ऑफिस में जब कोई करने लगे परेशान

ऑफिस में जब कोई करने लगे परेशान

office खूबसूरत स्मार्ट लहर को अभी ऑफिस ज्वाइन किए कुछ ही महीने हुए होंगे कि वो डिप्रेशन की शिकार हो गई। कारण था उसकी सीनियर प्रिया वर्मा का उसको लेकर ईष्यालु होना। प्रिया न काम में होशियार थी, न लहर की तरह स्मार्ट और खूबसूरत ।
प्रिया लहर को तंग करने के लिए नित नये हथकंडे अपनाने लगी थी। वो अपने काम को भी लहर पर डाल खुद इधर उधर गॉसिप करती रहती। लहर द्वारा मेहनत से काम पूरा किए जाने पर काम का सारा क्रेडिट खुद लेकर बॉस की गुड बुक्स में आ जाती।
लहर ने अपने पापा को जो स्वयं एक एम एन सी में टॉप एक्जीक्यूटिव थे, जब अपनी प्रॉब्लम बताई तो उन्होंने उसे सबसे पहले अपना मोराल किसी हाल में भी डाउन न होने देने की सलाह देते हुए उसे समझाया, ‘तुम्हारे काम को तुम्हारी सीनियर अपना बताती हैं, देटस प्रूफ कि तुम कितनी काबिल हो। तुम्हें बहुत से अवसर मिलेंगे अपने को प्रूव करने के। मीटिंग्स, सेमिनार, कांफ्रेंस इत्यदि के दौरान तुम अपने आइडियाज सबके सामने रखकर उन्हें इंप्रेस कर सकती हो। अपनी इमीडिएट  प्रॉब्लम को लेकर तुम निडर होकर अपनी सीनियर से खुल के बात करो। देखो वो क्या कहती है। अगर वो अपनी चाल पर अड़ी रहती है, किसी तरह का समझौता नहीं करती है, तब तुम्हारे पास बॉस से शिकायत के अलावा दूसरा ऑप्शन नहीं है।
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यह तो तो हुआ परेशान करने का एक तरीका और उसका समाधान लेकिन ऑफिस में परेशान करने के और भी बहुत तरीके हैं। यहां भी जो डर गया, मर गया वाली बात ही लागू होती है। जो स्वभाव से नर्म, भीरू, दब्बू और हायपर सेंसिटिव होते हैं, वे इस तरह के तंग करने वाले व्यवहार का प्रतिरोध नहीं कर पाते हैं और मन ही मन घुटते रहते हैं। कई तरह की मानसिक बीमारियां पाल लेते हैं।
क्या हैं ये परेशान करने के तरीके?

– हर समय आपके काम में नुक्स ही निकालना भले ही आप कितनी भी मेहनत से अच्छा काम क्यों न करें। पुरानी गलतियों की बात दोहरा कर आपको नीचा दिखाना।
– आपको काम करने का सलीका नहीं है, ‘यू आर गुड फॉर नथिंग’ कहकर आपको गाली देना।
– दूसरों के सामने आपसे इनसल्टिंग वे में बोलना, आप पर शाउट करना।
– मीटिंग, सेमिनार टूर आदि पर जाने से रोकना।
– आपके आइडियाज, कमेंट या सुझावों को दूसरों के सामने जरा भी अहमियत न देना।
– आपके खिलाफ कूटनीतिक चालें खेल आपको मौका ही न देना जिससे आप बॉस से कलीग की शिकायत कर सकें।
आप ही निशाने पर क्यों?
– आपकी एक्सपर्ट कार्यप्रणाली को लेकर उनका असुरक्षित महसूस करना, आपको लेकर उनमें कांप्लेक्स होना कि कहीं वे आपकी कार्यक्षमता के आगे गैरजरूरी न बन जाएं।
– आपके परफेक्शन से ईष्या रखते हुए वे इसलिए भी आपको परेशान कर सकते हैं ताकि आपका ध्यान अपने काम से हट जाए।
– कुछ लोग स्वभाव से ही नेगेटिव होते हैं। इनका माइंडसेट ऐसा ही होता है। कुछ डॉमिनेटिंग होते हैं और कुछ एग्रेसिव क्रोधी स्वभाव वाले।
कैसे निपटें:-
– आप अगर जरा भी दर्शाएंगी कि आप उनकी बातों से हर्ट हुई हैं तो उन्हें और बढ़ावा मिलेगा, इसलिए जहां तक संभव हो इग्नोर करें, या हां में हां मिलाकर बात खत्म करें।
– अपनी सोच पॉजिटिव रखें। किसी की नेगेटिव बातों का अपनी सोच पर विपरीत असर न पड़ऩे दें।
– ज्यादा से ज्यादा दोस्त बनाएं। उनके साथ मिक्स अप होने की कोशिश करें। वे आपका सपोर्ट सिस्टम मजबूत करेंगे।
– उषा जैन ‘शीरीं’आप ये ख़बरें अपने मोबाइल पर पढना चाहते है तो दैनिक रॉयलunnamed
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