंत हैं, हालांकि नाम के बावजूद यह क्षेत्र पूरी तरह इंजीनियरिंग से जुड़ा नहीं है। इसमें फाइनेंशियल टूल्स के साथ इंजीनियरिंग की थ्योरी और प्रोग्रामिंग का इस्तेमाल होता है। इस क्षेत्र से जुड़े प्रोफेशनल्स वित्तीय नियमों के क्रियान्वयन, कॉरपोरेट फाइनेंस, पोर्टफोलियो मैनेजमेंट, रिस्क मैनेजमेंट, ट्रेडिंग आदि जैसे कार्यों से जुड़े होते हैं। फाइनेंशियल इंजीनियर बनने के लिए बैचलर्स डिग्री होना जरूरी है।
कई संस्थान फाइनेंशियल इंजीनियरिंग से संबंधित सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री कोर्स करवाने लगे हैं। आमतौर पर फाइनेंशियल इंजीनियर डाटा आधारित फाइनेंशियल मॉडल्स तैयार करने के लिए मार्केट ट्रैंड्स का विश्लेषण करते हैं। इसके लिए वे मैथ्स के फॉर्मूला, प्रोग्रामिंग और इंजीनियरिंग थ्योरीज का भी इस्तेमाल करते हैं। कोर्स पूरा करने के बाद बैंकिंग, इंश्योरेंस, सिक्योरिटी ट्रेडिंग और इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी जैसे विभिन्न वित्तीय क्षेत्रों में नौकरी मिल जाती है। फाइनेंशियल इंजीनियरों की शुरूआती आय 6 से 14 लाख रूपए सालाना हो सकती है।
-नरेंद्र देवांगन

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