ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन

ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन

बढ़ती स्वार्थमूलक प्रवृत्ति के चलते अब गाय को ‘दूध देने वाली मशीन’ मात्र ही समझा जाने लगा है और अधिक मात्रा में दूध प्राप्त के लिए कहीं-कहीं खतरनाक इंजेक्शन ‘ऑक्सीटोसिन’ का प्रयोग भी गाय पर किया जा रहा है जो कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। भ्रमवश ऐसा माना जाने लगा है कि इस इंजेक्शन के लगने से गाय से अधिक दूध प्राप्त हो जाता है किन्तु वास्तव में इस प्रक्रिया से दूध की मात्रा तो कोई खास बढ़ती नहीं किन्तु दूध निकलने का प्रवाह अवश्य बढ़ जाता है क्योंकि यह औषधि गर्भाशय की संकुचन क्रिया को तीव्र कर देती है। दूध निकालने की इस घातक कृत्रिम प्रक्रिया से गायों में दुग्ध स्रावशक्ति तथा प्रजनन शक्ति कम होने लगती है तथा समय से पूर्व ही गाय बांझ हो जाती हैं। हार्मोन के अन्य इंजेक्शनों की भांति ही ऑक्सीटोसिन का प्रयोग भी प्रतिबंधित है जो विशेष परिस्थितियों में ही केवल रजिस्टर्ड पशु चिकित्सकों द्वारा प्रयोग किया जा सकता है।
परिवर्तन संसार का नियम है
अधिकतर गायें भैंसें 7 से 10 मिनट तक ही दूध देती हैं किन्तु स्वार्थवश वाणिज्यिक संस्थानों द्वारा गाय-भैंसों को दिन में दो बाद इंजेक्शन लगाकर 15 से 20 मिनट तक प्रतिदिन दूध प्राप्त किया जा रहा है जो अनैतिक है। इस प्रकार से प्राप्त किये हुए दूध ऑक्सीटोसिन की कुछ मात्र दूध में शेष बची रहती है जो स्वास्थ्य के लिए अहितकर है। चिंता का विषय यह है कि प्रतिबन्धित होने के उपरान्त भी ऑक्सीटोसिन औषधि खुले आम अनधिकृत प्रयोग हेतु बाजार में सर्वत्र उपलब्ध हो रही है।

Share it
Top