ऐसे बच सकते हैं कमर के दर्द से..!

ऐसे बच सकते हैं कमर के दर्द से..!

कभी-कभी अचानक उठा कमर का दर्द बहुत ही तकलीफ़देह साबित होता है। शरीर एकदम बेजान सा हो जाता है और यदि कुछ महसूस होता है तो सिर्फ दर्द जो कभी-कभी इस हद तक भी भयंकर हो जाता है कि शरीर में फ़ेफड़ों की सूजन, हृदय बाल्व में खराबी, आँखों में सूजन और अकड़ाहट जैसे कई घातक रोग स्वत: ही उत्पन्न हो जाते हैं। कमर दर्द होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे काफ़ी देर तक उल्टी-सीधी मुद्राओं में खड़ा होना, देर तक चलना, थकना, झुककर व लेटकर पढऩा, अधिक वजऩ उठाना, कूदना, गिरना और आवश्कता से अधिक श्रम करना। चिकित्सकों का मानना है कि मेरूदण्ड की बनावट मज़बूत और नाजुक दोनों ही प्रकार से होती है। यह सारे शरीर के अंगों के सतुंलन का भार उठाता है। कई बार विभिन्न कारणों से यह संतुलन गड़बड़ा जाता है और शरीर के किसी भी हिस्से की पर्याप्त देखभाल न होने के कारण कमर दर्द उत्पन्न हो जाता है। इसके अलावा कमर दर्द के कई अन्य कारण भी होते हैं। दरअसल आयु बढऩे के साथ-साथ शरीर की हड्डियों का लचीलापन भी कम होने लगता है और ऊतक सख्त हो जाते हैं। ये परिवर्तन अधिकतर रीढ़ की हड्डी में होते हैं तथा इन पर चोट व प्रहार के कारण कशेरूकाओं के बीच की डिस्क खिसक जाती है और कमर दर्द होता है। कुल मिलाकर यदि यह कहा जाये तो उपयुक्त होगा कि रीढ़ की हड्डी पर अनावश्यक दबाव, खिंचाव अथवा तनाव पडऩे से मांसपेशियों के तंतु प्रभावित होते हैं जो कमर दर्द का मुख्य कारण होता है।
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आमतौर पर यह भी देखा जाता है कि दुबले व सामान्य लोगों की अपेक्षा मोटे व्यक्तियों में तोंद निकलने व वजऩ न संभाल पाने और रीढ़ की हड्डी पर दबाव पडऩे व झुकने से कमर दर्द अधिक होता है। इसके अलावा स्त्रियों में भी कमर दर्द की शिकायत अधिक पायी जाती है। हाल ही में चिकित्सकों ने एक शोध में स्पष्ट किया है कि गर्भवती महिलाओं में प्रसव हेतु ऑपरेशन के दौरान बेहोश करने के लिए जो सुईं रीढ़ की हड्डी में लगाई जाती है जिससे पीठ दर्द पनपता है। शोध से यह नतीज़ा भी सामने आया है कि इस बेहोशी की सुई से उनकी पेशियाँ कमज़ोर पड़ जाती हैं और तंतुओं के टूटने से जो पीठ दर्द शुरू होता है उसे ठीक करने के लिए उपचार में कभी-कभी वर्षों भी लग जाते हैं।
पीठ दर्द से बचाव:-
– कमर दर्द से बचने के लिए नियमित व्यायाम करें।
– क्षमता व आवश्यकता से अधिक कार्य न करें।
– अधिक लेटना, खड़े होना, चलना और झुकना नहीं चाहिए।
– ऊंचे हील के जूते, चप्पल या सैंडिल न पहनें।
– पीठ दर्द होने पर थोड़ा विश्राम करें।
– बिना ज्ञान के व्यायाम के आसन न करें।
– गर्म पानी अथवा बर्फ़ की थैलियों की सिंकाई से पीठ दर्द में आराम मिलता है।
– वाहन चलाते समय कमर को टेक अवश्य दें।पति- “सब्जी में नमक नहीं है !”

– संभव हो तो सप्ताह में एक बार कमर की मालिश अवश्य करायें।
– व्यायाम करते समय सीधे खड़े होकर दोनों हाथों को ऊपर ले जायें। फिर पंजों के बल खड़े होकर शरीर का संतुलन बनाये रखें। इससे पीठ दर्द नहीं होता।
– एक अन्य आसन के अनुसार पेट के बल ज़मीन पर लेटें। फिर अपने हाथ सिर से आगे सामने की ओर फैलाय
इसके बाद बायां हाथ और दायां पैर एक साथ ऊपर उठायें तथा दोनों को साथ ही विपरीत दिशा में खींचने की कोशिश करें। इस प्रक्रिया से पीठ दर्द में राहत पहुंचती है।
– तीसरा आसन है पेट के बल लेटें। फिर हाथ पीठ के पीछे बांधें और पैरों व सिर को एक साथ ऊपर उठायें। धड़ पेट के बल ज़मीन पर टिकाये रखें। इन सभी व्यायामों से कमर दर्द से बचाव तो होगा ही, स्वास्थ्य व शरीर भी तरोताज़ा रहेगा।
– मनु भारद्वाज ‘मनु’

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