ऑफिस और परिवार में संतुलन है जरूरी…विवाह के बाद आ जाती है समस्याएँ …!

ऑफिस और परिवार में संतुलन है जरूरी…विवाह के बाद आ जाती है समस्याएँ …!

office-workers सुपर फास्ट भागते युग में लड़कियां भी उतनी ही जागरूक हैं अपने कैरियर के लिए जितने कि लड़के। जब तक आप अविवाहित हैं तब तक तो अपने कैरियर पर पूरा ध्यान देकर आप नौकरी कर सकती हैं। समस्या पैदा होती है विवाह के बाद।
जब पति पत्नी दोनों ही घर से 10 से 12 घंटे बाहर रहते हैं तो परिवार की जिम्मेदारी कैसे निभाई जाए। विवाहोपरान्त पारिवारिक जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं और कुछ समय उपरान्त अपना परिवार भी बढऩे लगता है, तब असली समस्या होती है। तब एक बड़ा मुद्दा बन जाता है परिवार और ऑफिस में सही तालमेल बैठाना। प्रोफेशनल्स जिनका ऑफिस जाने का तो समय तय है पर घर वापिस आने का नहीं, वहां समस्या और बढ़ जाती है कि बच्चे के जन्म के पश्चात उसकी सही परवरिश के लिए समय कैसे निकाला जाए। सुपर फास्ट युग में बच्चे को सुपर चाइल्ड बनाना है, उसे जमाने के साथ रखना है तो उसे एक्स्ट्रा ध्यान और सुविधाएं देकर ही आगे रखा जा सकता है मसलन समय-समय पर डॉक्टरी जांच, अच्छे स्कूल में शिक्षा, अच्छा पौष्टिक भोजन, स्पोर्टस में भागीदारी, डांस, म्यूजिक, पैंटिंग क्लासेस में भेजना।
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और तो और, अब मैथ्स में आगे बढऩे के लिए कई कोर्सेस हैं जैसे अबाकस आदि। ये सब कराने के लिए मां का घर रहना अति आवश्यक है। तब औरत के लिए किसी एक के साथ चलना मजबूरी बन जाता है। यदि वे दोनों परिस्थितियों को साथ चलाना चाहती है तो ऐसे में जीना एक चुनौती बन जाता है महिला के लिए। यदि आप भी इसी कशमकश में हैं तो पहले ही योजनाबद्ध तरीके से चलें। अपने और पति के बीच पहले प्लानिंग कर लें, तभी चुनौती को स्वीकारना उचित रहता है।बच्चे को लाने से पहले प्लानिंग कर लें:- विवाहोपरान्त हर लड़के लड़की की इच्छा होती है कि अब उनका अपना परिवार हो जिसमें एक नये सदस्य का आगमन हो जिससे वे खेल सकें और अपना बचपन उसमें देख सकें। बच्चे का आगमन सुखद तो बहुत होता है पर जिम्मेदारियों से परिपूर्ण होता है। इसके लिए माता पिता दोनों को अपने कैरियर के साथ-साथ उन जिम्मेदारियों को निभा सकने का पहले विचार करना चाहिए। फैमिली प्लान करते समय ध्यान दें कि ऑफिस के काम को भी नुक्सान न पहुंचे और आपकी पारिवारिक शांति को भी।
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जीवनशैली में बदलाव के लिए तैयार रहें:- नौकरी के साथ परिवार में नये मेहमान की एंट्री के साथ आपको जीवनशैली में बदलाव लाना पड़ेगा। इसके लिए मानसिक रूप से तैयार रहें। नये मेहमान के आने से आपको उसे भी पूरा समय देना है और ऑफिस में भी आपको पूरा काम करना है। क्या इस बदलाव के लिए आप तैयार हैं। रात्रि की नींद पूरी न होना, कार्य की अधिकता को सहन करने के लिए स्वयं को पहले तैयार करें, फिर परिवार बढ़ाने की सोचें। जीवन के इस बदलाव हेतु अपने बॉस को भी सूचित करें ताकि वे भी आपकी परिस्थितियों से वाकिफ रहें।बच्चों को दें क्वालिटी टाइम:- बच्चे या बच्चों को क्वालिटी टाइम देना बेहद जरूरी है। आज के समय की मांग भी है कि आप बच्चों के साथ कैसा समय व्यतीत करते हैं। सप्ताह भर का शेड्यूल पति के साथ बना लें ताकि मिल जुल कर इस जिम्मेदारी को निभा सकें। कभी जल्दी आकर बच्चों को पार्क ले जाएं, घुमाने ले जाएं या फिर कहीं बाहर खिलाने ले जाएं। बच्चों को विश्वास दिलाते रहें कि नौकरी के साथ वो भी उनके लिए महत्त्वपूर्ण हैं। वीकएंड प्रयास कर बच्चों के साथ मनाएं।
यदि कहीं परिवार में जाना पड़ता है तो उन्हें भी साथ लेकर जाएं ताकि उन्हें यह महसूस न हो कि उनका वीकएंड खराब हुआ है।छुट्टी पर न करें ऑफिस का काम:- जब भी छुट्टी हो, उसे पूरी तरह मनाएं। उस दिन घर पर ऑफिस का काम बिल्कुल न करें। प्रात: अपने रूटीन समय में उठकर अपने कुछ काम निपटा लें ताकि बच्चों के जागने पर आप उन्हीं के साथ रह सकें। यदि आप छुट्टी वाले दिन भी अपने ऑफिस वर्क को निपटाने में लग जाएंगे तो बच्चों के साथ इंसाफ नहीं होगा। कभी मजबूरी हो तो देर रात तक बैठकर काम निपटा लें।पी टी ए और स्कूली समारोहों को न करें नजर अंदाज:- बच्चों के स्कूल में पी टी ए मीटिंग या स्कूल समारोह वाले दिन प्रयास कर दोनों स्कूल जायें। यदि किसी कारणवश कोई आफिशियल मीटिंग आ गई हो तो दोनों में से एक को अवश्य जाना चाहिए। बच्चों की पी टी ए डेट्स को अपनी डायरी में नोट कर रख लें ताकि ऑफिस प्रोग्राम को उसी अनुसार रखा जा सके। बच्चों के स्कूल समारोह में जाना हो तो पहले से नोट कर अपने ऑफिस में जल्दी जाने के लिए बता दें या छुट्टी लेनी हो तो सूचित करें ताकि अन्तिम समय पर कोई परेशानी न उठानी पड़े। वीकएंड पर बच्चों को एक दो हॉबी कोर्स में दाखिल करवा दें ताकि आप उसे छोड़ सकें और ले सकें। सब बातों के साथ तालमेल मिलाकर ही फैमिली प्लान करें तो सुखी परिवार का सुख भोग पाएंगे।
– नीतू गुप्ता दैनिक रॉयल बुलेunnamed
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