औषधि का कार्य भी करता है आम

औषधि का कार्य भी करता है आम

mangoesआम को फलों का राजा माना जाता है। आम के मौसम में हर घर में इस फल को अवश्य ही देखा जा सकता है। सॅैकड़ों प्रकार के आम अपने रंग-रूप-स्वाद के कारण लोगों में प्रिय हैं। क्या आप जानते हैं कि स्वादिष्ट आम में अनेक बीमारियों को दूर करने के गुण भी मौजूद हैं?
आइये आम के औषधीय गुणों से रू-ब-रू होकर इसका लाभ आप भी उठायें।
आम की ताजी पत्तियों का रस खांसी, हैजा, बवासीर, दांतों के रोग, पथरी, अण्डवृद्धि, चर्मरोग आदि अनेक रोगों में लाभप्रद है। आम के पत्तों को छाया में सुखाकर पीसकर, कपड़छन करके आधा चम्मच दिन में तीन बार लेते रहने से पथरी में लाभ होता है।
गले को सुरीला बनाने के लिए आम की पत्तियों की चाय बनाकर पियें या पत्तों का काढ़ा बनाकर गुनगुना शहद मिलाकर रात को सोते समय पियें। इस काढ़े से कुल्ला करते रहने से दांत दर्द सहित अनेक दंत रोग दूर होते हैं। आम की कोमल पत्तियों के रस के लेप से स्तनों पर मालिश करते रहने से स्तनवृद्धि आश्चर्यजनक रूप से होती है।
आम के फूल को आम्रमंजरी कहा जाता है। आम्रमंजरी भूख बढ़ाने एवं पाचन क्रि या सुधारने में अति लाभकारी होती है। यह रूचिवद्र्धक, शीतल, मल को रोकने वाली, प्रमेह, पित्त, कफज रोगों को मिटाने वाली होती है। हाथ-पैरों की जलन में आम्रमंजरी को उन पर रगडऩे से लाभ होता है। आम के तने की छाल एवं जड़ की छाल को मिलाकर काढ़ा बनाकर पीते रहने से सूजाक (सिफलिस) एवं गनोरिया (उपदंश) में लाभ होता है। इससे दस्त भी रूकते हैं। फोड़े पर आम का गोंद लगाकर पट्टी बांधने से फोड़ा पककर फूट जांता है।
कच्चे आम के छिलकों को छाया में सुखाकर चूर्ण बना लें। रक्तप्रदर रोग में दो ग्राम चूर्ण को घी के साथ मिलाकर उसमें चीनी डालकर सुबह-शाम एक ग्राम की मात्रा में लेेते रहने से अत्यंत लाभ होता है। इन छिलकों को नीम की पत्ती, अनार की छाल, गुलाब के ताजे फूल के साथ पीसकर चेहरे एवं होंठों पर लेप करते रहने से सुन्दरता में वृद्धि होती है। आम के छिलकों को दही के साथ पीस कर पिलाने से हैजा की बीमारी दूर होती है।
आम की गुठली की गिरी को पीस कर सूंघने से बवासीर में लाभ होता है। दस्त होने पर गुठली की गिरी, बेलगिरी एवं समान मात्रा में मिश्री मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 2 से चार ग्राम की मात्रा में पानी के साथ वयस्क को तथा आधी मात्रा में बच्चों को देते रहने से लाभ होता है।
आम की गुठली को सेंक कर चूर्ण बना लें इसमें नमक-शक्कर मिलाकर पुन: पीस लें। इस चूर्ण को देने से दस्त में रूकावट आती है। गिरी के चूर्ण में आम की पत्तियों को जलाकर उसके भस्म को मिला कर कपड़छन करके दांतों पर मलते रहने से दांत के अनेक रोग दूर होते हैं।
सिर दर्द में गुठली एवं छोटी हरड़ दूध में पीसकर सिर पर लेप लगाते रहने से लाभ होता है। जो बच्चे मिट्टी खाते हैं उन्हेें पके आम की गुठली भूनकर पाउडर बनायें तथा उसमें सौंफ इलायची, मिश्री या शक्कर (चीनी) मिलाकर बच्चों को देना चाहिए। आम की गुठली से बनी आयुर्वेदिक औषधि ‘पुष्टपानुग’ के प्रयोग से श्वेतप्रदर, रक्तप्रदर, योनिक्षत, योनिदाह, योनि संक्र मण एवं खूनी बवासीर, पेट के कीड़े, खूनी दस्त, गर्भाशय विकृति, योनि से चिपचिपा पदार्थ निकलते रहने की बीमारियां दूर होती हैं। आम की गिरी को भूनकर चूर्ण बनाकर शहद के साथ खाने पर पेट का दर्द दूर होता है।
आम का रस एक कप दो चम्मच शहद मिलाकर नित्यप्रति सुबह-शाम पीते रहने से क्षयरोग (टी०बी०) में लाभ पहुंचाता है। पाचन शक्ति ठीक रखने के लिए आम का रस 50 ग्राम, एक ग्राम सोंठ चूर्ण मिलाकर पिएं। आम के रस में दूध, अदरक का रस एक चम्मच तथा थोड़ी शक्कर मिलाकर नित्य पीते रहने से मस्तिष्क को बल मिलता है। पुराना सिरदर्द, आंखों के आगे अंधेरा छाना, आदि दोष का निवारण होता है।
आम का रस रक्तशोधक होता है तथा यह हृदय एवं यकृत को बल देता है। आम के रस में विटामिन ‘एÓ भरपूर मात्र में होता है। इस रस के पीने से दुर्बलता नष्ट्र होती है तथा वात संस्थान उत्तेजित होता हैं। मात्र सौ ग्राम आम का रस पीने से शरीर की विटामिन ‘ए’ की मात्र पूर्ण हो जाती है। इससे पेट साफ होता है तथा गैस नहीं बनती है।
कच्चे आम खाने से गुर्दे की पथरी गलकर निकल जाती है। इससे तिल्लीरोग में भी लाभ पहुंचता है। पका आम राख में भूनकर ठण्डा करके चूसने से खांसी ठीक होती है। आमरस कब्ज नाशक, उच्चरक्तचाप नाशक होता है। आम चूसने से आंतों की शक्ति बढ़ती है। आम के रस में रोगप्रतिरोधक शक्ति होती है। इससे शरीर सुन्दर और सुडौल बनता है।
परमानन्द परम

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