औषधीय पौधों की पहचान और संरक्षण पर जोर

औषधीय पौधों की पहचान और संरक्षण पर जोर

नई दिल्ली। आयुर्वेद चिकित्सा से जुड़े विशेषज्ञों ने भारतीय चिकित्सा परपंरा के औषधीय पौधों की पहचान और उनके संरक्षण पर जोर दिया है। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के निदेशक प्रो. अभिमन्यु कुमार ने आज यहां औषधीय पौधों पर आधारित मासिक पत्रिका ‘तरूशक्ति’ के विमोचन के अवसर पर कहा कि भारतीय घरों में पारंपरिक तौर पर ऐसे पौधों होते हैं जिनसे मौसमी बीमारियों का इलाज किया जा सकता है। डा. कुमार ने कहा कि औषधीय पौधों की पहचान एवं संरक्षण पर जोर दिया जाना चाहिए और इनके संबंध में लोगों को जागरुक करना चाहिए। पत्रिका के विमोचन के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के लोकसभा सांसद राजेंद्र अग्रवाल, दूरदर्शन की अपर महानिदेशक दीपा चंद्रा और राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं सूचना स्रोत संस्थान के निदेशक डा. मनोज कुमार पटौरिया मौजूद थे। श्री अग्रवाल ने इस अवसर पर कहा कि आयुर्वेद के बारे में एक संग्रहालय स्थापित किया जाना चाहिए जिसमें आयुर्वेद से संबंधित वस्तुओं, प्रक्रिया और पद्धतियों को प्रदर्शित किया जाना चाहिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस संबंध में वह संसद में भी मामला उठाएंगे। उन्होंने कहा कि औषधीय पौधों को गमलों और घरों के आस पास खाली जमीन पर लगाया जा सकता है। लोगों को औषधीय पौधों की जानकारी दी जानी चाहिए। डा. पटौरिया ने कहा कि भारतीय औषधीय पौधों को पश्चिम जगत पेटेंट कराने के प्रयास में हैं और इस संबंध में भारतीयों को सजग रहना चाहिए। औषधीय पौधों के संबंध में अधिक से अधिक जानकारी लोगों को देनी चाहिए, जिससे इनका व्यसायीकरण रोका जा सके। तरूशक्ति पत्रिका के संपादक देवेंद्र कुमार पाल ने कहा कि पत्रिका का उद्देश्य औषधीय पौधों के संबंध में लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ समाज में इस बारे में बिखरी पडी सामग्री को समेटना भी है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह पत्रिका औषधीय पौधों के बारे में प्रमाणिक पत्रिका होगी।

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