कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ जन जागृति जरूरी

कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ जन जागृति जरूरी

जिस तरह से पल्स पोलियो और एड्स के खिलाफ सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है, ठीक उसी प्रकार कन्या भू्रण हत्या के खिलाफ देशव्यापी जनांदोलन चलाये जाने की जरूरत है।
यह एक अच्छी बात है कि देर से ही सही, समाज कल्याण मंत्रलय भारत सरकार का ध्यान भी इस ओर आकर्षित हुआ है और टी. वी. पर इसके खिलाफ विज्ञापन दिया जाने लगा है जिसमें कन्या भ्रूण हत्या के औचित्य पर सवाल उठाया गया है लेकिन सिर्फ इतने से ही काम नहीं चलेगा। जरूरत अब इससे कहीं आगे सोचने की भी है।
इसके साथ ही हमें उन सामाजिक और आर्थिक कारणों को भी दूर करना होगा जिनके चलते किसी स्त्री के द्वारा कन्या रत्न का जन्म अब पढ़े लिखे और सुसंस्कृत घरों में भी सामाजिक अपराध की श्रेणी में आ गया है।
दरअसल कन्या भू्रण हत्या की समस्या उस सामाजिक व्यवस्था से भी जुड़ी हुई है जहां लड़की को आज भी एक बोझ ही समझा जाता है और अधिकतर मां-बाप का प्रयास भी जैसे तैसे इस बोझ से मुक्ति पाने का होता है। इसे इन उदाहरणों से भी समझा जा सकता है कि एक लड़की का विवाह एक ऐसे बेरोजग़ार युवक से कर दिया जाता है जो खुद अपना ही बोझ उठा नहीं सकता।
जब आपको एक औरत पसन्द करती है, तब आप एक पति हैं.. !

गर्भावस्था के दौरान कन्या भू्रण हत्या के पीछे एक अन्य सामाजिक कारण भी है जो कानून और व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। जिस तादाद में बलात्कार की घटनाएं बढ़ रही है उससे उन मां-बापों की नींदें हराम हो गई हैं जिनकी युवा पुत्रियां हैं और जो रोजाना स्कूल-कॉलेज जाती हैं। दुधमुंही बच्चियों के साथ रोजाना हो रहे पाशविक कृत्य लोगों को चिंताओं में डाले हुए हैं। ये तमाम ऐसे कारक तत्व हैं जो कन्या
भ्रूण हत्या के लिये लोगों को प्रेरित करते हैं।जंकफूड से बचें

अंत में धन्य हैं वे मां-बाप जो कन्या रत्न को जन्म देकर उल्लेखित उन प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अपने-अपने सामथ्र्य के अनुसार उनका पालन पोषण कर रहे हैं और हर संभव तरीके से उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने और स्वावलम्बी बनाने का प्रयत्न कर रहे हैं।
– रमेन दास गुप्ता ‘शुभ्रो’

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